{"_id":"673e298ccd934686bb0c192e","slug":"referred-innocent-child-did-not-get-ambulance-died-outside-emergency-farrukhabad-news-c-22-1-sknp1018-104547-2024-11-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: रेफर मासूम को नहीं मिली एंबुलेंस, इमरजेंसी के बाहर तोड़ा दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: रेफर मासूम को नहीं मिली एंबुलेंस, इमरजेंसी के बाहर तोड़ा दम
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल की इमरजेंसी से रेफर एक मासूम को समय से एंबुलेंस नहीं मिली। उसने इमरजेंसी के बाहर दम तोड़ दिया। माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। परिजनों ने सैफई ले जाने के लिए एंबुलेंस को कॉल किया था।
जिला कन्नौज थाना गुरसहायगंज के गांव गुरगुजपुर निवासी प्रदीप कुमार की ढाई साल की पुत्री नैंसी को बुधवार सुबह उल्टी होने लगी। उसे निजी अस्पताल में दिखाया, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद माता-पिता ने नैंसी को सुबह 11:29 बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया। बच्ची की हालत गंभीर देख ईएमओ डॉ. अभय श्रीवास्तव ने उसे रेफर कर दिया। पिता ने 108 पर कॉल कर एंबुलेंस बुक करवाई। वह बच्ची लेकर इमरजेंसी के बाहर काफी देर तक बैठा रहा। कई बार फोन करने पर एंबुलेंस के ईएमटी ने एक घंटे में आने की बात कही। अच्छे इलाज के अभाव में बच्ची ने मां के गोद में ही धीरे-धीरे सांसें तोड़ दीं। बच्ची की मौत के बाद माता-पिता रोने लगे। प्रदीप ने आरोप लगाया कि यदि समय से एंबुलेंस मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी।
जाम की वजह से 40 मिनट बाद पहुंच सकी एंबुलेंस: प्रोग्राम मैनेजर
108, 102 एंबुलेंस के प्रोग्राम मैनेजर विजय चौहान ने बताया कि कॉलर ने सुबह 11:36 बजे कॉल किया था। उसे 6745 नंबर की गाड़ी एलॉट की गई थी। गाड़ी उस समय नौ किमी दूर बताई गई। रास्ते में जाम की वजह से एंबुलेंस दोपहर 12:16 बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेेंसी में पहुंची। तब परिजनों ने बताया कि उसकी मौत हो गई है। उनकी कोशिश है कि मरीज को जल्द एंबुलेंस उपलब्ध हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला कन्नौज थाना गुरसहायगंज के गांव गुरगुजपुर निवासी प्रदीप कुमार की ढाई साल की पुत्री नैंसी को बुधवार सुबह उल्टी होने लगी। उसे निजी अस्पताल में दिखाया, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद माता-पिता ने नैंसी को सुबह 11:29 बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया। बच्ची की हालत गंभीर देख ईएमओ डॉ. अभय श्रीवास्तव ने उसे रेफर कर दिया। पिता ने 108 पर कॉल कर एंबुलेंस बुक करवाई। वह बच्ची लेकर इमरजेंसी के बाहर काफी देर तक बैठा रहा। कई बार फोन करने पर एंबुलेंस के ईएमटी ने एक घंटे में आने की बात कही। अच्छे इलाज के अभाव में बच्ची ने मां के गोद में ही धीरे-धीरे सांसें तोड़ दीं। बच्ची की मौत के बाद माता-पिता रोने लगे। प्रदीप ने आरोप लगाया कि यदि समय से एंबुलेंस मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी।
विज्ञापन
जाम की वजह से 40 मिनट बाद पहुंच सकी एंबुलेंस: प्रोग्राम मैनेजर
108, 102 एंबुलेंस के प्रोग्राम मैनेजर विजय चौहान ने बताया कि कॉलर ने सुबह 11:36 बजे कॉल किया था। उसे 6745 नंबर की गाड़ी एलॉट की गई थी। गाड़ी उस समय नौ किमी दूर बताई गई। रास्ते में जाम की वजह से एंबुलेंस दोपहर 12:16 बजे लोहिया अस्पताल की इमरजेेंसी में पहुंची। तब परिजनों ने बताया कि उसकी मौत हो गई है। उनकी कोशिश है कि मरीज को जल्द एंबुलेंस उपलब्ध हो।
विज्ञापन