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टीले के स्वामित्व को लेकर 32 साल से चल रहा मुकदमा

Wed, 20 Oct 2021 11:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 11:51 PM IST
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Ownership lawsuit on the mound going on for 32 years
संकिसा में स्तूप के पास लगा पुरातत्व विभाग का बोर्ड। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। बौद्ध तीर्थस्थल पर पुरातत्व विभाग की संपत्ति बन चुके टीले को लेकर बौद्ध और सनातन धर्मियों में विवाद चला आ रहा है। सनातन धर्मी मां बिसारी देवी का प्राचीन स्थल और बौद्ध अनुयायी भगवान बुद्ध का स्वर्ग से अवतरण स्थल मान रहे हैं। स्वामित्व को लेकर करीब 32 सालों से अदालत में मुकदमा विचाराधीन है। स्वामित्व तय न हो पाने के चलते हर साल विवाद के हालात पैदा हो जाते हैं।
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संकिसा गांव के उत्तर दिशा में करीब आधा किमी दूर विवादित परिसर को पुरातत्व विभाग ने अधिग्रहीत कर रखा है। विवादित परिसर में स्थित टीले को बौद्ध अनुयायी स्तूप मानकर पूजा अर्चना करते हैं, जबकि सनातनधर्मी टीले पर विराजमान मां बिसारी देवी व अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाओं की पूजा करते हैं। बच्चों के मुंडन और गर्भवती
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महिलाओं के पुंसवन संस्कार भी होते हैं। इसके अलावा सनातन धर्मी कई धार्मिक अनुष्ठान भी करते हैं। यही नहीं कई दिन तक मेले का आयोजन भी किया जाता है। बौद्ध अनुयायी व सनातनधर्मी टीले पर अपना-अपना दावा ठोंक रहे हैं। इसको लेकर 32 वर्ष से न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन है।
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बुद्ध महोत्सव के संयोजक कर्मवीर शाक्य का मानना है कि तथागत गौतम बुद्ध अषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही श्रावस्ती के संघाराम में यमक प्रतिहार्य के बाद वर्षावास के पश्चात अश्विन पूर्णिमा के दिन 522 ईसा पूर्व संकाश्य (संकिसा) में पधारे थे। उस समय संकाश्य नगरी बौद्ध राजाओं की राजधानी थी। शाक्य राजा दीर्घशक्र का शासन था।
बौद्ध अनुयायी 1940 से संकिसा में प्रतिवर्ष विभिन्न नामों से बुद्ध महोत्सव का आयोजन करते आ रहे हैं।
सनातन धर्मियों की ओर से मां बिसारी देवी सेवा समिति न्यायालय में चल रहे मुकदमे की पैरवी अधिवक्ता अविनाश दीक्षित कर रहे हैं। समिति के अध्यक्ष आशुतोष दीक्षित ने बताया कि ऐतिहासिक सत्य है कि सांकश्य हिंदू राजा की राजधानी थी।

सनातनधर्मी आदि काल से मां बिसारी देवी को अपनी आराध्य देवी मानते चले आ रहे हैं। पूजा करने में किसी को भी रोका नहीं जा सकता, लेकिन मां बिसारी देवी व अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां हटाने की मांग करने वाले बेवजह विवाद बढ़ा रहे हैं। न्यायालय के आदेश का सभी को सम्मान करना चाहिए।
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