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जूते के फीते से फांसी लगाने पर कैदी के भइयों को संदेह

Tue, 05 May 2020 09:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 05 May 2020 09:45 PM IST
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Questions raised on hanging from shoe belt
फतेहगढ़ में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठे चंद्रहास के भाई। - फोटो : FARRUKHABAD
जूते के फीते से फांसी लगाने पर उठाए सवाल
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फर्रुखाबाद। जूते के फीते से शौचालय के नल के सहारे बैठकर कैसे कोई फांसी कैसे लगा सकता है। यह सवाल उठाते हुए सेंट्रल जेल में फांसी लगाने वाले उम्रकैदी के भाइयों ने जेल प्रशासन की कहानी पर संदेह जाहिर किया है। कहा कि वे इसकी शासन में शिकायत करेंगे।
जिला फतेहपुर के सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला भिखारीपुर देवीगंज निवासी चंद्रहास ने वर्ष 2010 मेें पत्नी रितू की कानपुर की एक धर्मशाला में जहर देकर हत्या कर दी थी। 3 दिसंबर 2016 में कानपुर कोर्ट से उसको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। 28 फरवरी 2017 को उसे फतेहगढ़ स्थित सेंट्रल जेल भेजा गया था।
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10 अक्तूबर 2018 को उसने अपनी बैरक में सो रहे जिला कानपुर देहात के कैदी गौरीशंकर की ईंटों से कुचलकर हत्या कर दी थी। इसके बाद वर्ष 2019 में चंद्रहास का पांच माह तक वाराणसी के मानसिक रोग अस्पताल में इलाज हुआ। फिर वापस सेंट्रल जेल लाया गया था। जेल में कैदी की हत्या के बाद परिजनों ने चंद्रहास से मिलना भी बंद कर दिया था।
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सोमवार का जेल प्रशासन की ओर से देर शाम परिजनों को चंद्रहास के फांसी लगाने की सूचना दी गई। मंगलवार को भाई अवधेश कुमार पांडेय, श्यामसुंदर पांडेय सेंट्रल जेल पहुंचे। वहां उन्हें चंद्रहास के जूते के फीते से शौचालय के नल के पास बैठकर फांसी लगाने की बात बताई गई।
दोनों भाइयों ने पोस्टमार्टम हाउस में कहा कि जेल प्रशासन की बताई गई कहानी गले नहीं उतर रही है। कैसे कोई बैठकर फांसी लगा सकता है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट फांसी लगने से दम घुटने से मौत होने की पुष्टि की गई है।

बीस दिन पहले भी एक कैदी ने फांसी लगाई थी
फर्रुखाबाद। जिला मैनपुरी के थाना भोगांव के गांव तिगंवा निवासी कैदी नाहर सिंह (47) ने 15 अप्रैल की रात बैरक के शौचालय में फांसी लगाई थी। 16 अप्रैल की सुबह वह शौचालय के जंगले में फंदे पर लटका मिला था। जेल प्रशासन ने टीबी की बीमारी से तंग आकर उसके आत्महत्या करने की बात कही ती। परिजनों ने इस बात को सिरे से खारिज कर जेल प्रशासन पर आरोप लगाए थे।
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