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झंझटों से बचने के लिए आढ़तियों को बेच रहे धान

Tue, 13 Nov 2018 11:41 PM IST
farrukhabad
farrukhabad Updated Tue, 13 Nov 2018 11:41 PM IST
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Paddy to be sold by the stalwarts to avoid trouble in farrukhabad
मंडी समिति में हो रही धान की खरीद - फोटो : अमर उजाला
सरकार भले ही किसानों की आय दोगुनी करने के लिए धान व गेहूं का समर्थन मूल्य सही दे रही हो लेकिन सरकारी क्रय केंद्रों पर कागजी झंझटों से बचने के लिए किसान मजबूरी में आढ़तियों के ही यहां पहुंच रहे हैं। शासन ने इस बार धान का समर्थन मूल्य करीब 1750 व 1770 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। क्रय केंद्र में कभी धान गीला बता कर तो कई कागजी झंझटों से बचने के लिए आढ़ती के यहां किसान 1400 रुपये प्रति क्विंटल आसपास में धान बेच रहे हैं।
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कायमगंज प्रतिनिधि के अनुसार, घसिया चिलौली में एफसीआई के खुले धान क्रय केंद्र पर एक नवंबर से लेकर अब तक एक दाना धान नहीं खरीदा गया है। केंद्र पर किसान आते तो हैं लेकिन सिर्फ रेट लेकर चले जाते हैं। धान क्रय केंद्र के सहायक विपणन अधिकारी उपदेश कुमार का कहना है कि खाते में धान खरीद के लिए करीब 25 लाख रुपये मौजूद हैं और 1500 खाली पैकेट हैं। शासन के आदेश पर एक नवंबर से केंद्र खुल रहा है लेकिन कोई किसान धान लेकर नहीं आया है। वहीं, मंडी समिति में गल्ला आढ़तियों के यहां किसान धान लेकर पहुंच रहे हैं। आढ़ती 1380 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल में धान की खरीद भी कर रहे हैं। इसके साथ ही धान मिलों में भी धड़ल्ले से खरीद की जा रही है। यहां धान 1400 से 1420 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जा रहा है।
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एक आढ़ती ने बताया कि उनके यहां प्रति दिन दस से बीस क्विंटल धान बिकने के लिए आता है। उलियापुर के किसान सतेंद्र कुमार ने बताया कि नगर में धान क्रय केंद्र खुले तो हैं लेकिन जब धान लेकर जाओ तो वह धान गीला होने के साथ ही साथ अन्य कोई खामी निकालकर धान खरीदने में आनाकानी करते हैं। यहीं के रहने वाले रतन सिंह और सोबरन सिंह ने कहा कि धान क्रय केंद्रों पर कई अभिलेख मांगे जाते हैं, जिससे दिक्कत आती है। नसरुल्लापुर गांव के महेश का कहना है कि क्रय केंद्रों पर तमाम तरह के सवाल-जवाब से बचने के लिए मजबूरी में गल्ला आढ़तियों के यहां धान बेचना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि साठगांठ के खेल के चलते क्रय केंद्रों पर किसानों के आगे समस्याएं खड़ी की जाती हैं।
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