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Farrukhabad News: ड्रेस खरीद में छूट रहे पसीने, सरकारी खरीद के रेट हकीकत से कोसों दूर

Thu, 28 Nov 2024 12:23 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 Nov 2024 12:23 AM IST
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People are sweating while buying dresses, government purchase rates are far from reality
फर्रुखाबाद। जनपद में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चों के पास यूनिफार्म, जूता-मोजा और स्वेटर नहीं हैं। यूनिफार्म के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिये अभिभावकों के खातों में भेजी गई धनराशि उन्होंने राशन व खाद में खर्च कर डाली।
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तर्क दिया कि 1200 रुपये में दो जोड़ी यूनिफार्म व एक जोड़ी जूता-मोजा, स्कूल बैग और स्वेटर खरीदना संभव नहीं है। अब जब रुपये होंगे तो बच्चों के लिए यूनिफार्म व स्वेटर खरीद देंगे। वहीं कुछ लोगों के खाते में रुपये ही नहीं आए। इस वजह से अधिकतर बच्चे पुरानी यूनिफार्म पहनकर और बिना स्वेटर के आने को मजबूर हैं।
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यूनिफार्म, जूता-मोजा व स्वेटर के वितरण में धांधली न बरती जाए, इसलिए करीब तीन साल पहले शासन ने सीधे बच्चों के अभिभावकों के खातों में डीबीटी के जरिए धनराशि भिजवाते हुए यूनिफार्म व स्वेटर आदि की खरीद करने के आदेश दिए थे। मगर हर वर्ष लगभग 20 से 25 प्रतिशत अभिभावकों के खातों में धनराशि जाती ही नहीं है। ऊपर से अभिभावक मिली धनराशि खर्च कर डालते हैं, लेकिन यूनिफार्म आदि नहीं खरीदते।
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एक वजह यह भी है कि सरकार ने यूनिफार्म खरीद के जो मानक तय किए हैं, उसके अनुसार बाजार से खरीदारी करना अभिभावकों के लिए टेढ़ी खीर है। ‘अमर उजाला’ ने बुधवार को पड़ताल की तो कुछ अभिभावकों ने राशन तो कुछ ने खाद खरीद में यूनिफार्म की धनराशि खर्च कर डाली।




महंगाई के चलते नहीं खरीदी, रुपये राशन में खर्च हो गए
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