{"_id":"6aa300915b279f77120a31ba","slug":"red-gulal-is-going-from-jharkhand-while-chipsona-potatoes-are-heading-to-nepal-farrukhabad-news-c-222-1-frk1012-148250-2026-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: लाल गुलाल झारखंड तो नेपाल जा रहा चिप्सोना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: लाल गुलाल झारखंड तो नेपाल जा रहा चिप्सोना
विज्ञापन
फर्रुखाबाद/कमालगंज। लाल गुलाल आलू की मांग बढ़ गई है। झारखंड के व्यापारी इस आलू के बीज को 1551 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीद रहे हैं। वहीं, नेपाल में आई बाढ़ की आपदा के बाद चिप्सोना आलू का निर्यात भी शुरू हो गया है। नेपाल के लिए 25 किलो वजन के पैकेट तैयार कर भेजे जा रहे हैं।
लाल गुलाल ने अन्य सभी लाल प्रजातियों को भाव में पीछे छोड़ दिया है। कटाई, छंटाई, भराई और ट्रक लोडिंग में 54 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च आता है। इसके बाद किसानों को 1497 रुपये प्रति क्विंटल के दाम मिल रहे हैं। दिनारपुर के आलू व्यापारी कौशलेंद्र सिंह के अनुसार, लाल गुलाल आलू काली नदी के उस पार स्थित मोहनपुर, लालपुर, बड़ौरा और सादिकपुर जैसे क्षेत्रों में अधिक पैदा होता है। झारखंड के व्यापारी इसे खरीदने के लिए यहां आए हुए हैं। व्यापारियों द्वारा चार दिन पहले खरीदा गया आलू इस समय शीतगृहों के बरामदों में सुखाया जा रहा है। कई ट्रक माल पहले ही झारखंड भेजा जा चुका है। बिहार के व्यापारी भी जल्द ही लाल बीज खरीदने आने वाले हैं।
झारखंड, बिहार और पूर्वांचल में लाल प्रजाति का आलू अधिक पसंद किया जाता है। इसमें नीदरलैंड, कंचन, सिंदूरी, उदय कुखरी और लाल गुलाल आलू शामिल हैं। इस बार भी लाल गुलाल आलू के बीज की विशेष मांग देखी जा रही है। यह आलू अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण इन क्षेत्रों में लोकप्रिय है। झारखंड के हजारीबाग जिले के व्यापारी सोनू कुमार मेहता ने जानकारी दी कि वे कई वर्षों से यहां से आलू बीज ले जाकर वहां के किसानों को बेच रहे हैं।
विज्ञापन
बोआई और भाव का उतार-चढ़ाव
झारखंड के हजारीबाग जिले के व्यापारी सोनू कुमार मेहता ने बताया कि उनके यहां लाल गुलाल आलू की बोआई एक से 30 सितंबर तक होती है। फसल 60 दिन में तैयार होकर खुदाई के लिए उपलब्ध हो जाती है। प्रति बीघा 25 से 30 क्विंटल तक आलू की उपज होती है। पिछले वर्ष लाल गुलाल बीज की शुरुआत 1800 रुपये प्रति क्विंटल से हुई थी, जो बढ़कर 3600 रुपये तक पहुंच गई थी। इस बार भाव 1600 रुपये से शुरू हुए हैं, हालांकि अब सौदों में कुछ नरमी आई है।
नेपाल को चिप्सोना का निर्यात
नेपाल में सैलाब की आपदा के बाद आलू का निर्यात तेजी से बढ़ा है। कमालगंज के एक शीतगृह से चिप्सोना आलू 25 किलो के पैकेट में भरकर नेपाल भेजा जा रहा है। किसान और आलू व्यापारी वीनू और सुनील राठौर ने जानकारी दी कि नेपाल की तीन सीमाएं बंद हैं। इसके बावजूद वे महाराजगंज सीमा से आलू नेपाल भेज रहे हैं। नेपाल में अधिक बड़े आकार का आलू पसंद नहीं किया जाता है। इसलिए मध्यम और छोटे आकार के आलू को पैक करके भेजा जा रहा है।
विज्ञापन
लाल गुलाल ने अन्य सभी लाल प्रजातियों को भाव में पीछे छोड़ दिया है। कटाई, छंटाई, भराई और ट्रक लोडिंग में 54 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च आता है। इसके बाद किसानों को 1497 रुपये प्रति क्विंटल के दाम मिल रहे हैं। दिनारपुर के आलू व्यापारी कौशलेंद्र सिंह के अनुसार, लाल गुलाल आलू काली नदी के उस पार स्थित मोहनपुर, लालपुर, बड़ौरा और सादिकपुर जैसे क्षेत्रों में अधिक पैदा होता है। झारखंड के व्यापारी इसे खरीदने के लिए यहां आए हुए हैं। व्यापारियों द्वारा चार दिन पहले खरीदा गया आलू इस समय शीतगृहों के बरामदों में सुखाया जा रहा है। कई ट्रक माल पहले ही झारखंड भेजा जा चुका है। बिहार के व्यापारी भी जल्द ही लाल बीज खरीदने आने वाले हैं।
विज्ञापन
झारखंड, बिहार और पूर्वांचल में लाल प्रजाति का आलू अधिक पसंद किया जाता है। इसमें नीदरलैंड, कंचन, सिंदूरी, उदय कुखरी और लाल गुलाल आलू शामिल हैं। इस बार भी लाल गुलाल आलू के बीज की विशेष मांग देखी जा रही है। यह आलू अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण इन क्षेत्रों में लोकप्रिय है। झारखंड के हजारीबाग जिले के व्यापारी सोनू कुमार मेहता ने जानकारी दी कि वे कई वर्षों से यहां से आलू बीज ले जाकर वहां के किसानों को बेच रहे हैं।
विज्ञापन
बोआई और भाव का उतार-चढ़ाव
झारखंड के हजारीबाग जिले के व्यापारी सोनू कुमार मेहता ने बताया कि उनके यहां लाल गुलाल आलू की बोआई एक से 30 सितंबर तक होती है। फसल 60 दिन में तैयार होकर खुदाई के लिए उपलब्ध हो जाती है। प्रति बीघा 25 से 30 क्विंटल तक आलू की उपज होती है। पिछले वर्ष लाल गुलाल बीज की शुरुआत 1800 रुपये प्रति क्विंटल से हुई थी, जो बढ़कर 3600 रुपये तक पहुंच गई थी। इस बार भाव 1600 रुपये से शुरू हुए हैं, हालांकि अब सौदों में कुछ नरमी आई है।
नेपाल को चिप्सोना का निर्यात
नेपाल में सैलाब की आपदा के बाद आलू का निर्यात तेजी से बढ़ा है। कमालगंज के एक शीतगृह से चिप्सोना आलू 25 किलो के पैकेट में भरकर नेपाल भेजा जा रहा है। किसान और आलू व्यापारी वीनू और सुनील राठौर ने जानकारी दी कि नेपाल की तीन सीमाएं बंद हैं। इसके बावजूद वे महाराजगंज सीमा से आलू नेपाल भेज रहे हैं। नेपाल में अधिक बड़े आकार का आलू पसंद नहीं किया जाता है। इसलिए मध्यम और छोटे आकार के आलू को पैक करके भेजा जा रहा है।