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Farrukhabad News: सीएचसी में मरीजों को चादर न सफाई, प्रति माह खर्च हो रहे 72 हजार
Sat, 25 Oct 2025 11:40 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sat, 25 Oct 2025 11:40 PM IST
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फर्रुखाबाद। अलग-अलग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में सफाई व चादर धुलाई पर 72 हजार रुपये प्रति माह खर्च हो रहे हैं। जबकि मरीजों को बेड पर चादर ही नहीं मिल रही।
तीन सफाई कर्मियों के मानक पर मात्र एक की तैनाती होने से भुगतान में भी गोलमाल की आशंका है। मरीजों को अस्पताल में बेहतर सफाई व सुविधा के लिए प्रत्येक सीएचसी पर 72 हजार रुपये प्रति माह खर्च हो रहे हैं। जिले में सिविल अस्पताल लिंजीगंज सहित आठ सीएचसी हैं।
शासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग में लॉन्ड्री का टेंडर निकालकर फर्म का चयन किया गया। ठेकेदार को प्रत्येक सीएचसी पर पांच कर्मियों की तैनाती करनी थी। इसमें तीन शिफ्टों के लिए स्वीपर के अलावा एक माली व एक धोबी तैनात करना था ताकि मरीजों को बेड पर साफ चादर और पौधों में समय से पानी मिले।
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इसके सापेक्ष सीएचसी में धोबी, माली व मात्र एक सफाई कर्मी की तैनाती की गई है। इसके बावजूद ठेकेदार भुगतान के लिए पूरे 72 हजार का बिल दे रहा है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक किसी भी सीएचसी पर तीन से अधिक कर्मचारी तैनात नहीं किए गए हैं।
हकीकत पर नजर डालें तो सीएचसी में 30 बेड के सापेक्ष चार-छह मरीज ही भर्ती होते हैं। इनमें भी अधिकांश मरीजों को बेड पर चादर ही नहीं दी जाती है, इससे धुलाई का खर्च भी बच रहा है।
खास बात तो यह है कि आउटसोर्स पर लॉन्ड्री में भर्ती किए गए कर्मचारियों में एक भी कोविड कर्मी का समायोजन नहीं किया गया।
कुछ सीएचसी प्रभारियों ने बताया कि ठेकेदार द्वारा पांच कर्मचारी दिए जाने की उन्हें जानकारी नहीं है। फिलहाल तीन की ही तैनाती की गई है। एक सीएचसी पर ठेकेदार द्वारा बिल लगाने पर तीन कर्मचारियों के खाते में सात-सात हजार रुपये मानदेय भुगतान किया गया। शेष पूरा भुगतान सीएमओ कार्यालय से ही किया जाएगा।
सीएचसी परिसर में फैली गंदगी, पानी भी नहीं
नवाबगंज सीएचसी परिसर में गंदगी के अंबार हैं। बड़ी घास खड़ी होने के साथ कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों के बेड पर चादर नहीं दिखी। कुछ ऐसा ही हाल सीएचसी राजेपुर, मोहम्मदाबाद व शमसाबाद का रहा है। यहां भी मरीज बिना चादर के बेड पर लेटे मिले। सीएचसी कंपिल में तो गंदगी भरमार है। यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं मिला। गंदगी से शौचालय चोक व क्षतिग्रस्त है। पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है।
ठेकेदार को भुगतान करने से पहले शासनादेश देखा जाएगा। मानक से कम कर्मचारी पाए जाने पर भुगतान रोक दिया जाएगा। मरीजों को बेड पर चादर देना सीएचसी प्रभारी की लापरवाही है। मानकों की गंभीरता से जांच कराकर कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
-डॉ.अवनींद्र कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी फर्रुखाबाद।
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तीन सफाई कर्मियों के मानक पर मात्र एक की तैनाती होने से भुगतान में भी गोलमाल की आशंका है। मरीजों को अस्पताल में बेहतर सफाई व सुविधा के लिए प्रत्येक सीएचसी पर 72 हजार रुपये प्रति माह खर्च हो रहे हैं। जिले में सिविल अस्पताल लिंजीगंज सहित आठ सीएचसी हैं।
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शासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग में लॉन्ड्री का टेंडर निकालकर फर्म का चयन किया गया। ठेकेदार को प्रत्येक सीएचसी पर पांच कर्मियों की तैनाती करनी थी। इसमें तीन शिफ्टों के लिए स्वीपर के अलावा एक माली व एक धोबी तैनात करना था ताकि मरीजों को बेड पर साफ चादर और पौधों में समय से पानी मिले।
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इसके सापेक्ष सीएचसी में धोबी, माली व मात्र एक सफाई कर्मी की तैनाती की गई है। इसके बावजूद ठेकेदार भुगतान के लिए पूरे 72 हजार का बिल दे रहा है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक किसी भी सीएचसी पर तीन से अधिक कर्मचारी तैनात नहीं किए गए हैं।
हकीकत पर नजर डालें तो सीएचसी में 30 बेड के सापेक्ष चार-छह मरीज ही भर्ती होते हैं। इनमें भी अधिकांश मरीजों को बेड पर चादर ही नहीं दी जाती है, इससे धुलाई का खर्च भी बच रहा है।
खास बात तो यह है कि आउटसोर्स पर लॉन्ड्री में भर्ती किए गए कर्मचारियों में एक भी कोविड कर्मी का समायोजन नहीं किया गया।
कुछ सीएचसी प्रभारियों ने बताया कि ठेकेदार द्वारा पांच कर्मचारी दिए जाने की उन्हें जानकारी नहीं है। फिलहाल तीन की ही तैनाती की गई है। एक सीएचसी पर ठेकेदार द्वारा बिल लगाने पर तीन कर्मचारियों के खाते में सात-सात हजार रुपये मानदेय भुगतान किया गया। शेष पूरा भुगतान सीएमओ कार्यालय से ही किया जाएगा।
सीएचसी परिसर में फैली गंदगी, पानी भी नहीं
नवाबगंज सीएचसी परिसर में गंदगी के अंबार हैं। बड़ी घास खड़ी होने के साथ कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों के बेड पर चादर नहीं दिखी। कुछ ऐसा ही हाल सीएचसी राजेपुर, मोहम्मदाबाद व शमसाबाद का रहा है। यहां भी मरीज बिना चादर के बेड पर लेटे मिले। सीएचसी कंपिल में तो गंदगी भरमार है। यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं मिला। गंदगी से शौचालय चोक व क्षतिग्रस्त है। पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है।
ठेकेदार को भुगतान करने से पहले शासनादेश देखा जाएगा। मानक से कम कर्मचारी पाए जाने पर भुगतान रोक दिया जाएगा। मरीजों को बेड पर चादर देना सीएचसी प्रभारी की लापरवाही है। मानकों की गंभीरता से जांच कराकर कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
-डॉ.अवनींद्र कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी फर्रुखाबाद।