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Farrukhabad News: मनमानी ट्रांसफर-पोस्टिंग व भ्रष्टाचार के आरोप में एसई, लिपिक निलंबित
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फोटो-20 अधीक्षण अभियंता अजय कुमार। संवाद
फर्रुखाबाद। टेंडर में भ्रष्टाचार, चहेतों को लाखों का काम, मनमानी पोस्टिंग व ट्रांसफर के आरोप में शासन के आदेश पर बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता को निलंबित कर दिया गया। उनके साथ टेंडर में 15 लाख की वित्तीय अनियमितता के मामले में चहेते लिपिक पर भी निलंबन की गाज गिरी है। अधीक्षण अभियंता व लिपिक को मुख्य अभियंता कार्यालय बांदा से संबद्ध किया गया है।
बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता अजय कुमार की जिले में 16 नवंबर 2023 को तैनाती हुई थी। वह अपने कार्यकाल में मनमाने तरीके से काम करने के लिए चर्चित रहे। करीबियों को टेंडर देने, बिरादरीवाद, सवर्ण कर्मचारियों को ग्रामीण क्षेत्र व सजातीय को शहर में तैनात करने के भी आरोपों से घिरे रहे। आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी के दौरान 181 कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने में भी पक्षपात की शिकायतें हुईं।
31 अगस्त 2025 को अमर उजाला में प्रकाशित खबर दो की जगह एक लाइन का टेंडर डाल किया 30 लाख का खेल, शीर्षक से भ्रष्टाचार से पर्दा उठ गया। इस खबर शासन में संज्ञान लिया गया। इसके बाद इस मामले की एमडी कार्यालय कराई गई जांच में 15,02,516 रुपये की वित्तीय अनियमितता में अधीक्षण अभियंता को दोषी माना गया। मनमाने तरीके से आउटसोर्स कर्मियों को हटाने का मामला भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह के सामने रखा था। इसी के बाद जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच कराई। उधर शासन स्तर से भी जांच शुरू हो गई।
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जांच कमेटियों ने शिकायतों के सभी बिंदुओं पर अधीक्षण अभियंता को दोषी मानते हुए कार्रवाई के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिलाधिकारी की संस्तुति के बाद शासन के आदेश पर प्रबंध निदेशक ने अधीक्षण अभियंता अजय कुमार व उनके कार्यालय में तैनात टेंडर पटल प्रभारी लिपिक रविंद्र कुमार को निलंबित कर दिया। इसमें 15.02 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता में दोनों को दोषी पाया गया है।
गलत तरीके से बहाल कर दिया था निलंबित कर्मियों को
23 सितंबर को प्रभाकर राजपूत ने शिकायत की कि अधीनस्थ कर्मचारी सुनील शाक्य व शिवम तिवारी को निलंबित करने के बाद अनुशासनिक कार्रवाई प्रक्रिया को चरणबद्ध रूप में पूर्ण करते हुए कार्मिकों की बहाली कर दी गई। इसमें भी प्रारंभिक जांच में दोषी पाया गया। अजय कुमार ने शिकायत की कि पेट्रोल पंप से पेट्रोल के स्थान पर डीजल पर्ची लगाकर भुगतान प्राप्त कर विभाग को वित्तीय क्षति पहुंचाई गई। इसके अलावा बिना पॉलिसी 80 कर्मचारियों को स्थानांतरित करने, गलत तरीके से अधिकांश टेंडर पीडीए के कार्यकर्ताओं को दिए जाने, सवर्ण अवर अभियंता, टीजी-2 को देहात में और बामसेफ के लोगों को प्रमुख बिजली उपकेंद्रों पर नियुक्त करने की शिकायत की गई। इसकी जांच कराई जा रही है।
सांसद ने भी प्रभारी मंत्री से की थी एसई की शिकायत
25 जून 2025 को भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह से शिकायत की कि अधीक्षण अभियंता द्वारा मनमाने तरीके से आउटसोर्स कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी गई। उन्होंने 181 आउटसोर्स कर्मियों को नियम व मानक दरकिनार कर जातीय मापदंडों पर निकालने की शिकायत की थी। इसके अलावा स्थानांतरण व पोस्टिंग करने की शिकायत की थी। उन्होंने जातीय मापदंडों के आधार पर कर्मचारियों को निकालने व रखे जाने का आरोप लगाया था। वरिष्ठ सहायक पवन तिवारी के अवकाश पर जाने के दौरान कनिष्ठ सहायक को चार्ज दे दिया, अवकाश से लौटने पर भी चार्ज नहीं दिया गया। इसकी सीडीओ ने जांच की तो बिजली विभाग से पत्रावली ही उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर जिलाधिकारी ने 10 जनवरी को कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को पत्र भेज दिया। तीन फरवरी को डीएम ने एमडी को अनुस्मारक भेजकर अधीक्षण अभियंता के खिलाफ कठोर कार्रवाई का अनुरोध किया। इस पर उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक लखनऊ ने अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया। शासन के आदेश पर प्रबंध निदेशक ने अधीक्षण अभियंता को निलंबित कर उन्हें बांदा के मुख्य अभियंता कार्यालय से संबंद्ध कर दिया है। आरोपों पर जांच जारी है।
