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बाघ जाने से किसानों को मिली राहत, गन्ने की करने लगे कटाई

Sun, 13 Dec 2020 06:50 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 13 Dec 2020 06:50 PM IST
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Relief from tiger departure, sugarcane harvesting intensifies
खेतों में गन्ना काटते किसान। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
अमृतपुर। बाघ के जाने की पुष्टि होने से गांव उदयपुर कंचनपुर के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। इसके साथ ही गन्ने की कटाई तेज हो गई है। बाघ को पकड़ने के लिए डेरा जमाए टीम भी हरदोई रवाना हो गई है।
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तहसील क्षेत्र के गांव उदयपुर कंचनपुर में 16 नवंबर को खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों ने बाघ को देखा था। 23 नवंबर को वन विभाग के क्षेत्रीय वन अधिकारी उदय प्रताप सिंह ने टीम के साथ कांबिंग की थी।
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बाघ के पंजों के निशान खेतों मिले थे। उसे पकड़ने के लिए कानपुर चिड़ियाघर के डॉ. आर के सिंह ने 30 नवंबर को गांव में डेरा जमा दिया था। उनके नेतृत्व में लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क के डॉ. दयाशंकर व डॉ. सर्वेश राय तथा वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया की टीम, रैपिड रिस्पांस यूनिट दुधवा टाइगर रिजर्व भी डेरा जमाए रही।
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12 दिन चले अभियान में टीमें बाघ को नहीं पकड़ पाईं। अब बाघ हरदोई चला गया है। रविवार को ग्रामीण गन्ने की कटाई करते दिखे। डॉ. आर के सिंह ने बताया है कि बाघ के पंजों के निशान जिला हरदोई के गांव रूपापुर के पास तिमिरपुर कहरई गांव में मिले हैं। टीम हरदोई के लिए रवाना हो गई है। रामगंगा के किनारे कांबिंग की जा रही है।
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