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शीतगृहों में आलू भंडारण 20 रुपये क्विंटल हुआ महंगा
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फर्रुखाबाद। शीतगृह में आलू भंडारण का शुल्क 15 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिया गया है। ये फैसला गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में डीएम की अध्यक्षता में हुई शीतगृह संचालकों की बैठक में लिया गया। अब किसानों को भंडारण के एवज में 220 रुपये प्रति क्विंटल देने होंगे।
जनपद में 93 शीतगृह संचालित हैं। इनमें आलू का भंडारण फरवरी के अंतिम सप्ताह तक शुरू हो जाएगा। अभी तक एक भी शीतगृह का नवीनीकरण नहीं नहीं हुआ है। दरअसल शासन ने अग्निशमन यंत्रों के मानक बढ़ा दिए हैं। नए मानकों का पालन करने पर शीतगृह संचालकों को भंडारण क्षमता के अनुसार सात से 10 लाख रुपये खर्च करने होंगे।
नए मानकों के अनुसार अग्निशमन यंत्र न लगाने के कारण शीतगृहों को एनओसी नहीं मिल पाई है। इसी के चलते डीएम मानवेंद्र सिंह ने शीतगृह संचालकों के साथ बैठक की। इसमें मुख्य अग्निशमन अधिकारी और आलू एवं शाकभाजी विकास अधिकारी आरएन वर्मा भी रहे। आलू एवं शाकभाजी विकास अधिकारी ने बताया कि भंडारण शुल्क में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
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सभी शीतगृहों में भंडारण रेट की सूची लगाने, मंडी समिति की निर्धारित दरों पर स्टाक का बीमा कराने और मार्च तक अग्निशमन विभाग से एनओसी लेने के निर्देश दिए। वर्मा ने बताया कि शीतगृह संचालकों को मार्च तक एनओसी लेने का शपथपत्र लिया जाएगा। आलू भंडारण के लिए शासन से अनुमति ली जाएगी। जो शीतगृह संचालक अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं लेंगे उनका लाइसेंस नवीनीकरण के साथ कार्रवाई की जाएगी।
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जनपद में 93 शीतगृह संचालित हैं। इनमें आलू का भंडारण फरवरी के अंतिम सप्ताह तक शुरू हो जाएगा। अभी तक एक भी शीतगृह का नवीनीकरण नहीं नहीं हुआ है। दरअसल शासन ने अग्निशमन यंत्रों के मानक बढ़ा दिए हैं। नए मानकों का पालन करने पर शीतगृह संचालकों को भंडारण क्षमता के अनुसार सात से 10 लाख रुपये खर्च करने होंगे।
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नए मानकों के अनुसार अग्निशमन यंत्र न लगाने के कारण शीतगृहों को एनओसी नहीं मिल पाई है। इसी के चलते डीएम मानवेंद्र सिंह ने शीतगृह संचालकों के साथ बैठक की। इसमें मुख्य अग्निशमन अधिकारी और आलू एवं शाकभाजी विकास अधिकारी आरएन वर्मा भी रहे। आलू एवं शाकभाजी विकास अधिकारी ने बताया कि भंडारण शुल्क में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
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सभी शीतगृहों में भंडारण रेट की सूची लगाने, मंडी समिति की निर्धारित दरों पर स्टाक का बीमा कराने और मार्च तक अग्निशमन विभाग से एनओसी लेने के निर्देश दिए। वर्मा ने बताया कि शीतगृह संचालकों को मार्च तक एनओसी लेने का शपथपत्र लिया जाएगा। आलू भंडारण के लिए शासन से अनुमति ली जाएगी। जो शीतगृह संचालक अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं लेंगे उनका लाइसेंस नवीनीकरण के साथ कार्रवाई की जाएगी।