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बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता अजय कुमार की जिले में 16 नवंबर 2023 को तैनाती हुई थी। वह अपने कार्यकाल में मनमाने तरीके से काम करने के लिए चर्चित रहे। करीबियों को टेंडर देने, बिरादरीवाद, सवर्ण कर्मचारियों को ग्रामीण क्षेत्र व सजातीय को शहर में तैनात करने के भी आरोपों से घिरे रहे। आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी के दौरान 181 कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने में भी पक्षपात की शिकायतें हुईं।
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31 अगस्त 2025 को अमर उजाला में प्रकाशित खबर दो की जगह एक लाइन का टेंडर डाल किया 30 लाख का खेल, शीर्षक से भ्रष्टाचार से पर्दा उठ गया। इस खबर शासन में संज्ञान लिया गया। इसके बाद इस मामले की एमडी कार्यालय कराई गई जांच में 15,02,516 रुपये की वित्तीय अनियमितता में अधीक्षण अभियंता को दोषी माना गया। मनमाने तरीके से आउटसोर्स कर्मियों को हटाने का मामला भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह के सामने रखा था। इसी के बाद जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच कराई। उधर शासन स्तर से भी जांच शुरू हो गई।
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जांच कमेटियों ने शिकायतों के सभी बिंदुओं पर अधीक्षण अभियंता को दोषी मानते हुए कार्रवाई के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिलाधिकारी की संस्तुति के बाद शासन के आदेश पर प्रबंध निदेशक ने अधीक्षण अभियंता अजय कुमार व उनके कार्यालय में तैनात टेंडर पटल प्रभारी लिपिक रविंद्र कुमार को निलंबित कर दिया। इसमें 15.02 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता में दोनों को दोषी पाया गया है।
गलत तरीके से बहाल कर दिया था निलंबित कर्मियों को
23 सितंबर को प्रभाकर राजपूत ने शिकायत की कि अधीनस्थ कर्मचारी सुनील शाक्य व शिवम तिवारी को निलंबित करने के बाद अनुशासनिक कार्रवाई प्रक्रिया को चरणबद्ध रूप में पूर्ण करते हुए कार्मिकों की बहाली कर दी गई। इसमें भी प्रारंभिक जांच में दोषी पाया गया। अजय कुमार ने शिकायत की कि पेट्रोल पंप से पेट्रोल के स्थान पर डीजल पर्ची लगाकर भुगतान प्राप्त कर विभाग को वित्तीय क्षति पहुंचाई गई। इसके अलावा बिना पॉलिसी 80 कर्मचारियों को स्थानांतरित करने, गलत तरीके से अधिकांश टेंडर पीडीए के कार्यकर्ताओं को दिए जाने, सवर्ण अवर अभियंता, टीजी-2 को देहात में और बामसेफ के लोगों को प्रमुख बिजली उपकेंद्रों पर नियुक्त करने की शिकायत की गई। इसकी जांच कराई जा रही है।
सांसद ने भी प्रभारी मंत्री से की थी एसई की शिकायत
25 जून 2025 को भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह से शिकायत की कि अधीक्षण अभियंता द्वारा मनमाने तरीके से आउटसोर्स कर्मियों की सेवा समाप्त कर दी गई। उन्होंने 181 आउटसोर्स कर्मियों को नियम व मानक दरकिनार कर जातीय मापदंडों पर निकालने की शिकायत की थी। इसके अलावा स्थानांतरण व पोस्टिंग करने की शिकायत की थी। उन्होंने जातीय मापदंडों के आधार पर कर्मचारियों को निकालने व रखे जाने का आरोप लगाया था। वरिष्ठ सहायक पवन तिवारी के अवकाश पर जाने के दौरान कनिष्ठ सहायक को चार्ज दे दिया, अवकाश से लौटने पर भी चार्ज नहीं दिया गया। इसकी सीडीओ ने जांच की तो बिजली विभाग से पत्रावली ही उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर जिलाधिकारी ने 10 जनवरी को कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को पत्र भेज दिया। तीन फरवरी को डीएम ने एमडी को अनुस्मारक भेजकर अधीक्षण अभियंता के खिलाफ कठोर कार्रवाई का अनुरोध किया। इस पर उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक लखनऊ ने अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया। शासन के आदेश पर प्रबंध निदेशक ने अधीक्षण अभियंता को निलंबित कर उन्हें बांदा के मुख्य अभियंता कार्यालय से संबंद्ध कर दिया है। आरोपों पर जांच जारी है।

फोटो-20 अधीक्षण अभियंता अजय कुमार। संवाद

फोटो-20 अधीक्षण अभियंता अजय कुमार। संवाद