{"_id":"647b8f2d553cdc317c098d44","slug":"pharmacists-salary-is-coming-out-from-labor-department-without-duty-farrukhabad-news-c-12-1-267448-2023-06-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: बिना ड्यूटी के फार्मासिस्ट का श्रम विभाग से निकल रहा है वेतन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: बिना ड्यूटी के फार्मासिस्ट का श्रम विभाग से निकल रहा है वेतन
Sun, 04 Jun 2023 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sun, 04 Jun 2023 12:36 AM IST
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। नवनियुक्त न्यायालय कर्मियों के मेडिकल परीक्षण में हुई वसूली के मामले में हटाए फार्मासिस्ट का बिना ड्यूटी किए ही करीब ढाई वर्ष से श्रम विभाग से वेतन निकल रहा है। सीएमओ कार्यालय से श्रम विभाग में उपस्थिति सत्यापित कर नहीं भेजी गई।
न्याय विभाग में नियुक्त ग्रुप सी के 27 व ग्रुप डी के 44 कर्मचारियों का ज्वाइनिंग से पहले सीएमओ कार्यालय में पैनल से मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसकी जिम्मेदारी स्टेनो सतवीर के सहयोगी श्रम विभाग के संबद्ध चल रहे फार्मासिस्ट महेश चंद्र वर्मा को दी गई थी। वह खुद ही डॉक्टर की तरह परीक्षण करते रहे। परीक्षण के नाम पर कर्मचारियों से वसूली की शिकायत पर सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने दो जून को स्टोर से संबद्धता समाप्त करते हुए फार्मासिस्ट महेश चंद्र वर्मा को श्रम विभाग के लिए कार्यमुक्त कर दिया।
शनिवार को भी फार्मासिस्ट ने श्रम विभाग में कार्यभार नहीं संभाला। खास बात तो यह है कि कोरोना काल के दौरान वर्ष 2020 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए फार्मासिस्ट को एल-2 अस्पताल में सहयोग करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से फार्मासिस्ट ने स्वास्थ्य विभाग में ही पैर जमा लिए। वह अधिकारियों को बताते रहे कि डीएम के आदेश पर उन्हें संबद्ध किया गया है। इसी झांसे में फार्मासिस्ट स्टोर से लेकर कई पटलों का काम भी देखते रहे। दो जून को जब सीएमओ ने संबद्धता आदेश मांगा, तो आदेश कार्यालय में नहीं मिला। खास की बात तो यह है कि सीएमओ कार्यालय में फार्मासिस्ट की न तो कभी रजिस्टर पर हाजिरी लगी और न ही श्रम विभाग में उपस्थिति भेजी गई। इसके बावजूद लगातार वेतन निकलता रहा।
विज्ञापन
सहायक श्रमायुक्त देवेश सिंह ने बताया कि उनकी तैनाती से पहले तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर कानपुर कार्यालय से सितंबर 2020 में फार्मासिस्ट के स्वास्थ्य विभाग में संबद्धता के आदेश हुए थे। हालांकि वह आदेश नहीं दिखा सके। यह भी बताया कि सीएमओ कार्यालय से उपस्थिति के आधार पर वेतन भुगतान किया जा रहा है।
दूसरी ओर सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि फार्मासिस्ट महेश चंद्र की उपस्थित न तो उन्होंने कभी सत्यापित की और न ही कार्यालय से डिस्पैच की गई। किस आधार पर श्रम विभाग वेतन निकाल रहा है, यह उसकी जिम्मेदारी है।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने न्यायालय कर्मियों से मेडिकल परीक्षण के नाम पर धन उगाही की शिकायत पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। उन्होंने एसीएमओ डॉ.दलवीर सिंह की अध्यक्षता में एसीएमओ यूसी वर्मा व जिला प्रशासनिक अधिकारी निष्ठा श्रीवास्तव को जांच सौंपकर दो दिन में रिपोर्ट मांगी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि एसीएमओ डॉ.सर्वेश यादव के पास से स्टोर का चार्ज हटा दिया है। उन्होंने डिप्टी सीएमओ डॉ.आरसी माथुर को अपने कार्यों के साथ स्टोर के भी सभी कार्य करने के आदेश दिए हैं। विदित है कि एसीएमओ डॉ.सर्वेश यादव मेडिकल बोर्ड में शामिल थे। न्यायालय कर्मियों से मेडिकल परीक्षण के नाम पर धन उगाही की शिकायत पर उनके पास से स्टोर का भी चार्ज हटाया गया है।
