फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   now dieseas are expanding in flood hit areas

गंगा का जलस्तर पांच सेमी घटा, बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कम नहीं

Sun, 08 Aug 2021 07:50 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 08 Aug 2021 07:50 PM IST
विज्ञापन
now dieseas are expanding in flood hit areas
अमृतपुर। गंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर घटने के बाद भी बाढ़ से पीड़ितों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। गांव व रास्तों पर पानी भरा होने से आवागमन बाधित है। प्रभावित कई गांवों में जलजनित बीमारियां भी फैलने लगी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी खानापूरी करके लौट जाती हैं। अभी तक बाढ़ पीड़ितों को सरकारी सहायता मिलनी शुरू नहीं हुई है।
विज्ञापन

पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते गंगा में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। हालांकि नरौरा बांध से लगातार दो दिन पानी कम छोड़े जाने से जलस्तर घटा है। रविवार को जलस्तर 136.85 से घटकर 136.80 मीटर पर पहुंच गया है। इसके बावजूद चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से 20 सेंटीमीटर ऊपर गंगा का जलस्तर है।
विज्ञापन

रविवार को नरौरा बांध से गंगा में 97 हजार 366 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलस्तर कम होने के बावजूद बाढ़ के पानी से घिरे गांव कंचनपुर सबलपुर, उदयपुर, आशा की मड़ैया, तीसराम की मड़ैया, अम्बरपुर की मड़ैया, ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, सुंदरपुर, जटपुरा कहिलियाई, माखन नागला, रामपुर, जोगराजपुर आदि में अभी भी पानी घरों व रास्तों पर भरा हुआ है। आने जाने का साधन न होने से घर में रोजमर्रा की वस्तुएं भी खत्म होने से दिक्कतें बढ़ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

किसी के घर में आटा खत्म हो गया तो किसी के यहां रोटी बनाने के लिए गैस व लकड़ी का इंतजाम नहीं है। तहसील प्रशासन ने अब तक बाढ़ पीड़ितों की चिंता नहीं है। गांव माखन नागल को जाने वाली कटी सड़क पर काफी मात्रा में पानी चल रहा है। एसडीएम ने नाव की व्यवस्था तक नहीं कराई। कई दिनों से गांव में पानी भरा होने से ग्रामीण जुकाम-बुखार आदि बीमारियों से भी घिरने लगे हैं। रामगंगा में खो हरेली ,रामनगर से 3434 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा का जलस्तर 134.40 से घटकर 134.35 मीटर पर पहुंच गया है।
कमालगंज। कटान से बेघर हुए बाढ़ पीड़ितों को अभी तक आवास के लिए भूमि नहीं मिली है। गांव कल्लूनगला निवासी मुन्नीदेवी पत्नी दुर्विजय के परिजनों ने मकान तोड़कर ईंटें सुरक्षित कर ली थीं। आवास वाली भूमि गंगा में समा गई। टूटी झोपड़ी बची है। रेणुका के प्रधानमंत्री आवास की जगह भी कटान में बह गई। गांव के महेंद्र, भूधर, चंद्रशेखर, रामविलास, हरिचंद्र के मकानों पर भी कटान का खतरा है। दुर्विजय ने कहा कि अभी तक ग्राम सभा की जमीन बाढ़ पीड़ितों को नहीं दी जा रही। शुक्रवार को लेखपाल व कानूनगो सहित समिति की बैठक में छह लोगों को भूमि देने का प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन नाप नहीं की जा रही है।

कामलागंज। बाढ़ प्रभावित कल्लूनगला, धारानगला, जंजाली नगला आदि गांवों में 15-20 दिन से बाढ़ का पानी भरा है। इससे अब जलजनित बीमारियां भी फैल रही है। गांव धारानगला व कल्लूनगला के ग्रामीणों ने कहा कि बुखार, खांसी की कई लोग परेशान हैं। खासकर बच्चों की तबियत खराब हो रही है। गांव में पानी भरने से मच्छर, कीड़ा भी पनप रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed