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Farrukhabad News: भरत-शत्रुघ्न के जयकारे लगा फूलों की वर्षा करते आ रहे मुस्लिम
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कमालगंज। धर्म के नाम पर होने वाली राजनीति को यहां की रामलीला आईना दिखाती है। भरत मिलाप की अनूठी लीला सामाजिक सौहार्द का भी संदेश देती है। हनुमान के साथ घुटनों के बल चलते-गिरते श्रीराम से मिलने जाते समय कमाल बाबा की मजार के पास मुस्लिम समाज के लोग भरत-शत्रुघ्न के जयकारे लगाकर उनपर पुष्प वर्षा करते हैं।
कमालगंज की रामलीला में भरत मिलाप की लीला गंगा-जमुनी तहजीब व आपसी भाईचारे की जीवंत मिसाल है। विजयदशमी के तीसरे दिन यहां भरत मिलाप होता है। कानपुर-फतेहगढ़ मार्ग स्थित चौराहे पर सड़क के बीचोबीच रात में भरत मिलाप लीला का मंच बनाया जाता है। लीला स्थल पर भव्य सजावट होती है। रात 11 बजे के करीब हनुमान जी, भरत-शत्रुघ्न के पास पहुंचकर उन्हें लंका विजय कर श्रीराम के अयोध्या लौटने की सूचना देते हैं।
दोनों भाई श्रीराम से मिलने के लिए फतेहगढ़ की ओर घुटनों के बल ही चल देते हैं। वहीं, कानपुर की ओर से प्रभु श्रीराम, अनुज लक्ष्मण व माता जानकी के साथ आते हैं। चौराहा स्थित स्टेज पर रात के ठीक 12 बजे श्रीराम और भरत सहित चारों भइयन की मिलाप लीला नयनों में बस जाती है।
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वर्षों पहले मुस्लिम समाज की ओर से पुष्प वर्षा की पड़ी थी परंपरा-
फोटो-13 मदन मोहन माहेश्वरी।
रामलीला कमेटी के पूर्व अध्यक्ष 77 वर्षीय मदन मोहन माहेश्वरी बताते हैं कि माहेश्वरी सदन में भरत-शत्रुघ्न को भोग व आरती का कार्यक्रम होता है। हनुमानजी के सूचना देने आने के बाद दोनों भाई श्रीराम से मिलाप के लिए निकल पड़ते हैं। उसी समय आगे बढ़ने पर थाने के पास कमाल बाबा की मजार के निकट मुस्लिम समाज के लोग भरत-शत्रुघ्न पर खड़े होकर जयकारों के साथ पुष्प वर्षा करते हैं। दोनों भाई कानपुर-फतेहगढ़ मार्ग की सड़क पर घुटनों के बल घिसटते हुए चलते हैं। दोनों ओर जमा भीड़ में बीचोबीच दो फीट के रास्ते से गुजरते समय श्रद्धालुओं की अपार भीड़ अपने हाथ उठाकर प्रभु का जयघोष करती है। आतिशबाजी की फुलझड़ियां व सतरंगी रोशनी से पूरा वातावरण श्रद्धा और भक्ति के आलोक में अलौकिक व अद्भुत बन जाता है। मुस्लिम समाज की ओर से पुष्प वर्षा की परंपरा वर्षों पहले शुरू हुई थी।
थाने के अंदर बरमदेव महाराज की आरती व दस्तारबंदी की रस्म
फोटो-14 मोहम्मद वसीम फार्रुखी।
मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष वसीम फार्रुखी ने बताया कि भरत मिलाप के मंच से चंद कदम की दूरी पर थाना परिसर में बरमदेव महाराज का पूजन होता है। मुस्लिम समाज के लोग प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी, रामलीला एवं उर्स कमेटी पदाधिकारियों की दस्तारबंदी करते हैं। इसके बाद अधिकारी व दोनों कमेटी से जुड़े पदाधिकारी परंपरागत तरीके से चादर लेकर थाने के बाहर स्थित कमाल बाबा की मजार पर आकर चादरपोशी की रस्म करते हैं। कव्वाली मंच से भरत-शत्रुघ्न के निकलते समय श्रद्धा व आदर से सभी लोग खड़े होकर उनपर पुष्प बरसाते हैं। यहां की भरत मिलाप लीला एकता व सौहार्द के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। दोनों समुदाय मिलजुलकर भरत मिलाप मनाते हैं। सालभर लीला का इंतजार रहता है। (संवाद)
