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Farrukhabad News: उखरा में प्रशासन की कार्रवाई में प्रधानमंत्री आवास भी गिरा
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नवाबगंज। बंजर भूमि पर प्रशासन की ओर से तोड़े गए 23 मकानों की जद में प्रधानमंत्री आवास योजना का भी एक आवास आ गया है। अब तीन बेटों के साथ विधवा मां खुले आसमान के नीचे आ गई है। परिवार काफी गरीब है।
क्षेत्र के गांव उखरा में शनिवार को बंजर भूमि पर बने 23 आवासों को बुलडोजर से गिराया गया था। इनमें मुन्नी देवी का भी आवास शामिल हैं। मुन्नी के पति नंदराम यादव की पहले ही मौत हो चुकी है। बेहद गरीब मुन्नी के तीन पुत्र राजीव यादव, जितेंद्र यादव और पुष्पेंद्र हैं।
वह मेहनत मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। झोपड़़ी में रहने वाली मुन्नी को पिछली साल प्रधानमंत्री योजना के तहत आवास मिला था। इसके तहत उसे 1,43,230 रुपये मिले। इसमें उसने कमरा, बरामदा बनाकर पिछले महीने ही तैयार कराया था। उसमें तीनों बेटों के साथ वह रह रही थी। मगर प्रशासन के बुलडोजर ने उसका वह आवास भी गिरा दिया। इससे वह परेशान है। अब खुले आसमान के नीचे पूरा परिवार रात-दिन काटने को मजबूर है। कुछ लोगों का कहना है कि जब यह जमीन मुन्नीदेवी की नहीं थी, तो जांच के दौरान यह आवास को स्वीकृति कैसे प्रदान कर दी गई।
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बीडीओ त्रिलोक चंद्र शर्मा ने बताया कि जमीन पर पहले पीड़िता की झोपड़ी पड़ी थी। जांच में झोपड़ी को देखकर उस भूमि का चयन कर लिया गया था। इसी का जियो टैग कराकर आवास आवंटित किया गया। भूमि सरकारी है अथवा पीड़िता की इस बात की जानकारी ग्राम पंचायत सचिव से की जाएगी।
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क्षेत्र के गांव उखरा में शनिवार को बंजर भूमि पर बने 23 आवासों को बुलडोजर से गिराया गया था। इनमें मुन्नी देवी का भी आवास शामिल हैं। मुन्नी के पति नंदराम यादव की पहले ही मौत हो चुकी है। बेहद गरीब मुन्नी के तीन पुत्र राजीव यादव, जितेंद्र यादव और पुष्पेंद्र हैं।
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वह मेहनत मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। झोपड़़ी में रहने वाली मुन्नी को पिछली साल प्रधानमंत्री योजना के तहत आवास मिला था। इसके तहत उसे 1,43,230 रुपये मिले। इसमें उसने कमरा, बरामदा बनाकर पिछले महीने ही तैयार कराया था। उसमें तीनों बेटों के साथ वह रह रही थी। मगर प्रशासन के बुलडोजर ने उसका वह आवास भी गिरा दिया। इससे वह परेशान है। अब खुले आसमान के नीचे पूरा परिवार रात-दिन काटने को मजबूर है। कुछ लोगों का कहना है कि जब यह जमीन मुन्नीदेवी की नहीं थी, तो जांच के दौरान यह आवास को स्वीकृति कैसे प्रदान कर दी गई।
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बीडीओ त्रिलोक चंद्र शर्मा ने बताया कि जमीन पर पहले पीड़िता की झोपड़ी पड़ी थी। जांच में झोपड़ी को देखकर उस भूमि का चयन कर लिया गया था। इसी का जियो टैग कराकर आवास आवंटित किया गया। भूमि सरकारी है अथवा पीड़िता की इस बात की जानकारी ग्राम पंचायत सचिव से की जाएगी।