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Farrukhabad News: हथगोला फेंकने के 27 साल पुराने मामले में एक को दो माह की सजा
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हरदोई। खतरनाक हथियार से जानबूझकर चोट पहुंचाने के लगभग 27 साल पुराने मामले में दोषी करार दिया गया है। सिविल जज जूनियर डिवीजन विशाल दीक्षित ने अभियुक्त को दो माह की सजा सुनाई। अभियुक्त पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
अतरौली थाना क्षेत्र के रग्घाखेड़ा मजरा बहुती निवासी नासिर अली ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि आठ मार्च 1999 को रात करीब नौ बजे संडीला कोतवाली क्षेत्र के काजीखेड़ा निवासी अरबी ने दो अज्ञात साथियों के साथ उसके घर में हथगोला फेंक दिया था। हथगोला दगने से उसके पुत्र अलीशेर व बहू के पैर में चोट आई थी। आवाज सुनकर मकान के पीछे देखने गया था। उसको आता देख अरबी अपने साथियों के साथ भाग गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अरबी व उसके दो अज्ञात साथियों पर प्राथमिकी दर्ज की थी। गंभीर चोट पहुंचाने का आरोप था।
विवेचना के बाद पांच मई 1999 को अरबी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। अरबी के दो अज्ञात साथियों के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया था। न्यायालय में दस जनवरी 2002 को अरबी के खिलाफ आरोप तय हो गए थे। अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों को पेश किया गया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर सिविल जज विशाल दीक्षित ने सजा सुनाई।
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अतरौली थाना क्षेत्र के रग्घाखेड़ा मजरा बहुती निवासी नासिर अली ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बताया था कि आठ मार्च 1999 को रात करीब नौ बजे संडीला कोतवाली क्षेत्र के काजीखेड़ा निवासी अरबी ने दो अज्ञात साथियों के साथ उसके घर में हथगोला फेंक दिया था। हथगोला दगने से उसके पुत्र अलीशेर व बहू के पैर में चोट आई थी। आवाज सुनकर मकान के पीछे देखने गया था। उसको आता देख अरबी अपने साथियों के साथ भाग गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अरबी व उसके दो अज्ञात साथियों पर प्राथमिकी दर्ज की थी। गंभीर चोट पहुंचाने का आरोप था।
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विवेचना के बाद पांच मई 1999 को अरबी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। अरबी के दो अज्ञात साथियों के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया था। न्यायालय में दस जनवरी 2002 को अरबी के खिलाफ आरोप तय हो गए थे। अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों को पेश किया गया। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर सिविल जज विशाल दीक्षित ने सजा सुनाई।
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