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कमालगंज की रामलीला में भरत मिलाप की लीला गंगा-जमुनी तहजीब व आपसी भाईचारे की जीवंत मिसाल है। विजयदशमी के तीसरे दिन यहां भरत मिलाप होता है। कानपुर-फतेहगढ़ मार्ग स्थित चौराहे पर सड़क के बीचोबीच रात में भरत मिलाप लीला का मंच बनाया जाता है। लीला स्थल पर भव्य सजावट होती है। रात 11 बजे के करीब हनुमान जी, भरत-शत्रुघ्न के पास पहुंचकर उन्हें लंका विजय कर श्रीराम के अयोध्या लौटने की सूचना देते हैं।
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दोनों भाई श्रीराम से मिलने के लिए फतेहगढ़ की ओर घुटनों के बल ही चल देते हैं। वहीं, कानपुर की ओर से प्रभु श्रीराम, अनुज लक्ष्मण व माता जानकी के साथ आते हैं। चौराहा स्थित स्टेज पर रात के ठीक 12 बजे श्रीराम और भरत सहित चारों भइयन की मिलाप लीला नयनों में बस जाती है।
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वर्षों पहले मुस्लिम समाज की ओर से पुष्प वर्षा की पड़ी थी परंपरा-
फोटो-13 मदन मोहन माहेश्वरी।
रामलीला कमेटी के पूर्व अध्यक्ष 77 वर्षीय मदन मोहन माहेश्वरी बताते हैं कि माहेश्वरी सदन में भरत-शत्रुघ्न को भोग व आरती का कार्यक्रम होता है। हनुमानजी के सूचना देने आने के बाद दोनों भाई श्रीराम से मिलाप के लिए निकल पड़ते हैं। उसी समय आगे बढ़ने पर थाने के पास कमाल बाबा की मजार के निकट मुस्लिम समाज के लोग भरत-शत्रुघ्न पर खड़े होकर जयकारों के साथ पुष्प वर्षा करते हैं। दोनों भाई कानपुर-फतेहगढ़ मार्ग की सड़क पर घुटनों के बल घिसटते हुए चलते हैं। दोनों ओर जमा भीड़ में बीचोबीच दो फीट के रास्ते से गुजरते समय श्रद्धालुओं की अपार भीड़ अपने हाथ उठाकर प्रभु का जयघोष करती है। आतिशबाजी की फुलझड़ियां व सतरंगी रोशनी से पूरा वातावरण श्रद्धा और भक्ति के आलोक में अलौकिक व अद्भुत बन जाता है। मुस्लिम समाज की ओर से पुष्प वर्षा की परंपरा वर्षों पहले शुरू हुई थी।
थाने के अंदर बरमदेव महाराज की आरती व दस्तारबंदी की रस्म
फोटो-14 मोहम्मद वसीम फार्रुखी।
मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष वसीम फार्रुखी ने बताया कि भरत मिलाप के मंच से चंद कदम की दूरी पर थाना परिसर में बरमदेव महाराज का पूजन होता है। मुस्लिम समाज के लोग प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी, रामलीला एवं उर्स कमेटी पदाधिकारियों की दस्तारबंदी करते हैं। इसके बाद अधिकारी व दोनों कमेटी से जुड़े पदाधिकारी परंपरागत तरीके से चादर लेकर थाने के बाहर स्थित कमाल बाबा की मजार पर आकर चादरपोशी की रस्म करते हैं। कव्वाली मंच से भरत-शत्रुघ्न के निकलते समय श्रद्धा व आदर से सभी लोग खड़े होकर उनपर पुष्प बरसाते हैं। यहां की भरत मिलाप लीला एकता व सौहार्द के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। दोनों समुदाय मिलजुलकर भरत मिलाप मनाते हैं। सालभर लीला का इंतजार रहता है। (संवाद)