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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने 18 हजार मास्क बनाए
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कमालगंज (फर्रुखाबाद)। कोरोना काल में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने आपदा को अवसर में बदला। विकास स्वयं सहायता समूह बिढ़हैल की महिलाओं ने 18 हजार मास्क बनाकर मिशाल कायम किया। अच्छी गुणवत्ता के यह मास्क 20 रुपये प्रति मास्क के हिसाब से बिके।
इसके अलावा सजावटी सामान, डलिया बनाने, मनरेगा के बोर्ड व पोछा लगाने वाले कपड़े के डस्टर बनाने का काम भी महिलाएं कर रहीं हैं। इससे आर्थिक उत्थान के साथ ही सामाजिक उत्थान का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।
कोरोना के दस्तक देने पर मास्क की भारी किल्लत थी। उस समय समूह की महिलाएं आगे आईं। विकास स्वयं सहायता समूह बिढ़हैल की अध्यक्ष उर्मिला शर्मा ने अपने समूह की महिलाओं को प्रेरित किया तो कुछ दिन में ही 18 हजार मास्क तैयार हुए, जो हाथों हाथ बिक गए।
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कुछ अन्य महिला समूहों ने भी मास्क बनाए। शारदा समूह रजीपुर की अध्यक्ष व ग्राम संगठन की अध्यक्ष सीता के निर्देशन में महिलाओं ने सजावटी सामान बनाना शुरू किया। समूह अध्यक्ष ने स्कूल बंद होने से घरों में बैठीं छात्राओं को गुलदस्ते व खिलौने बनाने में हुनरमंद बनाया।
महरूपुर राबी के वैष्णवी समूह ने अचार, पूर्णागिरि समूह रजीपुर ने पोछा लगाने वाले डस्टर बनाने का काम शुरू किया। प्रगति समूह की महिलाओं ने मनरेगा के सिटीजन इनफार्मेशन बोर्ड बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए। नारायनपुर गढ़िया के धनलक्ष्मी समूह की महिलाओं ने मोमबत्ती बनाने का काम शुरू किया।
सहायक विकास अधिकारी निरंजन त्रिवेदी का कहना है कि कोरोना काल में जब परिवार के मुखिया के रोजगार पर संकट आया तो कई स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ही अपने काम से परिवार की खेवनहार बन गईं। ब्लाक मिशन मैनेजर प्रदीप कुमार ने बताया कि समूह की महिलाओं को मास्क बनाते देख गैर समूह की महिलाएं भी ऐसे ही रोजगार के लिए आगे बढ़ी हैं।
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इसके अलावा सजावटी सामान, डलिया बनाने, मनरेगा के बोर्ड व पोछा लगाने वाले कपड़े के डस्टर बनाने का काम भी महिलाएं कर रहीं हैं। इससे आर्थिक उत्थान के साथ ही सामाजिक उत्थान का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।
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कोरोना के दस्तक देने पर मास्क की भारी किल्लत थी। उस समय समूह की महिलाएं आगे आईं। विकास स्वयं सहायता समूह बिढ़हैल की अध्यक्ष उर्मिला शर्मा ने अपने समूह की महिलाओं को प्रेरित किया तो कुछ दिन में ही 18 हजार मास्क तैयार हुए, जो हाथों हाथ बिक गए।
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कुछ अन्य महिला समूहों ने भी मास्क बनाए। शारदा समूह रजीपुर की अध्यक्ष व ग्राम संगठन की अध्यक्ष सीता के निर्देशन में महिलाओं ने सजावटी सामान बनाना शुरू किया। समूह अध्यक्ष ने स्कूल बंद होने से घरों में बैठीं छात्राओं को गुलदस्ते व खिलौने बनाने में हुनरमंद बनाया।
महरूपुर राबी के वैष्णवी समूह ने अचार, पूर्णागिरि समूह रजीपुर ने पोछा लगाने वाले डस्टर बनाने का काम शुरू किया। प्रगति समूह की महिलाओं ने मनरेगा के सिटीजन इनफार्मेशन बोर्ड बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए। नारायनपुर गढ़िया के धनलक्ष्मी समूह की महिलाओं ने मोमबत्ती बनाने का काम शुरू किया।
सहायक विकास अधिकारी निरंजन त्रिवेदी का कहना है कि कोरोना काल में जब परिवार के मुखिया के रोजगार पर संकट आया तो कई स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ही अपने काम से परिवार की खेवनहार बन गईं। ब्लाक मिशन मैनेजर प्रदीप कुमार ने बताया कि समूह की महिलाओं को मास्क बनाते देख गैर समूह की महिलाएं भी ऐसे ही रोजगार के लिए आगे बढ़ी हैं।