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Farrukhabad News: दर्द से 19 घंटे तड़पती रही गर्भवती, नहीं मिला खून
Mon, 11 May 2026 12:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Mon, 11 May 2026 12:23 AM IST
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फर्रुखाबाद। दर्द से तड़प रही गर्भवती को सरकारी अस्पताल में एक यूनिट खून नहीं मिल सका। परिजन मजबूरी में गर्भवती को निजी अस्पताल लेकर गए मगर वहां भी सिर्फ जांच तक ही मामला सीमित रहा। गर्भवती को 19 घंटों के दौरान महज दो इंजेक्शन लगाए गए।
शहर से करीब 50 किमी दूर कंपिल की गंगा कटरी में बसे गांव शाहपुर गंगपुर निवासी कल्याण सिंह की गर्भवती पत्नी सियादेवी (45) को शनिवार शाम चार बजे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल की ओर से एक यूनिट खून की व्यवस्था करने को कहा गया। परिवार में कोई बदले में खून देने वाला नहीं मिला। अस्पताल के स्टाफ ने सीएमएस से नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराकर प्रसव कराने की बजाए एक कागज पर लिखवा लिया कि खून की व्यवस्था न करवा पाने के कारण बाहर ले जा रहा हैं। इसके बाद वह पत्नी को लेकर चला गया।
कल्याण सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार रात प्रसव पीड़ा होने पर आशा कार्यकर्ता के साथ कंपिल सीएचसी पत्नी को ले गए। शुक्रवार 11 बजे तक प्रसव न होने पर घर ले आए। रात में फिर प्रसव पीड़ा हुई, तो सीएचसी ले गए। वहां से उसे कायमगंज सीएचसी रेफर कर दिया गया। कायमगंज सीएचसी में प्रसव में समय होने की बात कही गई, तो फिर कंपिल सीएचसी लेकर पहुंचा। वहां स्टाफ के कहने पर निजी अस्पताल ले गया, जहां 12 हजार रुपये मांगे गए। रुपये न होने पर वह शनिवार सुबह फिर से कंपिल सीएचसी लेकर पहुंचा। सीएचसी में डॉक्टर से आग्रह करके लोहिया अस्पताल के लिए रेफर करवा लिया।
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शनिवार शाम लोहिया अस्पताल पहुंचे। वहां आशा ने भर्ती करवा दिया। अस्पताल कर्मियों ने एक यूनिट खून लाने की बात कही। फिर भी बच्चा सही होने की कोई गारंटी न होने के फार्म पर अंगूठा लगवाकवार जाने दिया। इसके बाद एक एंबुलेंस से मसेनी स्थित अस्पताल में भर्ती करवा दिया है। वहां जांचों के 22 सौ रुपये जमा करवाए गए। उसने बताया कि 19 घंटे में सिर्फ दो इंजेक्शन लगाए गए।
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गर्भवती की जान बचाना प्रथम, फ्री हो सकता था खून
नियमानुसार यदि किसी गर्भवती की हालत गंभीर है। उसके साथ कोई खून देने वाला नहीं है, तब भी सीएमएस के आदेश पर तुरंत नि:शुल्क खून रक्त कोष से उपलब्ध कराया जाता है। पीड़ित कल्याण ने कहा कि उसे यह बात किसी ने नहीं बताई। वरना वह साहब के हाथ पैर जोड़ लेता।
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हमारे सख्त निर्देश हैं कि किसी भी गर्भवती के साथ खून देने वाला नहीं है, तब भी उसे उपलब्ध कराया जाएगा। स्टाफ अथवा आशा कार्यकर्ता को बताना चाहिए था। यदि मरीज से खून न ला पाने की की बात लिखवाई गई है, तो जांच कराकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। -डॉ. धीर सिंह, सीएमएस, लोहिया महिला अस्पताल।
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शहर से करीब 50 किमी दूर कंपिल की गंगा कटरी में बसे गांव शाहपुर गंगपुर निवासी कल्याण सिंह की गर्भवती पत्नी सियादेवी (45) को शनिवार शाम चार बजे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल की ओर से एक यूनिट खून की व्यवस्था करने को कहा गया। परिवार में कोई बदले में खून देने वाला नहीं मिला। अस्पताल के स्टाफ ने सीएमएस से नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराकर प्रसव कराने की बजाए एक कागज पर लिखवा लिया कि खून की व्यवस्था न करवा पाने के कारण बाहर ले जा रहा हैं। इसके बाद वह पत्नी को लेकर चला गया।
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कल्याण सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार रात प्रसव पीड़ा होने पर आशा कार्यकर्ता के साथ कंपिल सीएचसी पत्नी को ले गए। शुक्रवार 11 बजे तक प्रसव न होने पर घर ले आए। रात में फिर प्रसव पीड़ा हुई, तो सीएचसी ले गए। वहां से उसे कायमगंज सीएचसी रेफर कर दिया गया। कायमगंज सीएचसी में प्रसव में समय होने की बात कही गई, तो फिर कंपिल सीएचसी लेकर पहुंचा। वहां स्टाफ के कहने पर निजी अस्पताल ले गया, जहां 12 हजार रुपये मांगे गए। रुपये न होने पर वह शनिवार सुबह फिर से कंपिल सीएचसी लेकर पहुंचा। सीएचसी में डॉक्टर से आग्रह करके लोहिया अस्पताल के लिए रेफर करवा लिया।
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शनिवार शाम लोहिया अस्पताल पहुंचे। वहां आशा ने भर्ती करवा दिया। अस्पताल कर्मियों ने एक यूनिट खून लाने की बात कही। फिर भी बच्चा सही होने की कोई गारंटी न होने के फार्म पर अंगूठा लगवाकवार जाने दिया। इसके बाद एक एंबुलेंस से मसेनी स्थित अस्पताल में भर्ती करवा दिया है। वहां जांचों के 22 सौ रुपये जमा करवाए गए। उसने बताया कि 19 घंटे में सिर्फ दो इंजेक्शन लगाए गए।
गर्भवती की जान बचाना प्रथम, फ्री हो सकता था खून
नियमानुसार यदि किसी गर्भवती की हालत गंभीर है। उसके साथ कोई खून देने वाला नहीं है, तब भी सीएमएस के आदेश पर तुरंत नि:शुल्क खून रक्त कोष से उपलब्ध कराया जाता है। पीड़ित कल्याण ने कहा कि उसे यह बात किसी ने नहीं बताई। वरना वह साहब के हाथ पैर जोड़ लेता।
हमारे सख्त निर्देश हैं कि किसी भी गर्भवती के साथ खून देने वाला नहीं है, तब भी उसे उपलब्ध कराया जाएगा। स्टाफ अथवा आशा कार्यकर्ता को बताना चाहिए था। यदि मरीज से खून न ला पाने की की बात लिखवाई गई है, तो जांच कराकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। -डॉ. धीर सिंह, सीएमएस, लोहिया महिला अस्पताल।