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सीबीसी व बायोकेमिस्ट्री मशीनें ठीक, जांचें शुरू होने से मरीजों को राहत
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पांच अक्तूबर को प्रकाशित खबर। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
कायमगंज। सीएचसी में सीबीसी व बायो केमिस्ट्री जांच करने वाली मशीनें ठीक करा दी गई हैं। इससे मरीजों को राहत मिली है। उन्हें अब जांच के लिए निजी लैब में रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे।
सीएचसी में करीब छह माह से सीबीसी और दो साल से बायो केमिस्ट्री मशीन खराब पड़ी थीं। यहां आने वाले मरीजों को निजी लैबों पर रुपये खर्च कर जांचे करानी पड़ रही थीं।
पांच अक्तूबर के अंक में अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेकर मशीनें दुरुस्त करा दीं हैं।
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इन दिनों सीएचसी की ओपीडी में हर रोज 500 से 600 मरीज आ रहे हैं। डॉ. विपिन कुमार के मुताबिक इसमें 70 प्रतिशत मरीज वायरल, खांसी, जुकाम बुखार के ही होते हैं। वह रोजाना 25 से 30 मरीज सीबीसी जांच के लिए भेज रहे हैं।
साथ ही तीन-चार मरीजों की किट से डेंगू की जांच कराई जा रही है। जांच कराने आए मरीज अशोक कुमार, मीना देवी ने बताया कि अस्पताल में सुविधा शुरू होने से मरीज की जेब का बोझ कम हुआ है।
पहले तो निजी लैब 300 रुपये खर्च करने पड़ते थे। एलटी राजपाल ने बताया कि बायो केमिस्ट्री मशीन से जांच के लिए मरीज कम ही आते हैं। क्योंकि यहां डॉक्टरों की कमी है।
हृदय रोग विशेषज्ञ या अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर हों तो इसकी जरूरत पड़ेगी। माह में एक-दो जांच हो जाती है। बुधवार को 21 सीबीसी, 21 मलेरिया, पांच डेंगू और 91 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई।
सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. सरगवर इकबाल ने बताया कि अब सीएचसी में सभी जांचें हो रही हैं। साथ ही डेंगू मरीजों के लिए पांच बेड का वार्ड आरक्षित किया गया है।
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सीएचसी में करीब छह माह से सीबीसी और दो साल से बायो केमिस्ट्री मशीन खराब पड़ी थीं। यहां आने वाले मरीजों को निजी लैबों पर रुपये खर्च कर जांचे करानी पड़ रही थीं।
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पांच अक्तूबर के अंक में अमर उजाला ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेकर मशीनें दुरुस्त करा दीं हैं।
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इन दिनों सीएचसी की ओपीडी में हर रोज 500 से 600 मरीज आ रहे हैं। डॉ. विपिन कुमार के मुताबिक इसमें 70 प्रतिशत मरीज वायरल, खांसी, जुकाम बुखार के ही होते हैं। वह रोजाना 25 से 30 मरीज सीबीसी जांच के लिए भेज रहे हैं।
साथ ही तीन-चार मरीजों की किट से डेंगू की जांच कराई जा रही है। जांच कराने आए मरीज अशोक कुमार, मीना देवी ने बताया कि अस्पताल में सुविधा शुरू होने से मरीज की जेब का बोझ कम हुआ है।
पहले तो निजी लैब 300 रुपये खर्च करने पड़ते थे। एलटी राजपाल ने बताया कि बायो केमिस्ट्री मशीन से जांच के लिए मरीज कम ही आते हैं। क्योंकि यहां डॉक्टरों की कमी है।
हृदय रोग विशेषज्ञ या अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर हों तो इसकी जरूरत पड़ेगी। माह में एक-दो जांच हो जाती है। बुधवार को 21 सीबीसी, 21 मलेरिया, पांच डेंगू और 91 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई।
सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. सरगवर इकबाल ने बताया कि अब सीएचसी में सभी जांचें हो रही हैं। साथ ही डेंगू मरीजों के लिए पांच बेड का वार्ड आरक्षित किया गया है।