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गंगा में जा रहा छपाई कारखानों से निकला ‘जहर’
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद
Updated Fri, 18 Mar 2016 12:45 AM IST
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सड़क पर भरा छपाई कारखानों का पानी
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे के तहत गंगा को साफ करने के मंसूबों पर जिले के छपाई उद्योग की काली छाया पड़ रही है। बिना ट्रीटमेंट प्लांट लगाए छपाई कारखानों से निकलने वाला केमिकल युक्त जहर(वेस्ट) गंगा में सीधे मिल रहा है। इससे गंगा में रह रहे जीवों के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है।
केंद्र सरकार ने गंगा की सफाई करोड़ाें रुपये का बजट पास किया है। गंगा में गिरने वाले नाले इस योजना को ग्रहण लगा रहे हैं। शहर के उत्तरी ओर स्थित करीब 70 कारखानों में से 15 कारखानों में ही अब तक ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा सके हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की छापेमारी के बावजूद छपाई कारखानों से निकलने वाला केमिकल युक्त जहर गंगा में सीधे गिर रहा है।
विगत पखवारे गंगा में गिर रहे नालों के पानी की जांच करने आई एनजीटी की टीम ने भी नालों के पानी के सीधे गंगा में जाने पर आपत्ति जताई थी। केमिकल युक्त वेस्ट वाटर के गंगा में गिरने से पानी में आक्सीजन का लेवल घटने की आशंका बढ़ने लगी है। इससे गंगा में रह रहे जीव जंतुओं के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है।
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सिंकदर का कहना है कि गंगा की ऊपरी धारा में पानी साफ है। नालों के मिलने के बाद पानी में प्रदूषण बढ़ रहा है। इनका कहना है कि गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कार्य योजना तैयार की जा रही है।
सड़क पर भर रहा छपाई कारखानों का पानी
छपाई कारखानों से निकलने वाले केमिकल युक्त वेस्ट सड़कों पर बहने से गंगा दरवाजा के ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी में हाथ पैर भीगने से एलर्जी होने लगती है। स्थानीय बाशिंदों ने जिलाधिकारी से छपाई कारखानों से निकलने वाले पानी पर रोक लगाने की मांग की है।
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केंद्र सरकार ने गंगा की सफाई करोड़ाें रुपये का बजट पास किया है। गंगा में गिरने वाले नाले इस योजना को ग्रहण लगा रहे हैं। शहर के उत्तरी ओर स्थित करीब 70 कारखानों में से 15 कारखानों में ही अब तक ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा सके हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की छापेमारी के बावजूद छपाई कारखानों से निकलने वाला केमिकल युक्त जहर गंगा में सीधे गिर रहा है।
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विगत पखवारे गंगा में गिर रहे नालों के पानी की जांच करने आई एनजीटी की टीम ने भी नालों के पानी के सीधे गंगा में जाने पर आपत्ति जताई थी। केमिकल युक्त वेस्ट वाटर के गंगा में गिरने से पानी में आक्सीजन का लेवल घटने की आशंका बढ़ने लगी है। इससे गंगा में रह रहे जीव जंतुओं के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है।
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सिंकदर का कहना है कि गंगा की ऊपरी धारा में पानी साफ है। नालों के मिलने के बाद पानी में प्रदूषण बढ़ रहा है। इनका कहना है कि गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कार्य योजना तैयार की जा रही है।
सड़क पर भर रहा छपाई कारखानों का पानी
छपाई कारखानों से निकलने वाले केमिकल युक्त वेस्ट सड़कों पर बहने से गंगा दरवाजा के ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी में हाथ पैर भीगने से एलर्जी होने लगती है। स्थानीय बाशिंदों ने जिलाधिकारी से छपाई कारखानों से निकलने वाले पानी पर रोक लगाने की मांग की है।