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Farrukhabad News: विवाहिता ने मासूम संग फंदा लगाकर दी जान
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फर्रुखाबाद। शहर में एक विवाहिता ने आठ माह के मासूम संग फंदा लगाकर जान दे दी। उनके शव साड़ी के दोनों तरफ कमरे में लटके मिले। शवों को उतारकर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने पति को हिरासत में ले लिया है। मायके वालों को घटना की जानकारी दी गई है।
मऊदरवाजा थाने के मोहल्ला श्यामनगर निवासी अखिलेश राजपूत बेवर रोड पर समोसा बेचते हैं। घर में पत्नी आकांक्षा (24), आठ माह के पुत्र दिव्यांश के साथ रहती थी। ठीक सामने दूसरे मकान में जेठ पंकज व पत्नी सुनीता के साथ रहते हैं। कुछ दूरी पर बने तीसरे मकान में सास माया देवी सबसे बड़े पुत्र होरीलाल के साथ रहती हैं।
रविवार दोपहर माया देवी खाना खाने आकांक्षा के घर आई। मुख्य गेट पर कुंडी न होने से रस्सी बंधी थी। काफी देर तक आवाज लगाने पर दरवाजा न खुलने पर उसने सुनीता और मंदिर के पास समोसा बेच रहे पंकज को बुलाया। रस्सी काटकर अंदर देखा, तो कमरे में पंखे के सहारे साड़ी के एक छोर पर आकांक्षा और दूसरे पर दिव्यांश लटका था। इसी दौरान पति अखिलेश भी पहुंच गया। परिजनों ने जीवित होने की आशंका से दोनों को उतार लिया।
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इसके बाद अखिलेश पुलिस को सूचना देने थाने गया। पुलिस ने उसे वहीं बैठा लिया। थानाध्यक्ष विनोद शुक्ला ने फाेरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जांच की। सीओ सिटी प्रदीप कुमार सिंह ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। घटना की सूचना आकांक्षा के मायके कानपुर के थाना सुजानपुर के गांव शिवली में दे दी गई है।
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आकांक्षा ने जिठानी के फोन से एक बार की बात
आकांक्षा के मकान के सामने दूसरे मकान में रह रही जिठानी सुनीता से अच्छे संबंध थे। उसके पास फोन न होने से वह जरूरत होने पर जिठानी के फोन से बात कर लेती थी। रविवार दोपहर आकांक्षा ने सुनीता का दोपहर करीब 12 बजे फोन लिया। छत पर जाकर बातचीत की। करीब एक बजे फोन आया, तो उसे रिसीव भी किया। सुनीता ने बताया कि फोन में दर्ज दोनों बार के नंबर आकांक्षा से संबंधित हैं। पुलिस ने फोन कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
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सुनीता के मोबाइल की जांच में खुल सकता है आत्महत्या का राज
पुलिस का मानना है कि सुनीता का मोबाइल इस आत्महत्या के राज से पर्दा हटा सकता है। दरअसल, आकांक्षा ने जिस व्यक्ति से बात की, हो सकता है कि उससे कुछ ऐसा हुआ हो, जिसकी वजह से आत्मघाती कदम उठा लिया हो। यही नहीं पुलिस को शक है कि मौत का कारण घरेलू भी हो सकती है। इंस्पेक्टर विनोद शुक्ला ने बताया कि कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
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सास किसी भी बहू के यहां खा लेती थी खाना
आकांक्षा की सास माया देवी ने बताया कि वह बेटे होरीलाल के साथ रहती थीं, मगर सभी बहुएं उन्हें काफी प्यार करती थीं। लिहाजा वह किसी के यहां भी खाना खा लेती थीं। रविवार को बकरी चराने के बाद वह आकांक्षा के यहां खाना खाने पहुंची थीं। उन्हें क्या पता था कि बहू उन्हें जीवित नहीं मिलेगी।
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मऊदरवाजा थाने के मोहल्ला श्यामनगर निवासी अखिलेश राजपूत बेवर रोड पर समोसा बेचते हैं। घर में पत्नी आकांक्षा (24), आठ माह के पुत्र दिव्यांश के साथ रहती थी। ठीक सामने दूसरे मकान में जेठ पंकज व पत्नी सुनीता के साथ रहते हैं। कुछ दूरी पर बने तीसरे मकान में सास माया देवी सबसे बड़े पुत्र होरीलाल के साथ रहती हैं।
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रविवार दोपहर माया देवी खाना खाने आकांक्षा के घर आई। मुख्य गेट पर कुंडी न होने से रस्सी बंधी थी। काफी देर तक आवाज लगाने पर दरवाजा न खुलने पर उसने सुनीता और मंदिर के पास समोसा बेच रहे पंकज को बुलाया। रस्सी काटकर अंदर देखा, तो कमरे में पंखे के सहारे साड़ी के एक छोर पर आकांक्षा और दूसरे पर दिव्यांश लटका था। इसी दौरान पति अखिलेश भी पहुंच गया। परिजनों ने जीवित होने की आशंका से दोनों को उतार लिया।
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इसके बाद अखिलेश पुलिस को सूचना देने थाने गया। पुलिस ने उसे वहीं बैठा लिया। थानाध्यक्ष विनोद शुक्ला ने फाेरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जांच की। सीओ सिटी प्रदीप कुमार सिंह ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। घटना की सूचना आकांक्षा के मायके कानपुर के थाना सुजानपुर के गांव शिवली में दे दी गई है।
आकांक्षा ने जिठानी के फोन से एक बार की बात
आकांक्षा के मकान के सामने दूसरे मकान में रह रही जिठानी सुनीता से अच्छे संबंध थे। उसके पास फोन न होने से वह जरूरत होने पर जिठानी के फोन से बात कर लेती थी। रविवार दोपहर आकांक्षा ने सुनीता का दोपहर करीब 12 बजे फोन लिया। छत पर जाकर बातचीत की। करीब एक बजे फोन आया, तो उसे रिसीव भी किया। सुनीता ने बताया कि फोन में दर्ज दोनों बार के नंबर आकांक्षा से संबंधित हैं। पुलिस ने फोन कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
सुनीता के मोबाइल की जांच में खुल सकता है आत्महत्या का राज
पुलिस का मानना है कि सुनीता का मोबाइल इस आत्महत्या के राज से पर्दा हटा सकता है। दरअसल, आकांक्षा ने जिस व्यक्ति से बात की, हो सकता है कि उससे कुछ ऐसा हुआ हो, जिसकी वजह से आत्मघाती कदम उठा लिया हो। यही नहीं पुलिस को शक है कि मौत का कारण घरेलू भी हो सकती है। इंस्पेक्टर विनोद शुक्ला ने बताया कि कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
सास किसी भी बहू के यहां खा लेती थी खाना
आकांक्षा की सास माया देवी ने बताया कि वह बेटे होरीलाल के साथ रहती थीं, मगर सभी बहुएं उन्हें काफी प्यार करती थीं। लिहाजा वह किसी के यहां भी खाना खा लेती थीं। रविवार को बकरी चराने के बाद वह आकांक्षा के यहां खाना खाने पहुंची थीं। उन्हें क्या पता था कि बहू उन्हें जीवित नहीं मिलेगी।