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विधायक निधि से बने आरओ प्लांट खुद ही प्यासे
Mon, 15 Apr 2019 11:36 PM IST
संतोष भदौरिया
farrukhabad
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Published by: संतोष भदौरिया
Updated Mon, 15 Apr 2019 11:36 PM IST
सार
कार्यदायी संस्था यूपीएसआईसी हो चुकी ब्लैकलिस्ट
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जसमई तिराहे पर लगा बंद पड़ा आरओ प्लांट ।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
फर्रुखाबाद। गर्मी में लोगों को ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने को गत वर्ष विधायक निधि से एक करोड़ रुपये खर्च कर आरओ प्लांट लगाए गए। इसमें मानकों की धज्जियां उड़ाकर जमकर खेल किया गया। इससे इस वर्ष भी ये आरओ प्लांट अब तक चालू नहीं हो सके हैं। कह सकते हैं कि गला तर करने को लगे प्लांट खुद ही प्यासे हैं।
सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी की विधायक निधि से गत वर्ष करीब एक करोड़ की लागत से शहर से लेकर निकटवर्ती कुछ गांवों में 22 आरओ प्लांट स्वीकृत हुए। एक आरओ प्लांट की कीमत 4 लाख 35 हजार रुपये निर्धारित की गई थी। प्लांट लगाने के लिए यूपीएसआईसी को ठेका दिया गया था। शहर के जसमई तिराहा, पांचाल घाट, फतेहगढ़ कोतवाली, गरैयाखारे मंदिर सहित एक दर्जन स्थानों पर आरओ प्लांट लगाए गए। इसमें घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। बिना बिजली कनेक्शन के ही कटिया डालकर यह प्लांट चालू कर दिए गए। इसके बाद अधिकांश आरओ एक सप्ताह बाद ही ठप हो गए। फिर शिकायतों का दौर शुरू हुआ। इसके बाद जांच कराई गई तो हकीकत सामने आई। इस वर्ष भी गर्मी में तापमान 40 डिग्री पार हो चुका है। राहगीरों के हलक सूख रहे हैं। आरओ प्लांट लगा देख लोग गला सींचने को रुक जाते हैं। पास जाने पर उन्हें धोखा मिल रहा है। इससे वह व्यवस्था को कोसते नजर आते हैं। इसके बावजूद कोई जिम्मेदार सुधि लेने वाला नहीं है। डीआरडीए के परियोजना निदेशक लालजी यादव ने बताया कि विधायक निधि से स्वीकृत आधी धनराशि ही खर्च की गई। 22 में 12 आरओ प्लांट लगाए गए थे। जांच में अमानक पाए जाने पर कार्यदायी संस्था यूपीएसाईसी को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। यह प्लांट चालू करने अथवा अन्य निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिया जाएगा।
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सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी की विधायक निधि से गत वर्ष करीब एक करोड़ की लागत से शहर से लेकर निकटवर्ती कुछ गांवों में 22 आरओ प्लांट स्वीकृत हुए। एक आरओ प्लांट की कीमत 4 लाख 35 हजार रुपये निर्धारित की गई थी। प्लांट लगाने के लिए यूपीएसआईसी को ठेका दिया गया था। शहर के जसमई तिराहा, पांचाल घाट, फतेहगढ़ कोतवाली, गरैयाखारे मंदिर सहित एक दर्जन स्थानों पर आरओ प्लांट लगाए गए। इसमें घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। बिना बिजली कनेक्शन के ही कटिया डालकर यह प्लांट चालू कर दिए गए। इसके बाद अधिकांश आरओ एक सप्ताह बाद ही ठप हो गए। फिर शिकायतों का दौर शुरू हुआ। इसके बाद जांच कराई गई तो हकीकत सामने आई। इस वर्ष भी गर्मी में तापमान 40 डिग्री पार हो चुका है। राहगीरों के हलक सूख रहे हैं। आरओ प्लांट लगा देख लोग गला सींचने को रुक जाते हैं। पास जाने पर उन्हें धोखा मिल रहा है। इससे वह व्यवस्था को कोसते नजर आते हैं। इसके बावजूद कोई जिम्मेदार सुधि लेने वाला नहीं है। डीआरडीए के परियोजना निदेशक लालजी यादव ने बताया कि विधायक निधि से स्वीकृत आधी धनराशि ही खर्च की गई। 22 में 12 आरओ प्लांट लगाए गए थे। जांच में अमानक पाए जाने पर कार्यदायी संस्था यूपीएसाईसी को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। यह प्लांट चालू करने अथवा अन्य निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिया जाएगा।
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कार्यदायी संस्था यूपीएसआईसी हो चुकी ब्लैकलिस्ट