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महंगी दर पर मास्क व सैनिटाइजर खरीद में सीएमओ पर शिकंजा कसा
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फर्रुखाबाद। कोरोना महामारी से निपटने को जनप्रतिनिधियों की निधि से स्वास्थ्य विभाग ने मास्क व सैनिटाइजर फुटकर से भी मंहगो खरीद लिए। इसे अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसका प्रशासन ने संज्ञान लिया है। मंगलवार को सीएमओ, स्टोर प्रभारी से सीडीओ ने इस संबंध में जानकारी ली और पत्रावली तलब की।
स्वास्थ्य विभाग ने मास्क व सैनिटाइजर की खरीद में खेल किया। लखनऊ की फर्म से 31 मार्च को 50 हजार टू-लेयर व एन-95 मास्क फुटकर से भी अधिक कीमत पर (12 लाख रुपये) खरीदे गए। घटिया टू लेयर मास्क लगाते ही इलास्टिक टूटने की शिकायतें मिलती रहीं। वहीं एन-95 मास्क स्वास्थ्य कर्मियों को नहीं मिल सके।
इसी तारीख में करीब पांच लाख रुपये का सैनिटाइजर भी खरीदा गया। 200 मिली की पांच हजार बोतलें 89 रुपये प्रति पीस खरीदकर 12 फीसदी जीएसटी अलग से दिया गया। इससे दो दिन पहले ही 100 मिली के 1680 पीस सैनिटाइजर लोकल स्तर पर 64 रुपये पीस खरीदा गया था। 27 मार्च को स्वास्थ्य उपकरणों सहित करीब 15 लाख रुपये की सामग्री खरीदी गई। इसमें 100/200 मिली सैनिटाइजर की कीमत 109 रुपये दर्शाई गई जबकि 500 मिली सैनिटाइजर 355 रुपये का दर्शाया गया।
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10 अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने ‘कोरोना संकट के बीच मास्क की खरीदारी में खेल’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इसका जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने संज्ञान लिया। मंगलवार को सीडीओ ने सीएमओ को कार्यालय में बुलाकर जानकारी ली। वहीं स्टोर प्रभारी डा.अनुराग सिंह व स्टोर के वित्तीय प्रभारी फार्मासिस्ट चक्र सिंह यादव भी तलब किए गए।
सीडीओ ने खरीद से संबंधित फर्म के बिल, सामग्री वितरण की सूची आदि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। खास बात तो यह है कि जिलाधिकारी ने 15 अप्रैल को 12 सदस्यीय क्रय व सत्यापन समिति का गठन किया जबकि मार्च में खरीद हो चुकी थी। मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व में की गई खरीद निरस्त की जाएगी।
उन्होंने सीएमओ से खरीद की पत्रावलियां तलब कर ली हैं। यह भी साफ किया कि एफएफडीसी कन्नौज से 200 मिली सैनिटाइजर 29 रुपये में प्रति पीस लिया गया है। तो इतनी महंगी खरीद कैसे की जा सकती है। मास्क व सैनिटाइजर का भुगतान रोक दिया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग ने मास्क व सैनिटाइजर की खरीद में खेल किया। लखनऊ की फर्म से 31 मार्च को 50 हजार टू-लेयर व एन-95 मास्क फुटकर से भी अधिक कीमत पर (12 लाख रुपये) खरीदे गए। घटिया टू लेयर मास्क लगाते ही इलास्टिक टूटने की शिकायतें मिलती रहीं। वहीं एन-95 मास्क स्वास्थ्य कर्मियों को नहीं मिल सके।
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इसी तारीख में करीब पांच लाख रुपये का सैनिटाइजर भी खरीदा गया। 200 मिली की पांच हजार बोतलें 89 रुपये प्रति पीस खरीदकर 12 फीसदी जीएसटी अलग से दिया गया। इससे दो दिन पहले ही 100 मिली के 1680 पीस सैनिटाइजर लोकल स्तर पर 64 रुपये पीस खरीदा गया था। 27 मार्च को स्वास्थ्य उपकरणों सहित करीब 15 लाख रुपये की सामग्री खरीदी गई। इसमें 100/200 मिली सैनिटाइजर की कीमत 109 रुपये दर्शाई गई जबकि 500 मिली सैनिटाइजर 355 रुपये का दर्शाया गया।
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10 अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने ‘कोरोना संकट के बीच मास्क की खरीदारी में खेल’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इसका जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने संज्ञान लिया। मंगलवार को सीडीओ ने सीएमओ को कार्यालय में बुलाकर जानकारी ली। वहीं स्टोर प्रभारी डा.अनुराग सिंह व स्टोर के वित्तीय प्रभारी फार्मासिस्ट चक्र सिंह यादव भी तलब किए गए।
सीडीओ ने खरीद से संबंधित फर्म के बिल, सामग्री वितरण की सूची आदि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। खास बात तो यह है कि जिलाधिकारी ने 15 अप्रैल को 12 सदस्यीय क्रय व सत्यापन समिति का गठन किया जबकि मार्च में खरीद हो चुकी थी। मुख्य विकास अधिकारी डा.राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व में की गई खरीद निरस्त की जाएगी।
उन्होंने सीएमओ से खरीद की पत्रावलियां तलब कर ली हैं। यह भी साफ किया कि एफएफडीसी कन्नौज से 200 मिली सैनिटाइजर 29 रुपये में प्रति पीस लिया गया है। तो इतनी महंगी खरीद कैसे की जा सकती है। मास्क व सैनिटाइजर का भुगतान रोक दिया गया है।