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Farrukhabad News: एसडीएम पर लगाया जमीन पर कब्जा कराने का आरोप
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कायमगंज। चर्चित कैशर खां के अड्डे की सड़क किनारे जमीन की शनिवार शाम एसडीएम ने पैमाइश कराकर तारों की बाउंड्री करा दी। दुबई में नौकरी कर रहे युवक ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। जबकि एसडीएम का कहना है कि 30 साल पुराने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में भूमि मालिक को कब्जा दिलाया गया है।
अलीगंज रोड स्थित स्टेशन के पास गांव सुभानपुर निवासी स्व. कैशर खां प्राइवेट बस अड्डा चलाते थे। यह जगह कैशर खां के अड्डे के नाम से मशहूर हो गई। उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र सिराज अली यहां बैठते थे। यहां सड़क से करीब 12 फीट अंदर एक कोठरी बनी है। उसके आगे टिन शेड पड़ा है। शनिवार शाम इस कोठरी के आगे और सड़क से 12 फीट अंदर एसडीएम यदुवंश कुमार ने पुलिस फोर्स की मौजूदगी में तारों की बाउंड्रीवाल कराकर पृथ्वी दरवाजा निवासी जितेंद्र रस्तोगी को कब्जा दिला दिया।
इस मामले में सिराज अली खां ने बताया कि उनका गाटा संख्या 108 है। आगे सड़क की तरफ गाटा संख्या 105 है। जिसकी जमीन कुछ सड़क में चली गई। कुछ बची है तो वह पीडब्लूडी की है। सड़क चौड़ीकरण या पीडब्लूडी के मानक के अनुसार 105 गाटा संख्या में जमीन बचती ही नहीं है। इसके पीछे उनकी कोठरी है। उसका निकास भी बंद कर दिया है। इस मामले में उनके भतीजे ईनाम अली ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर न्याय की गुहार की है। उनका आरोप है कि वे दुबई में रहते हैं। उनकी मां गांव में रहती है। यह भूमि उनके नाम है। उनकी भूमि पर एसडीएम ने जबरन कब्जा कराया है। उनकी भूमि की सुरक्षा की जाए।
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एसडीएम यदुवंश कुमार ने बताया कि मोहल्ला पृथ्वी दरवाजा निवासी स्व. सतीश चंद्र रस्तोगी का नाम राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 108 में दर्ज है। कैशर अली खां व सतीश चंद्र के बीच एसडीएम कोर्ट में मुकदमा चला। इसमें 1993 में कोर्ट से फैसला हुआ। यह भूमि सतीश चंद्र के नाम खतौनी में दर्ज हो गई। इसके बाद 1996 में दोनों के बीच समझौता हुआ, लेकिन वह समझौता कोर्ट में स्वीकार नहीं हुआ। करीब 4 डिसमिल भूमि के सतीश भूमिदार है। 30 साल पुराने आदेश के तहत सतीश चंद्र रस्तोगी के पुत्र जितेंद्र रस्तोगी को कब्जा दिलाया गया है। पीडब्ल्यूडी किसी की भूमिदार जमीन को नहीं ले सकती हैं। सड़क चौड़ीकरण में यदि उनकी जमीन जाती है तो उसका उन्हें मुआवजा मिलेगा।
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अलीगंज रोड स्थित स्टेशन के पास गांव सुभानपुर निवासी स्व. कैशर खां प्राइवेट बस अड्डा चलाते थे। यह जगह कैशर खां के अड्डे के नाम से मशहूर हो गई। उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र सिराज अली यहां बैठते थे। यहां सड़क से करीब 12 फीट अंदर एक कोठरी बनी है। उसके आगे टिन शेड पड़ा है। शनिवार शाम इस कोठरी के आगे और सड़क से 12 फीट अंदर एसडीएम यदुवंश कुमार ने पुलिस फोर्स की मौजूदगी में तारों की बाउंड्रीवाल कराकर पृथ्वी दरवाजा निवासी जितेंद्र रस्तोगी को कब्जा दिला दिया।
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इस मामले में सिराज अली खां ने बताया कि उनका गाटा संख्या 108 है। आगे सड़क की तरफ गाटा संख्या 105 है। जिसकी जमीन कुछ सड़क में चली गई। कुछ बची है तो वह पीडब्लूडी की है। सड़क चौड़ीकरण या पीडब्लूडी के मानक के अनुसार 105 गाटा संख्या में जमीन बचती ही नहीं है। इसके पीछे उनकी कोठरी है। उसका निकास भी बंद कर दिया है। इस मामले में उनके भतीजे ईनाम अली ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर न्याय की गुहार की है। उनका आरोप है कि वे दुबई में रहते हैं। उनकी मां गांव में रहती है। यह भूमि उनके नाम है। उनकी भूमि पर एसडीएम ने जबरन कब्जा कराया है। उनकी भूमि की सुरक्षा की जाए।
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एसडीएम यदुवंश कुमार ने बताया कि मोहल्ला पृथ्वी दरवाजा निवासी स्व. सतीश चंद्र रस्तोगी का नाम राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 108 में दर्ज है। कैशर अली खां व सतीश चंद्र के बीच एसडीएम कोर्ट में मुकदमा चला। इसमें 1993 में कोर्ट से फैसला हुआ। यह भूमि सतीश चंद्र के नाम खतौनी में दर्ज हो गई। इसके बाद 1996 में दोनों के बीच समझौता हुआ, लेकिन वह समझौता कोर्ट में स्वीकार नहीं हुआ। करीब 4 डिसमिल भूमि के सतीश भूमिदार है। 30 साल पुराने आदेश के तहत सतीश चंद्र रस्तोगी के पुत्र जितेंद्र रस्तोगी को कब्जा दिलाया गया है। पीडब्ल्यूडी किसी की भूमिदार जमीन को नहीं ले सकती हैं। सड़क चौड़ीकरण में यदि उनकी जमीन जाती है तो उसका उन्हें मुआवजा मिलेगा।