{"_id":"5d39eb598ebc3e6cb025c3e0","slug":"tendar-farrukhabad-news-knp5036785166","type":"story","status":"publish","title_hn":"चहेतों के लिए बदल दी गईं टेंडर की शर्तें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चहेतों के लिए बदल दी गईं टेंडर की शर्तें
विज्ञापन
बिजली विभाग में कई बार विभागीय धांधली सामने आने के बावजूद कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाली जा चुकी हैं। ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया होने के बावजूद चहेतों को ही काम देने का पूरा प्रयास किया जाता है। डिस्कनेक्शन के लिए निकाले गए टेेंडरों में ठेकेदारों की दावेदारी देखते हुए नियम व शर्तें ही बदल दी गईं। जिससे चहेतों को भी मौका मिल सके।
जनपद में बिजली विभाग के तीन खंड कार्यालय हैं। इनमें राजस्व वसूली के लिए प्रत्येक अवर अभियंता को डिस्कनेक्शन गैंग, जीप व सीढ़ी सहित उपलब्ध कराई जानी है।
प्रत्येक खंड में डिस्कनेक्शन गैंग व जीप के लिए टेंडर निकाले गए। 27 जुलाई को टेंडर खुलने थे। इसमें अन्य शर्तों के साथ यह भी शर्त शामिल थी कि वाहन का पंजीकरण फर्म अथवा फर्म के स्वामित्व वाले व्यक्ति का होना चाहिए।
विज्ञापन
इस शर्त के अनुसार अधिकारियों के करीबी ठेकेदार टेंडर डालने की ही स्थिति में नहीं थे। इसके चलते टेंडर की यह शर्त ही हटा दी और टेंडर डालने व खोलने की तिथि 29 जुलाई नियत कर दी गई।
इससे पूर्व के कई टेंडरों में प्रपत्रों के साथ संविदा डालने में जिलाधिकारी द्वारा निर्गत चरित्र प्रमाण व हैसियत प्रमाणपत्र भी मांगा गया था। जिससे सरकारी धन लेकर भागने की स्थिति में ठेकेदार से रिकवरी की जा सके। जबकि डिस्कनेक्शन के टेंडर नंबर 6, 7 व 8 में शर्तें बदलने के बाद भी यह महत्वपूर्ण बिंदु भी शामिल नहीं किए गए।
इस संबंध में अधीक्षण अभियंता एके श्रीवास्तव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल नेटवर्क क्षेत्र से बाहर मिला। इससे बात नहीं हो सकी।
विज्ञापन
जनपद में बिजली विभाग के तीन खंड कार्यालय हैं। इनमें राजस्व वसूली के लिए प्रत्येक अवर अभियंता को डिस्कनेक्शन गैंग, जीप व सीढ़ी सहित उपलब्ध कराई जानी है।
विज्ञापन
प्रत्येक खंड में डिस्कनेक्शन गैंग व जीप के लिए टेंडर निकाले गए। 27 जुलाई को टेंडर खुलने थे। इसमें अन्य शर्तों के साथ यह भी शर्त शामिल थी कि वाहन का पंजीकरण फर्म अथवा फर्म के स्वामित्व वाले व्यक्ति का होना चाहिए।
विज्ञापन
इस शर्त के अनुसार अधिकारियों के करीबी ठेकेदार टेंडर डालने की ही स्थिति में नहीं थे। इसके चलते टेंडर की यह शर्त ही हटा दी और टेंडर डालने व खोलने की तिथि 29 जुलाई नियत कर दी गई।
इससे पूर्व के कई टेंडरों में प्रपत्रों के साथ संविदा डालने में जिलाधिकारी द्वारा निर्गत चरित्र प्रमाण व हैसियत प्रमाणपत्र भी मांगा गया था। जिससे सरकारी धन लेकर भागने की स्थिति में ठेकेदार से रिकवरी की जा सके। जबकि डिस्कनेक्शन के टेंडर नंबर 6, 7 व 8 में शर्तें बदलने के बाद भी यह महत्वपूर्ण बिंदु भी शामिल नहीं किए गए।
इस संबंध में अधीक्षण अभियंता एके श्रीवास्तव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल नेटवर्क क्षेत्र से बाहर मिला। इससे बात नहीं हो सकी।