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क्लोरीन रहित पानी की हो रही आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो फर्रुखाबाद
Updated Fri, 03 Jun 2016 11:31 PM IST
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नगर पालिका के स्टोर में रखी क्लोरीन।
- फोटो : अमर उजाला
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फतेहगढ़-फर्रुखाबाद युग्म नगरों में पालिका परिषद दूषित पेयजल की आपूर्ति कर रही है। हकीकत यह है कि पालिका के स्टोर में दो साल पहले खरीदी गई क्लोरीन सड़ रही है। दूषित पेयजल पीने से नगरवासियों को तरह-तरह की बीमारियां हो रही हैं।
नगर पालिका के जलकल विभाग के दोनों शहरों में पानी की 44 टंकियां हैं। इनमें पांच टंकियां बिना आपरेटर के संचालित कराई जा रही हैं। यदि आपरेटर के पद पर कार्यरत कृष्ण कुमार टंडन की ही मानी जाए तो एक महीने में एक टंकी पर 100 लीटर क्लोरीन खर्च होती है। उनके अनुसार चार हजार 300 लीटर क्लोरीन प्रतिमाह पानी में मिलाई जा रही है। यदि स्टॉक रजिस्टर और स्टोर कीपर की मानी जाए तो 21 जून 2014 को पांच हजार लीटर क्लोरीन खरीदी गई थी।
हालात यह हैं कि दो साल बीत जाने के बाद भी एक हजार 623 लीटर क्लोरीन स्टाक में दो साल पहले खरीदे गए क्लोरीन का शेष बच गया है और 22 मई 2016 को पांच हजार लीटर क्लोरीन फिर खरीदी गई। कुल मिलाकर इस समय पालिका के स्टोर में छह हजार 623 लीटर क्लोरीन भरी है। असलियत यह है कि किसी भी टंकी में क्लोरीन नहीं डाली जा रही है। दो साल पहले खरीदी गई पांच हजार लीटर क्लोरीन में से चार हजार 300 लीटर क्लोरीन एक महीने में ही खर्च हो जाती है।
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एक महीने के स्थान पर दो साल क्लोरीन डालने पर भी स्टाक में एक हजार 623 लीटर क्लोरीन बनी रहना यह साबित कर रहा है कि दो साल से जलकल विभाग ने दूषित पेयजल की आपूर्ति की है। किसी भी टंकी में क्लोरीन मिलाकर आपूर्ति नहीं की है। इसी का नतीजा है कि फतेहगढ़ के सिविल लाइन मढ़ैया में करीब आधा दर्जन लोगों की जान डायरिया से जा चुकी है। सीएमओ भी दूषित पेयजल से डायरिया जैसी बीमारी होने की बात स्वीकार कर रहे हैं।
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नगर पालिका के जलकल विभाग के दोनों शहरों में पानी की 44 टंकियां हैं। इनमें पांच टंकियां बिना आपरेटर के संचालित कराई जा रही हैं। यदि आपरेटर के पद पर कार्यरत कृष्ण कुमार टंडन की ही मानी जाए तो एक महीने में एक टंकी पर 100 लीटर क्लोरीन खर्च होती है। उनके अनुसार चार हजार 300 लीटर क्लोरीन प्रतिमाह पानी में मिलाई जा रही है। यदि स्टॉक रजिस्टर और स्टोर कीपर की मानी जाए तो 21 जून 2014 को पांच हजार लीटर क्लोरीन खरीदी गई थी।
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हालात यह हैं कि दो साल बीत जाने के बाद भी एक हजार 623 लीटर क्लोरीन स्टाक में दो साल पहले खरीदे गए क्लोरीन का शेष बच गया है और 22 मई 2016 को पांच हजार लीटर क्लोरीन फिर खरीदी गई। कुल मिलाकर इस समय पालिका के स्टोर में छह हजार 623 लीटर क्लोरीन भरी है। असलियत यह है कि किसी भी टंकी में क्लोरीन नहीं डाली जा रही है। दो साल पहले खरीदी गई पांच हजार लीटर क्लोरीन में से चार हजार 300 लीटर क्लोरीन एक महीने में ही खर्च हो जाती है।
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एक महीने के स्थान पर दो साल क्लोरीन डालने पर भी स्टाक में एक हजार 623 लीटर क्लोरीन बनी रहना यह साबित कर रहा है कि दो साल से जलकल विभाग ने दूषित पेयजल की आपूर्ति की है। किसी भी टंकी में क्लोरीन मिलाकर आपूर्ति नहीं की है। इसी का नतीजा है कि फतेहगढ़ के सिविल लाइन मढ़ैया में करीब आधा दर्जन लोगों की जान डायरिया से जा चुकी है। सीएमओ भी दूषित पेयजल से डायरिया जैसी बीमारी होने की बात स्वीकार कर रहे हैं।