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Farrukhabad News: अस्पताल में यहां-वहां पड़े स्ट्रेचर, भटक रहे तीमारदार
Wed, 19 Nov 2025 12:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Wed, 19 Nov 2025 12:17 AM IST
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फोटो-30 लोहिया इमरजेंसी वाहन स्टैंड के पास पड़ा स्ट्रैचर। संवाद
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में अनदेखी के चलते आए दिन तीमारदार और मरीज स्ट्रेचर के लिए भटकते रहते हैं। जिम्मेदारों की मनमानी इतनी कि मोर्चरी से शव निकलने के बाद कई-कई दिन स्ट्रेचर पड़े रहते।
यही नहीं वाहन स्टैंड के बीच में भी स्ट्रेचर पड़े रहते हैं। इसका खामियाजा तीमारदारों को ही भुगतना पड़ता है। लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पोर्टिको में हर वक्त स्ट्रेचर खड़े रहने के निर्देश हैं। इसके पीछे मंशा है कि गंभीर मरीज को लाने वाले तीमारदारों को इधर-उधर न भटकना पड़े। मगर स्ट्रेचर अधिकांश दिनों में पोर्टिको में नहीं मिलतीं। तीमारदार इमरजेंसी तक दौड़ लगाते हैं। वहां भी आए दिन स्ट्रेचर खड़े नहीं मिलते।
इस पर कई बार मरीजों को गोद में लेकर इमरजेंसी तक पहुंचाना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन ने कागजों में इमरजेंसी गेट पर एक वार्ड बॉय की ड्यूटी लगाई जाती है, मगर वह भी स्ट्रेचर की व्यवस्था नहीं करते। हालात ऐसे हैं कि मोर्चरी में स्ट्रेचर पर रखा शव तो पोस्टमार्टम के लिए चला जाता, मगर स्ट्रेचर कई-कई दिन मौके पर ही बेतरतीब पड़ी रहती हैं। इसी तरह इमरजेंसी वाहन स्टैंड के पास भी स्ट्रेचर पड़े रहने से खासी दिक्कत होती है। इस ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।
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ईएमटी फोल्डिंग स्ट्रेचर का नहीं करते प्रयोग
सभी सरकारी एंबुलेंस में मरीजों और तीमारदारों की सुविधा के लिए फोल्डिंग स्ट्रेचर लगे होते हैं। मरीजों को उठाने और अस्पताल छोड़ने के लिए ईएमटी और चालक एंबुलेंस की फोल्डिंग स्ट्रेचर का प्रयोग करेगा, मगर ऐसा नहीं होता। ईएमटी तीमारदार को स्ट्रेचर लाने के लिए इमरजेंसी तक दौड़ाता है। इससे इलाज लिए भी देरी होती है।
कोई भी स्ट्रेचर इधर-उधर पड़ा नहीं रहना चाहिए। यदि ऐसा है, तो गलत है। मरीजों को दिक्कतें नहीं होनी चाहिए। संबंधित कर्मियों से जवाब मांगेंगे।
-डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
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यही नहीं वाहन स्टैंड के बीच में भी स्ट्रेचर पड़े रहते हैं। इसका खामियाजा तीमारदारों को ही भुगतना पड़ता है। लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पोर्टिको में हर वक्त स्ट्रेचर खड़े रहने के निर्देश हैं। इसके पीछे मंशा है कि गंभीर मरीज को लाने वाले तीमारदारों को इधर-उधर न भटकना पड़े। मगर स्ट्रेचर अधिकांश दिनों में पोर्टिको में नहीं मिलतीं। तीमारदार इमरजेंसी तक दौड़ लगाते हैं। वहां भी आए दिन स्ट्रेचर खड़े नहीं मिलते।
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इस पर कई बार मरीजों को गोद में लेकर इमरजेंसी तक पहुंचाना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन ने कागजों में इमरजेंसी गेट पर एक वार्ड बॉय की ड्यूटी लगाई जाती है, मगर वह भी स्ट्रेचर की व्यवस्था नहीं करते। हालात ऐसे हैं कि मोर्चरी में स्ट्रेचर पर रखा शव तो पोस्टमार्टम के लिए चला जाता, मगर स्ट्रेचर कई-कई दिन मौके पर ही बेतरतीब पड़ी रहती हैं। इसी तरह इमरजेंसी वाहन स्टैंड के पास भी स्ट्रेचर पड़े रहने से खासी दिक्कत होती है। इस ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।
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ईएमटी फोल्डिंग स्ट्रेचर का नहीं करते प्रयोग
सभी सरकारी एंबुलेंस में मरीजों और तीमारदारों की सुविधा के लिए फोल्डिंग स्ट्रेचर लगे होते हैं। मरीजों को उठाने और अस्पताल छोड़ने के लिए ईएमटी और चालक एंबुलेंस की फोल्डिंग स्ट्रेचर का प्रयोग करेगा, मगर ऐसा नहीं होता। ईएमटी तीमारदार को स्ट्रेचर लाने के लिए इमरजेंसी तक दौड़ाता है। इससे इलाज लिए भी देरी होती है।
कोई भी स्ट्रेचर इधर-उधर पड़ा नहीं रहना चाहिए। यदि ऐसा है, तो गलत है। मरीजों को दिक्कतें नहीं होनी चाहिए। संबंधित कर्मियों से जवाब मांगेंगे।
-डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।

फोटो-30 लोहिया इमरजेंसी वाहन स्टैंड के पास पड़ा स्ट्रैचर। संवाद