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श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से होता है पापों का नाश: आचार्य अविचल पाण्डेय
Sat, 31 May 2025 11:54 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sat, 31 May 2025 11:54 PM IST
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कंपिल। गांव त्यौरखास में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा व ज्ञान यज्ञ का आयोजन हो रहा है। आचार्य अविचल महाराज ने कथा के माध्यम से सत्य मार्ग पर चलने व ईश्वर की भक्ति के बारे में श्रोताओं को बताया।
आचार्य ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से मनुष्य को भक्ति के लिए ज्ञान की प्राप्ति होती है। उसी के आधार पर उसे मुक्ति मिलती है। कहा कि प्रत्येक प्राणी किसी न किसी तरह से दुखी व परेशान है। कोई स्वास्थ्य से दुखी है, कोई परिवार, कोई धन, तो कोई संतान को लेकर परेशान है। सभी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए ईश्वर की आराधना ही एकमात्र मार्ग है। इसलिए व्यक्ति को अपने जीवन का कुछ समय हरि भजन में लगाना चाहिए। कथा व्यास ने बताया कि धुंधुकारी अति दुष्ट था। उसके पिता आत्मदेव भी उसके उत्पातों से दुखी होकर वन में चले गए थे। धुंधुकारी वेश्याओं के साथ रहकर भोगों में डूब गया। एक दिन उन्हीं के द्वारा मार डाला गया।
अपने कुकर्मों के फलस्वरूप वह प्रेत बन गया। वह भूख प्यास से व्याकुल रहने लगा। एक दिन व्याकुल धुंधुकारी अपने भाई गोकर्ण के पास पहुंचा और संकेत रूप में अपनी व्यथा सुनाकर उससे सहायता की याचना की। कथा के बाद प्रसाद के वितरण किया गया। सेवाराम, उदयवीर, रामऔतार, रामसिंह, बाबा, जगदू, भूरे, संतोष जुगाड़ी आदि रहे।
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आचार्य ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से मनुष्य को भक्ति के लिए ज्ञान की प्राप्ति होती है। उसी के आधार पर उसे मुक्ति मिलती है। कहा कि प्रत्येक प्राणी किसी न किसी तरह से दुखी व परेशान है। कोई स्वास्थ्य से दुखी है, कोई परिवार, कोई धन, तो कोई संतान को लेकर परेशान है। सभी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए ईश्वर की आराधना ही एकमात्र मार्ग है। इसलिए व्यक्ति को अपने जीवन का कुछ समय हरि भजन में लगाना चाहिए। कथा व्यास ने बताया कि धुंधुकारी अति दुष्ट था। उसके पिता आत्मदेव भी उसके उत्पातों से दुखी होकर वन में चले गए थे। धुंधुकारी वेश्याओं के साथ रहकर भोगों में डूब गया। एक दिन उन्हीं के द्वारा मार डाला गया।
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अपने कुकर्मों के फलस्वरूप वह प्रेत बन गया। वह भूख प्यास से व्याकुल रहने लगा। एक दिन व्याकुल धुंधुकारी अपने भाई गोकर्ण के पास पहुंचा और संकेत रूप में अपनी व्यथा सुनाकर उससे सहायता की याचना की। कथा के बाद प्रसाद के वितरण किया गया। सेवाराम, उदयवीर, रामऔतार, रामसिंह, बाबा, जगदू, भूरे, संतोष जुगाड़ी आदि रहे।
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