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माता-पिता की सेवा ही सब तीर्थों का सार
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Sat, 10 Jan 2015 11:59 PM IST
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श्री रामकथा अमृत वर्षा के तीसरे दिन मानस मर्मज्ञ विजय कौशल महाराज ने कहा
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कि माता-पिता की सेवा करने वाले को किसी तीर्थ पर जाने की आवश्यकता नहीं
है। भगवान माता पिता की सेवा करने वाले पर कृपा करते हैं। उन्होंने कहा कि
भगवान हठ से मिलते हैं समझौते से नहीं।
सीपी ग्राउंड में रामकथा अमृत वर्षा में आचार्य ने महर्षि विश्वामित्र के प्रसंग की व्याख्या की। कहा कि संत का चिंतन राष्ट्र के लिए होता है। वह अपने स्वार्थ के लिए नहीं सोचते। विश्वामित्र ने समाज की रक्षा के लिए राम लक्ष्मण को दशरथ से मांगा था। परमार्थ की दृष्टि से किए गए कार्य का साक्षी स्वयं परमात्मा होता है।
विश्वामित्र ने यज्ञ की रक्षा के लिए दशरथ से राम लक्ष्मण को मांगा इसके पीछे उनका उद्देश्य युवा शक्ति को जागृत करना था। हर राष्ट्र की रीढ़ युवा शक्ति होती है। इसके माध्यम से देश विकास पथ पर अग्रसर होता है। हमारे देश को भी आज ऐसी ही युवा शक्ति की आवश्यकता है, जो राष्ट्र के प्रति चिंतन करे।
राष्ट्र को विकास पथ पर ले जाने के लिए तत्पर रहे। उन्होंने अहिल्या उद्धार का वर्णन करते हुए कहा कि जीव दुर्गुणों का संगम है। मानस मर्मज्ञ ने राम के जनकपुर जाने की कथा का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान की जनकपुर यात्रा भक्ति यात्रा है। इसमें भगवान स्वयं जानकी की भक्ति के वशीभूत होकर जनकपुर जाते हैं। वह भी गुरु कृपा से। उन्होंने कहा कि बिना गुरु के भक्ति का मार्ग पर भी प्रशस्त नहीं हो सकता।
इस दौरान चंद्र प्रकाश अग्रवाल, सत्यप्रकाश अग्रवाल, लक्ष्मी नरायन अग्रवाल, गिरीश चंद्र अग्रवाल, मनोज कौशल, मिथलेश अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल, रजनी गोयल, प्रह्लाद नरायन अग्रवाल, डा. वीडी शर्मा, योगेश तिवारी, राजीव बिंदल, संजय अग्रवाल, पवन गुप्ता, प्रमोद तिवारी, सत्य नरायन अग्रवाल, ज्ञान प्रकाश पाठक, मनोज गुप्ता, पियूष अग्रवाल, आदि मौैजूद रहे। संचालन रामकृष्ण त्रिवेदी ने किया।
सीपी ग्राउंड में रामकथा अमृत वर्षा में आचार्य ने महर्षि विश्वामित्र के प्रसंग की व्याख्या की। कहा कि संत का चिंतन राष्ट्र के लिए होता है। वह अपने स्वार्थ के लिए नहीं सोचते। विश्वामित्र ने समाज की रक्षा के लिए राम लक्ष्मण को दशरथ से मांगा था। परमार्थ की दृष्टि से किए गए कार्य का साक्षी स्वयं परमात्मा होता है।
विश्वामित्र ने यज्ञ की रक्षा के लिए दशरथ से राम लक्ष्मण को मांगा इसके पीछे उनका उद्देश्य युवा शक्ति को जागृत करना था। हर राष्ट्र की रीढ़ युवा शक्ति होती है। इसके माध्यम से देश विकास पथ पर अग्रसर होता है। हमारे देश को भी आज ऐसी ही युवा शक्ति की आवश्यकता है, जो राष्ट्र के प्रति चिंतन करे।
राष्ट्र को विकास पथ पर ले जाने के लिए तत्पर रहे। उन्होंने अहिल्या उद्धार का वर्णन करते हुए कहा कि जीव दुर्गुणों का संगम है। मानस मर्मज्ञ ने राम के जनकपुर जाने की कथा का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान की जनकपुर यात्रा भक्ति यात्रा है। इसमें भगवान स्वयं जानकी की भक्ति के वशीभूत होकर जनकपुर जाते हैं। वह भी गुरु कृपा से। उन्होंने कहा कि बिना गुरु के भक्ति का मार्ग पर भी प्रशस्त नहीं हो सकता।
इस दौरान चंद्र प्रकाश अग्रवाल, सत्यप्रकाश अग्रवाल, लक्ष्मी नरायन अग्रवाल, गिरीश चंद्र अग्रवाल, मनोज कौशल, मिथलेश अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल, रजनी गोयल, प्रह्लाद नरायन अग्रवाल, डा. वीडी शर्मा, योगेश तिवारी, राजीव बिंदल, संजय अग्रवाल, पवन गुप्ता, प्रमोद तिवारी, सत्य नरायन अग्रवाल, ज्ञान प्रकाश पाठक, मनोज गुप्ता, पियूष अग्रवाल, आदि मौैजूद रहे। संचालन रामकृष्ण त्रिवेदी ने किया।