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दहशत कायम, कांबिंग शुरू
अमर उजाला/फर्रुखाबाद
Updated Sun, 02 Apr 2017 11:39 PM IST
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खेत में जंगली जानवर के पांव के निशान देखते डीएफओ व अन्य।
- फोटो : amarujala
क्षेत्र में दहशत का पर्याय बने जंगली जानवर को पकड़ने के लिए रविवार को वन विभाग की टीम ने डेरा डाल दिया है। खेतों में जानवर के पंजे के निशान मिलने के बाद टीम ने कांबिंग शुरू कर दी हैं। डीएफओ का दावा है कि निशान लकड़बग्घे के है।
रविवार को जंगली जानवर के बछड़े के मारने की सूचना पर डीएफओ अपनी टीम के साथ पहुंचे। डीएफओ देवेश श्रीवास्तव के साथ कानपुर से रैपिड फोर्स टीम के साथ डॉ आरके सिंह और प्रतापगढ़ के वन रेंजर यतेंद्र भान मौके पर पहुंचे। टीम ने कांबिंग की तो कुछ दूरी पर जानवर के पंजों के निशान मिलें।
डीएफओ ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि खेत में मिले पंजे के निशान लकड़बग्घे से मिलते हुए हैं। लकड़बग्घे के निशान छोटे और नुकीले होते हैं। पंजा जमीन पर रखते ही प्वाइंट का निशान बन जाता है। बाघ के पंजों में नुकीलापन नहीं होता है। श्रीवास्तव ने कहा कि बछड़ा तीन दिन पहले मरा था, उसमें कीड़े पड़े हुए थे। जिसे लकड़बग्घे ने खाया होगा। बाघ मरा हुआ जानवर नहीं खाता है।
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रविवार को जंगली जानवर के बछड़े के मारने की सूचना पर डीएफओ अपनी टीम के साथ पहुंचे। डीएफओ देवेश श्रीवास्तव के साथ कानपुर से रैपिड फोर्स टीम के साथ डॉ आरके सिंह और प्रतापगढ़ के वन रेंजर यतेंद्र भान मौके पर पहुंचे। टीम ने कांबिंग की तो कुछ दूरी पर जानवर के पंजों के निशान मिलें।
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डीएफओ ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि खेत में मिले पंजे के निशान लकड़बग्घे से मिलते हुए हैं। लकड़बग्घे के निशान छोटे और नुकीले होते हैं। पंजा जमीन पर रखते ही प्वाइंट का निशान बन जाता है। बाघ के पंजों में नुकीलापन नहीं होता है। श्रीवास्तव ने कहा कि बछड़ा तीन दिन पहले मरा था, उसमें कीड़े पड़े हुए थे। जिसे लकड़बग्घे ने खाया होगा। बाघ मरा हुआ जानवर नहीं खाता है।
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