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Farrukhabad News: एससी-एसटी एक्ट में आरोपियों को झटका, डिस्चार्ज अर्जी खारिज

Mon, 29 Jun 2026 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2026 12:12 AM IST
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Setback for accused in SC/ST Act case; discharge plea rejected.
फर्रुखाबाद। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) कोर्ट के न्यायाधीश तरुण कुमार सिंह प्रथम ने वर्ष 2013 के एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में आरोपी रामखिलावन मिश्रा एवं रामगोपाल की ओर से दाखिल डिस्चार्ज (उन्मोचन) प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि आरोपियों ने अभी तक न्यायालय में समर्पण कर जमानत नहीं कराई है और न्यायिक प्रक्रिया से बचते रहे हैं। ऐसे में उन्हें इस स्तर पर आरोप मुक्त प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने का कोई अधिकार नहीं है।
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कोतवाली फर्रुखाबाद में वर्ष 2013 में दर्ज कराए गए मामले में आरोपियों ने अदालत में दलील दी थी कि जिस व्यक्ति ने जातिसूचक गाली-गलौज का आरोप लगाया था, वह अनुसूचित जाति का नहीं बल्कि बाथम समुदाय का है। उनका आरोप था कि विवेचना अधिकारी ने कथित पीड़ित का जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किए बिना ही एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। उन्होंने वर्ष 2014 के संज्ञान आदेश को निरस्त कर मामले की पुनः जांच कराने की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों को वर्षों से मुकदमे की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने न्यायालय में उपस्थित होकर सुनवाई में सहयोग नहीं किया। पहले भी इसी प्रकार का प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिस पर प्रभावी पैरवी नहीं की गई। अभियोजन ने यह भी कहा कि विवेचना के दौरान दर्ज बयान में पीड़ित ने स्वयं को अनुसूचित जाति (जाटव) का सदस्य बताया था और आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों के विरुद्ध पहले से गैर जमानती वारंट तथा धारा-82 की कार्रवाई जारी है। ऐसे में बिना समर्पण किए डिस्चार्ज की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। न्यायालय ने आरोपियों के विरुद्ध पूर्ववत कार्रवाई जारी रखने के साथ ही उन्हें शीघ्र न्यायालय में समर्पण करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
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