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लुटेरे बाइक पर मस्त, सिपाही साइकिल से कर रहे गश्त

Sat, 17 Sep 2016 11:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद Updated Sat, 17 Sep 2016 11:05 PM IST
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Mast robbers on bikes, bicycles are soldiers patrolling
कोतवाली की जर्जर बैरक में टूटी पड़ी चारपाई। - फोटो : अमर उजाला
21वीं सदी में पुलिस का ढर्रा पहले से बद्तर हो गया है। लुटेरे फर्राटा भरती बाइकों से घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। वहीं लूट की घटनाओं को रोकने के लिए सिपाही साइकिल से गश्त कर रहे हैं। अंग्रेजों के जमाने की राइफलें इन सिपाहियों पर लाद दी जाती हैं, जो वक्त पर दगा दे जाती हैं।
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विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को मलाल है कि अनुशासित महकमा होने के कारण वह अव्यवस्थाओं के खिलाफ अपना मुंह नहीं खोल सकते हैं। उनका कहना है कि मऊदरवाजा थाने को छोड़कर किसी भी थाने में पुलिसकर्मियों के रहने के लिए फैमिली क्वार्टर नहीं हैं। सामूहिक निवास के लिए बैरक बनी हुई है। कैदियों की तरह वह ड्यूटी से आकर उसमें सो जाते हैं।
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उसी बैरक में सभी लोगों के ओढ़ने-बिछाने और कपड़े और खाने-पीने का सामान रखना पड़ता है। कंडम बैरकों में रहकर वह जान जोखिम में डाल रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ब्रिटिश काल में पुलिस को मसकट और थ्रीनाटथ्री की भारीभरकम राइफलें मुहैया कराई गई थीं। आज भी उन पर ड्यूटी के समय वही राइफलें लाद दी जाती हैं। वक्त पर यह राइफलें दगा दे जाती हैं। गौरतलब है कि आए दिन जिले में बाइक सवार लुटेरे अपाचे मोटरसाइकिल से घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और सिपाही इन लूट की घटनाओं को रोकने के लिए साइकिल से गश्त कर रहे हैं
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। अपराधियों के पास तेज गति से दौड़ने वाली लग्जरी गाड़ियां हैं और थानों में 21वीं सदी में बदमाशों का पीछा करने के लिए बोलेरो जीप उपलब्ध कराई गई है। सिपाहियों को मलाल है कि ब्रिटिश काल में साइकिल की मरम्मत के लिए 50 रुपये मासिक भत्ता मिलता था। उन्हें आज भी वही 50 रुपये साइकिल भत्ता ही मिल रहा है। पेट्रोल के नाम पर एक धेला नहीं दिया जा रहा है।

उनका कहना है कि यह व्यवस्था केवल फर्रुखाबाद में नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की है। जिले के 13 थानों में 19 मोटरसाइकिलें मौजूद थीं, जो कंडम हो गई हैं। इनमें 15 मोटरसाइकिलों को नीलाम भी कर दिया गया। इसके बावजूद अभी तक एक भी बाइक गश्त करने के लिए मोबाइल पर रहने वाले सिपाहियों को उपलब्ध नहीं कराई गई है।

प्रत्येक थाने पर फर्स्ट-एड बाक्स मौजूद रहता हैं लेकिन सिपाहियों और मुंशियों को इस किट के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। जिन थानों में किट मौजूद है। उनमें रखी गाज, पट्टी और एंटी सैप्टिक दवाइयां एक्सपायर हो चुकी हैं। इनका उपयोग करने से घायल या रोगी अन्य बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।


थानों को जिला मुख्यालय से कंप्यूटर से तो जोड़ दिया गया है और ऑनलाइन शिकायत करने की भी सुविधा दर्ज करा दी गई है लेकिन सिपाहियों और दरोगाओं को ऑनलाइन शिकायत की जानकारी नहीं मिल रही है। इसके लिए उनके पास मोबाइल नहीं हैं। आज भी देशी पुलिस चौकी दीनापुर की तरह कोई घटना हो जाने पर थानों को वायरलेस से पुकारा जा रहा है।

 
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