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छावनी में मालिकाना हक के लिए मांगे जाएंगे सुझाव
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मालिकाना हक के लिए मांगे जाएंगे सुझाव
फर्रुखाबाद। कैंट की जमीन के लिए अंग्रेजों के कानून को बदलने के लिए छावनी बोर्ड में गजट का प्रकाशन कर सुझाव मांगे गए हैं। रक्षा मंत्रालय से आदेश स्थानीय छावनी परिषद आ गया है। इसे बोर्ड की बैठक में रखने के बाद सदस्यों (सभासदों) से इस पर सुझाव मांगे जाएंगे। उन्हें मंत्रालय भेजा जाएगा।
छावनी एरिया में दो शॉपिग कांप्लेक्स, दो स्कूल, 36 आवास, आठ बंगले सहित कई संपत्तियां हैं। सात वार्डों में कर्नलगंज, शीशमबाग, कासिमबाग, नौगवां मोहल्ले हैं। अभी तक छावनी क्षेत्र की जमीन भारत सरकार की है। उसे बेचने व खरीदने की अनुमति नहीं है।
रक्षा मंत्रालय ने कानून को बदलने के लिए गजट का प्रकाशन कर सभी छावनी परिषद में आदेश भेजा और इस संबंध में सुझाव मांगा गया है। छावनी परिषद की अधिशासी अधिकारी आकांक्षा तिवारी इन दिनों विदेश में हैं। अवर अभियंता स्वतंत्र प्रताप सिंह सेंगर ने बताया कि आदेश आ गया है।
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इसे बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड में विचार विमर्श के बाद सदस्यों से सुझाव मांगे जाएंगे। सुझावों को रक्षा मंत्रालय भेजा जाएगा। वहां से आगे की कार्रवाई तय होगी।
नए कानून से आम जनता को होगी राहत
बार एसोसिएशन के महासचिव संजीव पारिया छावनी क्षेत्र के बंगले में रहते हैं। उन्होंने बताया कि नया कानून बनने से आम जनता को राहत मिलेगी। अंग्रेजों ने शासन करने के लिए जगह-जगह छावनी बनाईं थीं। तब संसाधन का अभाव था लेकिन अब ऐसा नहीं है। ऐसे में छावनी क्षेत्रों की संख्या कम करना चाहिए। जहां पर आबादी हो उससे दूर छावनी क्षेत्र होना चाहिए।
नहीं देना पड़ेगा लोगों को टैक्स
पूर्व सभासद कर्नलगंज निवासी वकील अनवर जमाल ने बताया कि सात वार्डों में हजारों लोग रहते हैं। नए कानून से लोगों को हर माह का टैक्स नहीं देना पड़ेगा। अभी जगह हिसाब से 400 से लेकर 1000 रुपये का टैक्स हर महीने छावनी में जमा करना पड़ता है। इसके अलावा छावनी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सेना के नियमों का पालन करना पड़ता है। रास्ते जब चाहे बंद व खोले जाते हैं।
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फर्रुखाबाद। कैंट की जमीन के लिए अंग्रेजों के कानून को बदलने के लिए छावनी बोर्ड में गजट का प्रकाशन कर सुझाव मांगे गए हैं। रक्षा मंत्रालय से आदेश स्थानीय छावनी परिषद आ गया है। इसे बोर्ड की बैठक में रखने के बाद सदस्यों (सभासदों) से इस पर सुझाव मांगे जाएंगे। उन्हें मंत्रालय भेजा जाएगा।
छावनी एरिया में दो शॉपिग कांप्लेक्स, दो स्कूल, 36 आवास, आठ बंगले सहित कई संपत्तियां हैं। सात वार्डों में कर्नलगंज, शीशमबाग, कासिमबाग, नौगवां मोहल्ले हैं। अभी तक छावनी क्षेत्र की जमीन भारत सरकार की है। उसे बेचने व खरीदने की अनुमति नहीं है।
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रक्षा मंत्रालय ने कानून को बदलने के लिए गजट का प्रकाशन कर सभी छावनी परिषद में आदेश भेजा और इस संबंध में सुझाव मांगा गया है। छावनी परिषद की अधिशासी अधिकारी आकांक्षा तिवारी इन दिनों विदेश में हैं। अवर अभियंता स्वतंत्र प्रताप सिंह सेंगर ने बताया कि आदेश आ गया है।
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इसे बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड में विचार विमर्श के बाद सदस्यों से सुझाव मांगे जाएंगे। सुझावों को रक्षा मंत्रालय भेजा जाएगा। वहां से आगे की कार्रवाई तय होगी।
नए कानून से आम जनता को होगी राहत
बार एसोसिएशन के महासचिव संजीव पारिया छावनी क्षेत्र के बंगले में रहते हैं। उन्होंने बताया कि नया कानून बनने से आम जनता को राहत मिलेगी। अंग्रेजों ने शासन करने के लिए जगह-जगह छावनी बनाईं थीं। तब संसाधन का अभाव था लेकिन अब ऐसा नहीं है। ऐसे में छावनी क्षेत्रों की संख्या कम करना चाहिए। जहां पर आबादी हो उससे दूर छावनी क्षेत्र होना चाहिए।
नहीं देना पड़ेगा लोगों को टैक्स
पूर्व सभासद कर्नलगंज निवासी वकील अनवर जमाल ने बताया कि सात वार्डों में हजारों लोग रहते हैं। नए कानून से लोगों को हर माह का टैक्स नहीं देना पड़ेगा। अभी जगह हिसाब से 400 से लेकर 1000 रुपये का टैक्स हर महीने छावनी में जमा करना पड़ता है। इसके अलावा छावनी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सेना के नियमों का पालन करना पड़ता है। रास्ते जब चाहे बंद व खोले जाते हैं।