विज्ञापन
न्याय विभाग में नियुक्त ग्रुप सी के 27 व ग्रुप डी के 44 कर्मचारियों का ज्वाइनिंग से पहले सीएमओ कार्यालय में पैनल से मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसकी जिम्मेदारी स्टेनो सतवीर के सहयोगी श्रम विभाग के संबद्ध चल रहे फार्मासिस्ट महेश चंद्र वर्मा को दी गई थी। वह खुद ही डॉक्टर की तरह परीक्षण करते रहे। परीक्षण के नाम पर कर्मचारियों से वसूली की शिकायत पर सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने दो जून को स्टोर से संबद्धता समाप्त करते हुए फार्मासिस्ट महेश चंद्र वर्मा को श्रम विभाग के लिए कार्यमुक्त कर दिया।
विज्ञापन
शनिवार को भी फार्मासिस्ट ने श्रम विभाग में कार्यभार नहीं संभाला। खास बात तो यह है कि कोरोना काल के दौरान वर्ष 2020 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए फार्मासिस्ट को एल-2 अस्पताल में सहयोग करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से फार्मासिस्ट ने स्वास्थ्य विभाग में ही पैर जमा लिए। वह अधिकारियों को बताते रहे कि डीएम के आदेश पर उन्हें संबद्ध किया गया है। इसी झांसे में फार्मासिस्ट स्टोर से लेकर कई पटलों का काम भी देखते रहे। दो जून को जब सीएमओ ने संबद्धता आदेश मांगा, तो आदेश कार्यालय में नहीं मिला। खास की बात तो यह है कि सीएमओ कार्यालय में फार्मासिस्ट की न तो कभी रजिस्टर पर हाजिरी लगी और न ही श्रम विभाग में उपस्थिति भेजी गई। इसके बावजूद लगातार वेतन निकलता रहा।
विज्ञापन
सहायक श्रमायुक्त देवेश सिंह ने बताया कि उनकी तैनाती से पहले तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर कानपुर कार्यालय से सितंबर 2020 में फार्मासिस्ट के स्वास्थ्य विभाग में संबद्धता के आदेश हुए थे। हालांकि वह आदेश नहीं दिखा सके। यह भी बताया कि सीएमओ कार्यालय से उपस्थिति के आधार पर वेतन भुगतान किया जा रहा है।
दूसरी ओर सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि फार्मासिस्ट महेश चंद्र की उपस्थित न तो उन्होंने कभी सत्यापित की और न ही कार्यालय से डिस्पैच की गई। किस आधार पर श्रम विभाग वेतन निकाल रहा है, यह उसकी जिम्मेदारी है।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने न्यायालय कर्मियों से मेडिकल परीक्षण के नाम पर धन उगाही की शिकायत पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। उन्होंने एसीएमओ डॉ.दलवीर सिंह की अध्यक्षता में एसीएमओ यूसी वर्मा व जिला प्रशासनिक अधिकारी निष्ठा श्रीवास्तव को जांच सौंपकर दो दिन में रिपोर्ट मांगी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार ने बताया कि एसीएमओ डॉ.सर्वेश यादव के पास से स्टोर का चार्ज हटा दिया है। उन्होंने डिप्टी सीएमओ डॉ.आरसी माथुर को अपने कार्यों के साथ स्टोर के भी सभी कार्य करने के आदेश दिए हैं। विदित है कि एसीएमओ डॉ.सर्वेश यादव मेडिकल बोर्ड में शामिल थे। न्यायालय कर्मियों से मेडिकल परीक्षण के नाम पर धन उगाही की शिकायत पर उनके पास से स्टोर का भी चार्ज हटाया गया है।