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Farrukhabad News: बिना डॉक्टर व अधूरे मानकों पर चल रहे निजी अस्पताल
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- झोलाछापों के 25 निजी अस्पतालों में ऑनकाल सेवाएं दे रहे सर्जन
- मरीजों के उपचार के लिए अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से चल रहे अमानक अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टर के नाम पर पंजीकरण में किराए की डिग्री लगी है। इन झोलाछापों के अस्पतालों में ऑनकाल सर्जन अवैध चिकित्सा को बढ़ावा दे रहे हैं। मरीज की मौत होने पर ओटी सील कर पल्ला झाड़ लिया जाता है। इसके बाद अस्पताल संचालक सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगाकर सील भी खुलवा लेते हैं।
जनपद में 180 से अधिक निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं। इसके अलावा 50 से अधिक पैथोलॉजी और करीब 60 अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं। पंजीकरण में एमबीबीएस डॉक्टर के फोटो और डिग्री भी लगाई है जबकि आईएमए की सूची में करीब 130 एमबीबीएस डॉक्टर ही शामिल हैं। इनमें कई डॉक्टर ऐसे हैं उनके परिवार तीन-तीन डॉक्टर होने से अपने अस्पताल में सेवा दे रहे हैं। कुछ डॉक्टर तो सरकारी पगार लेकर अपना अस्पताल चला रहे हैं।
इससे साफ है कि अधिकांश निजी अस्पताल, पैथोलॉजी व अल्ट्रासाउंड सेंटर बाहर पढ़ाई कर रहे या प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों की किराए पर डिग्री लेकर पंजीकरण करा लेते हैं। सीएमओ कार्यालय में एक बार फोटो खिंचवाने के बाद दोबारा निजी अस्पताल तो दूर की बात जिले की ओर रुख भी नहीं करते। फिर इन निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीज झोलाछापों के भरोसे रहते हैं।
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शासन से सख्ती के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने निर्देश दिए थे कि एक सर्जन चार से अधिक अस्पतालों में ऑनकाल सेवा नहीं दे सकता है। जबकि चार सर्जन ऐसे हैं जो करीब 25 से 30 निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करने जाते हैं। उनके चेले भी अब मरीजों के ऑपरेशन कर उनकी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऑपरेशन के बाद इन मरीजों की देखभाल के लिए अस्पताल में कोई एमबीबीएस डॉक्टर उपलब्ध ही नहीं है। इससे झोलाछापों के भरोसे इलाज किया जाता है।
मसेनी चौराहे से लेकर लकूला रोड व आवास विकास तक अवैध अस्पतालों की मंडी है। यदि सही से जांच की जाए तो अधिकांश में एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद नहीं मिलेंगे। सीएमओ की जांच में भी कई बार अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। अब जिलाधिकारी डॉ.अंकुर लाठर ने स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने पर नजरें लगा दी हैं। जिलाधिकारी की सख्ती के चलते स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची है।
कमेटी में शामिल हों प्रशासनिक अधिकारी व आईएमए के डॉक्टर
आईएमए के अध्यक्ष डॉ.विपुल अग्रवाल ने बताया कि आईएमए की सूची में 130 एमबीबीएस डॉक्टर शामिल हैं। अवैध रूप से चल रहे अस्पताल बंद होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच कमेटी में स्वास्थ्य अधिकारी के साथ आईएमए के डॉक्टर व प्रशासन से एक अधिकारी भी नामित हो। इससे निष्पक्ष जांच हो सके और मरीजों की जान से हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके।
देखी जाएगी पंजीकरण की पत्रावलियां
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन काल रिसीव नहीं हुई। जिलाधिकारी डॉ.अंकुर लाठर ने बताया कि वह निजी अस्पतालों की पंजीकरण पत्रावली मंगवाकर देखेंगी। अमानक व बिना डॉक्टर के निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई तय की जाएगी।
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- मरीजों के उपचार के लिए अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से चल रहे अमानक अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टर के नाम पर पंजीकरण में किराए की डिग्री लगी है। इन झोलाछापों के अस्पतालों में ऑनकाल सर्जन अवैध चिकित्सा को बढ़ावा दे रहे हैं। मरीज की मौत होने पर ओटी सील कर पल्ला झाड़ लिया जाता है। इसके बाद अस्पताल संचालक सीएमओ कार्यालय के चक्कर लगाकर सील भी खुलवा लेते हैं।
जनपद में 180 से अधिक निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं। इसके अलावा 50 से अधिक पैथोलॉजी और करीब 60 अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं। पंजीकरण में एमबीबीएस डॉक्टर के फोटो और डिग्री भी लगाई है जबकि आईएमए की सूची में करीब 130 एमबीबीएस डॉक्टर ही शामिल हैं। इनमें कई डॉक्टर ऐसे हैं उनके परिवार तीन-तीन डॉक्टर होने से अपने अस्पताल में सेवा दे रहे हैं। कुछ डॉक्टर तो सरकारी पगार लेकर अपना अस्पताल चला रहे हैं।
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इससे साफ है कि अधिकांश निजी अस्पताल, पैथोलॉजी व अल्ट्रासाउंड सेंटर बाहर पढ़ाई कर रहे या प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों की किराए पर डिग्री लेकर पंजीकरण करा लेते हैं। सीएमओ कार्यालय में एक बार फोटो खिंचवाने के बाद दोबारा निजी अस्पताल तो दूर की बात जिले की ओर रुख भी नहीं करते। फिर इन निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीज झोलाछापों के भरोसे रहते हैं।
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शासन से सख्ती के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने निर्देश दिए थे कि एक सर्जन चार से अधिक अस्पतालों में ऑनकाल सेवा नहीं दे सकता है। जबकि चार सर्जन ऐसे हैं जो करीब 25 से 30 निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करने जाते हैं। उनके चेले भी अब मरीजों के ऑपरेशन कर उनकी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऑपरेशन के बाद इन मरीजों की देखभाल के लिए अस्पताल में कोई एमबीबीएस डॉक्टर उपलब्ध ही नहीं है। इससे झोलाछापों के भरोसे इलाज किया जाता है।
मसेनी चौराहे से लेकर लकूला रोड व आवास विकास तक अवैध अस्पतालों की मंडी है। यदि सही से जांच की जाए तो अधिकांश में एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद नहीं मिलेंगे। सीएमओ की जांच में भी कई बार अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। अब जिलाधिकारी डॉ.अंकुर लाठर ने स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने पर नजरें लगा दी हैं। जिलाधिकारी की सख्ती के चलते स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची है।
कमेटी में शामिल हों प्रशासनिक अधिकारी व आईएमए के डॉक्टर
आईएमए के अध्यक्ष डॉ.विपुल अग्रवाल ने बताया कि आईएमए की सूची में 130 एमबीबीएस डॉक्टर शामिल हैं। अवैध रूप से चल रहे अस्पताल बंद होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच कमेटी में स्वास्थ्य अधिकारी के साथ आईएमए के डॉक्टर व प्रशासन से एक अधिकारी भी नामित हो। इससे निष्पक्ष जांच हो सके और मरीजों की जान से हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके।
देखी जाएगी पंजीकरण की पत्रावलियां
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन काल रिसीव नहीं हुई। जिलाधिकारी डॉ.अंकुर लाठर ने बताया कि वह निजी अस्पतालों की पंजीकरण पत्रावली मंगवाकर देखेंगी। अमानक व बिना डॉक्टर के निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई तय की जाएगी।