{"_id":"57a37a9f4f1c1bb5602b94d4","slug":"raksha-bandhan-will-fight-modi-and-akhilesh-screw","type":"story","status":"publish","title_hn":"रक्षाबंधन पर लड़ेंगे ‘मोदी और अखिलेश’ के पेंच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रक्षाबंधन पर लड़ेंगे ‘मोदी और अखिलेश’ के पेंच
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Thu, 04 Aug 2016 10:55 PM IST
विज्ञापन
पतंग की दुकान।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बार रक्षाबंधन पर ‘मोदी और अखिलेश’ आसमान में पेंच लड़ाते नजर आयेंगे। पतंगबाजी को पॉलिटिकल रंग देते हुए कारीगरों ने राजनेताओं की पतंग पर उनके फोटो उतारें हैं। हालांकि इस बार पतंग उद्योग पर छाए सन्नाटे से विक्रेता परेशान हैं।
रक्षाबंधन पर्व पर कायमगंज में वर्षों पुरानी पतंगबाजी की परंपरा चली आ रही है। इसको लेकर इस बार भी पतंगसाजों ने दुकानों पर मांझा और पतंगों का स्टाक कर रखा है। मोदी, अखिलेश, राजनाथ, मायावती, राहुल गांधी, केजरीवाल के चेहरे वाले फोटो और बरेली के बने मांझे और चाइनीज मांझे की डिमांड ज्यादा है।
हालांकि ग्राहकों की कम भीड़ पतंग विक्रेताओं को परेशान कर रही है। पतंग विक्रेता शिव कुमार बताते हैं कि उनका परिवार पिछले 30 वर्षों से पतंग व्यवसाय कर रहे हैं और रक्षाबंधन आते-आते लगभग तीन लाख का व्यवसाय कर लेते थे लेकिन इस वर्ष अभी तक मात्र चार हजार रुपये का ही व्यवसाय कर पाए हैं। वहीं, पतंग विक्रेता आमोद कुमार ने बताया कि इस बार पतंग व मांझे की बिक्री कम है।
विज्ञापन
पतंग विक्रेता उमेश ने बताया कि 1 रुपये पन्नी वाली पतंग की बिक्री ज्यादा है लेकिन उसमें कोई मुनाफा भी नहीं है। तंबाकू व्यवसायी जगेंद्र सिंह उर्फ मल्लू यादव कहते हैं कि बच्चों में मोबाइल गेम व टीवी की ओर आक र्षित हैं इसलिये पतंग की कम बिक्री का प्रमुख कारण है। वही नीरज गंगवार बताते हैं कि लोगों की भागदौड़ भरी दिनचर्या व ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का होना प्रमुख कारण है।
विज्ञापन
रक्षाबंधन पर्व पर कायमगंज में वर्षों पुरानी पतंगबाजी की परंपरा चली आ रही है। इसको लेकर इस बार भी पतंगसाजों ने दुकानों पर मांझा और पतंगों का स्टाक कर रखा है। मोदी, अखिलेश, राजनाथ, मायावती, राहुल गांधी, केजरीवाल के चेहरे वाले फोटो और बरेली के बने मांझे और चाइनीज मांझे की डिमांड ज्यादा है।
विज्ञापन
हालांकि ग्राहकों की कम भीड़ पतंग विक्रेताओं को परेशान कर रही है। पतंग विक्रेता शिव कुमार बताते हैं कि उनका परिवार पिछले 30 वर्षों से पतंग व्यवसाय कर रहे हैं और रक्षाबंधन आते-आते लगभग तीन लाख का व्यवसाय कर लेते थे लेकिन इस वर्ष अभी तक मात्र चार हजार रुपये का ही व्यवसाय कर पाए हैं। वहीं, पतंग विक्रेता आमोद कुमार ने बताया कि इस बार पतंग व मांझे की बिक्री कम है।
विज्ञापन
पतंग विक्रेता उमेश ने बताया कि 1 रुपये पन्नी वाली पतंग की बिक्री ज्यादा है लेकिन उसमें कोई मुनाफा भी नहीं है। तंबाकू व्यवसायी जगेंद्र सिंह उर्फ मल्लू यादव कहते हैं कि बच्चों में मोबाइल गेम व टीवी की ओर आक र्षित हैं इसलिये पतंग की कम बिक्री का प्रमुख कारण है। वही नीरज गंगवार बताते हैं कि लोगों की भागदौड़ भरी दिनचर्या व ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का होना प्रमुख कारण है।