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गो सदन से गायब गायें, बछड़ों की होगी जांच
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Wed, 14 Jun 2017 11:56 PM IST
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राजकीय गो सदन कटरी धर्मपुर से गायब तीन गायें और छह बछड़ों की जांच जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने एसडीएम सदर को सौंपी है। उन्होंने एसडीएम सदर से इस संबंध में आख्या मांगी है। प्रबंधक प्रदीप श्रीवास्तव गोवंश किसे दिए गए, इसका कोई लेखाजोखा नहीं दे पा रहे हैं।
आटा फार्म जालौन से भेजे गए छह बछड़े और गो सदन में पहले से मौजूद तीन गायें एकाएक गायब हो गईं।
इस संबंध में प्रधान धर्मवीर राजपूत का कहना है कि गो सदन की भूमि पर अवैध कब्जा कराने और गो सदन में मौजूद गोवंश को गायब करने का खेल बहुत पहले से चल रहा है। इसी खेल के चलते 400 बीघा भूमि पर पर सेवानिवृत्त प्रबंधक प्रमोद सक्सेना ने कब्जा करा दिया था। जिलाधिकारी के दबाव और अमर उजाला के अभियान से भूमि को कब्जा मुक्त करा दिया गया है लेकिन मौजूदा प्रबंधक फिर उस भूमि को रुपये लेकर उन्हें देना चाहते हैं।
प्रधान का आरोप है कि बछड़ों को प्रबंधक ने बेच दिया है। भूमि पर लोगों को कब्जा देने के फिर प्रयास किए जा रहे हैं। 1000 बीघा भूमि होने के बाद भी यहां असहाय गोवंश के नाम पर मात्र सात गायें और तीन बछड़े बचे हैं। इनके लिए हरे चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। गांववालों का कहना है कि गो सदन की भूमि पर फसल उगाने के नाम पर प्रबंधक हाथ खड़े कर देते हैं।
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उधर, प्रबंधक प्रदीप श्रीवास्तव का कहना है कि उनके पास रिकॉर्ड है लेकिन अभी वह रिकॉर्ड दिखाने में असमर्थ हैं। उन पर लगाए गए सारे आरोप झूठे हैं।
बोले जिम्मेदार
गो सदन में चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद सृजित हैं। इनमें एक की भी तैनाती नहीं है। ऐसे में गोवंश की देखरेख कौन करे ? इस वजह से गो सदन में गोवंश को प्रबंधक नहीं रख पा रहे हैं। प्रबंधक गोवंश का चारा-पानी नहीं कर सकते। फिलहाल शासन से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त किए जाने की मांग की गई है।
- डॉ. पुष्प कुमार (मुख्य पशु चिकित्साधिकारी)
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आटा फार्म जालौन से भेजे गए छह बछड़े और गो सदन में पहले से मौजूद तीन गायें एकाएक गायब हो गईं।
इस संबंध में प्रधान धर्मवीर राजपूत का कहना है कि गो सदन की भूमि पर अवैध कब्जा कराने और गो सदन में मौजूद गोवंश को गायब करने का खेल बहुत पहले से चल रहा है। इसी खेल के चलते 400 बीघा भूमि पर पर सेवानिवृत्त प्रबंधक प्रमोद सक्सेना ने कब्जा करा दिया था। जिलाधिकारी के दबाव और अमर उजाला के अभियान से भूमि को कब्जा मुक्त करा दिया गया है लेकिन मौजूदा प्रबंधक फिर उस भूमि को रुपये लेकर उन्हें देना चाहते हैं।
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प्रधान का आरोप है कि बछड़ों को प्रबंधक ने बेच दिया है। भूमि पर लोगों को कब्जा देने के फिर प्रयास किए जा रहे हैं। 1000 बीघा भूमि होने के बाद भी यहां असहाय गोवंश के नाम पर मात्र सात गायें और तीन बछड़े बचे हैं। इनके लिए हरे चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। गांववालों का कहना है कि गो सदन की भूमि पर फसल उगाने के नाम पर प्रबंधक हाथ खड़े कर देते हैं।
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उधर, प्रबंधक प्रदीप श्रीवास्तव का कहना है कि उनके पास रिकॉर्ड है लेकिन अभी वह रिकॉर्ड दिखाने में असमर्थ हैं। उन पर लगाए गए सारे आरोप झूठे हैं।
बोले जिम्मेदार
गो सदन में चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद सृजित हैं। इनमें एक की भी तैनाती नहीं है। ऐसे में गोवंश की देखरेख कौन करे ? इस वजह से गो सदन में गोवंश को प्रबंधक नहीं रख पा रहे हैं। प्रबंधक गोवंश का चारा-पानी नहीं कर सकते। फिलहाल शासन से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त किए जाने की मांग की गई है।
- डॉ. पुष्प कुमार (मुख्य पशु चिकित्साधिकारी)