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इमरजेंसी से झुलसी महिला को निकाला, विवाद

Mon, 04 Jul 2022 11:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jul 2022 11:12 PM IST
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Scorched woman rescued from emergency, controversy
कलक्ट्रेट में ज्ञापन देने आए हिंदू युवावाहिनी के पदाधिकारी। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। खाना बनाते वक्त झुलसी महिला को मामूली इलाज के बाद लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी से बाहर कर दिया गया। सूचना पर पहुंचे हिंदू युवा वाहिनी के क्षेत्रीय संगठन मंत्री ने डॉक्टर से बात की तो फार्मासिस्ट से विवाद हो गया। बाद में महिला को कानपुर रेफर कर दिया गया।
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शहर के मोहल्ला कादरीगेट निवासी सुनील वर्मा की पत्नी सोनम वर्मा रविवार को खाना बनाते वक्त झुलस गई थीं। चेहरे पर घाव थे। लोहिया अस्पताल में कुछ देर इलाज के बाद कर्मियों ने बाहर इलाज कराने के लिए कह दिया। सुनील का आरोप है कि कुर्सी पर बैठे कर्मचारी ने तुरंत बाहर ले जाने की बात कही।
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इस पर पत्नी सोनम को इमरजेंसी के बाहर पटिया पर बैठा दिया। उन्होंने पड़ोसी हिंदू युवा वाहिनी के संगठन मंत्री शिवम त्रिपाठी को फोन कर मामले की जानकारी दी। शिवम ने आकर सोनम को दोबारा इमरजेंसी में बेड पर लिटा दिया।
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वह ड्यूटी पर तैनात डॉ. आसिफ अली से बात कर रहे थे, उसी समय फार्मासिस्ट आया और शिवम की शिकायत पर आपत्ति करने लगा। इससे शिवम का फार्मासिस्ट से विवाद होने लगा। हालांकि डॉक्टर ने शिवम को समझा-बुझाकर बाहर कर दिया। बाद में परिजन महिला को रेफर करवा कर कानपुर ले गए।
मरीज को बाहर निकालना गलत है। गंभीर मरीज को रेफर कर एंबुलेंस भी उपलब्ध कराई जाती है। मरीज और तीमारदार से अच्छी भाषा का प्रयोग करने के निर्देश हैं। इस मामले की जांच कराएंगे। -डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
डीएम दफ्तर में की फार्मासिस्ट की शिकायत
शिवम त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष अभिषेक मिश्रा, अनिल वर्मा, अमित पांडेय, राजीव दुबे आदि सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। डीएम की गैर मौजूदगी में एसडीएम कृष्ण कुमार वर्मा को ज्ञापन दिया।
बताया कि इमरजेंसी में डॉक्टर से बात करते वक्त फार्मासिस्ट जितेंद्र सिंह ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया। यही नहीं धमकी दी कि अस्पताल पर ताला डालकर मुकदमा दर्ज करा देंगेे। वाहिनी नेताओं ने जांच के बाद अभद्रता करने वाले कर्मचारी पर कार्रवाई की मांग की। फार्मासिस्ट जितेंद्र ने आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने युवक को डॉक्टर से दूरी बनाकर बात करने के लिए कहा था। इस पर वह बहस करने लगे।

लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में कुछ दिनों से इलाज कम विवाद ज्यादा हो रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण रात के वक्त बाहरी लोगों की मौजूदगी हैै। इंटर्नशिप के बाद निजी अस्पतालों में काम करने वाले युवक लोगों की मरहम पट्टी करते हैं और फिर सरकारी इलाज की कमी बताकर निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। ईएमओ की ड्यूटी करने वाले संविदा डॉक्टर भी अपने अस्पतालों में अधिक समय देते हैं। लेटलतीफी होने पर तीमारदार मुंह खोलते हैं तो उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है।
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