{"_id":"64c156701f66bc569b00b5b9","slug":"look-at-karbala-who-came-to-save-islam-farrukhabad-news-c-222-1-frk1001-1114-2023-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: कर्बला देख लो इस्लाम को बचाने के लिए कौन आया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: कर्बला देख लो इस्लाम को बचाने के लिए कौन आया
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। कर्बला में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 जानिसारों की याद में शिया मुस्लिम गमजदा माहौल में हाथों में अलम परचम लेकर निकले। उनकी जुबान पर एक ही नोहा था- यह देखो खून से टपकता हजरत अब्बास का परचम आया, कर्बला देख लो इस्लाम को बचाने के लिए कौन आया हजरत अब्बास का खून से टपकता हुआ अलम आया, सुनते ही हर किसी की आंखों से आंसू टपकने लगे।
बुधवार को ठंडी सड़क दरगाह जैनविया से अजादार हजरत अब्बास का परचम लेकर निकले, तो पीछे पीछे चल रही शिया मुस्लिम महिलाएं अपने सिर पर नन्हे अली असगर का झूला लेकर चली, तो नजारा देख कर माहौल गमगीन हो गया। हजरत इमाम हुसैन के सैदाई कर्बला के मैदान में नन्हे अली असगर की शहादत की याद में डूबे नजर आए। उन्होंने मौला अली की सदाएं बुलंद कीं। अलम जुलूस दरगाह जैनविया से उठकर घेर शामू खां स्थित सैयद आफताब के आवास पर पहुंचा। वहां पर मरसिए पढ़कर मातम किया गया। उसके बाद औद्योगिक क्षेत्र होकर अपने स्थान दरगाह पर पहुंचा।
इसमें शिया धर्मगुरु मौलाना फरहत अली जैदी, सैयद आफताब हुसैन, असलम ईरानी, वसीम ईरानी, एजाज ईरानी, शाहिद हुसैन, शाविल हुसैन, सलमान हुसैन, मुंतजिर हुसैन, सूफी पप्पन मियां, मेराज हुसैन, नफीस हुसैन, अम्बर अली आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
जुलूस में लुटाया गया लंगर
सात मोहर्रम को खटकपुरा स्थित इश्तियाक हुसैन इमामबाड़े से बुधवार सुबह आठ बजे अलम जुलूस उठाया गया। रास्ते में कई स्थानों पर लोगों ने लंगर लुटाया। अलम जुलूस की जियारत करने के लिए छतों पर महिलाएं, छोटे बच्चे डटे रहे। युवा जुलूस में साथ चल रहे थे। घरों से महिलाओं ने लंगर लुटाया। अलम जुलूस खटकपुरा से होता हुआ घेर शामू खां, बूरा वाली गली, मदारबाड़ी, बजरिया, भाऊटोला, रकाबगंज, भीकमपुरा, शमशेर खानी पक्कापुल चौक होता हुआ देर रात पुनः अपने स्थान पर पहुंचा। अलम जुलूस में पुलिस का सख्त पहरा रहा।
सात मोहर्रम को मजलिसों में देर रात तक टपके आंसू
शिया मुसलमानों के लिए सात मोहर्रम का दिन बहुत ही गमजदा रहा। मौलाना फरहत अली जैदी ने मजलिस में कहा कि सात मोहर्रम को ही यजीदी फौज ने दरिया के पानी पर पहरा लगा दिया था और नन्हे अली असगर कर्बला के मैदान में प्यासे ही शहीद हो गए। इतना सुनते ही वहां मौजूद अजादर नन्हे अली असगर को याद कर रोने लगे। कटरा बक्शी इमामबाड़े में लखनऊ के मौलाना तनवीर अब्बास ने मजलिस पढ़ी। कहा कि ना हम शिया हैं और न सुन्नी बल्कि हम सब इस्लाम के मानने वाले हैं और यही पैगाम हजरत इमाम हुसैन ने भी दिया है।
शिया धर्मगुरु मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली मजलिस में कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में शहीद होकर दीन की शमा को हमेशा के लिए रोशन कर दिया।
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। कर्बला में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 जानिसारों की याद में शिया मुस्लिम गमजदा माहौल में हाथों में अलम परचम लेकर निकले। उनकी जुबान पर एक ही नोहा था- यह देखो खून से टपकता हजरत अब्बास का परचम आया, कर्बला देख लो इस्लाम को बचाने के लिए कौन आया हजरत अब्बास का खून से टपकता हुआ अलम आया, सुनते ही हर किसी की आंखों से आंसू टपकने लगे।
बुधवार को ठंडी सड़क दरगाह जैनविया से अजादार हजरत अब्बास का परचम लेकर निकले, तो पीछे पीछे चल रही शिया मुस्लिम महिलाएं अपने सिर पर नन्हे अली असगर का झूला लेकर चली, तो नजारा देख कर माहौल गमगीन हो गया। हजरत इमाम हुसैन के सैदाई कर्बला के मैदान में नन्हे अली असगर की शहादत की याद में डूबे नजर आए। उन्होंने मौला अली की सदाएं बुलंद कीं। अलम जुलूस दरगाह जैनविया से उठकर घेर शामू खां स्थित सैयद आफताब के आवास पर पहुंचा। वहां पर मरसिए पढ़कर मातम किया गया। उसके बाद औद्योगिक क्षेत्र होकर अपने स्थान दरगाह पर पहुंचा।
विज्ञापन
इसमें शिया धर्मगुरु मौलाना फरहत अली जैदी, सैयद आफताब हुसैन, असलम ईरानी, वसीम ईरानी, एजाज ईरानी, शाहिद हुसैन, शाविल हुसैन, सलमान हुसैन, मुंतजिर हुसैन, सूफी पप्पन मियां, मेराज हुसैन, नफीस हुसैन, अम्बर अली आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
जुलूस में लुटाया गया लंगर
सात मोहर्रम को खटकपुरा स्थित इश्तियाक हुसैन इमामबाड़े से बुधवार सुबह आठ बजे अलम जुलूस उठाया गया। रास्ते में कई स्थानों पर लोगों ने लंगर लुटाया। अलम जुलूस की जियारत करने के लिए छतों पर महिलाएं, छोटे बच्चे डटे रहे। युवा जुलूस में साथ चल रहे थे। घरों से महिलाओं ने लंगर लुटाया। अलम जुलूस खटकपुरा से होता हुआ घेर शामू खां, बूरा वाली गली, मदारबाड़ी, बजरिया, भाऊटोला, रकाबगंज, भीकमपुरा, शमशेर खानी पक्कापुल चौक होता हुआ देर रात पुनः अपने स्थान पर पहुंचा। अलम जुलूस में पुलिस का सख्त पहरा रहा।
सात मोहर्रम को मजलिसों में देर रात तक टपके आंसू
शिया मुसलमानों के लिए सात मोहर्रम का दिन बहुत ही गमजदा रहा। मौलाना फरहत अली जैदी ने मजलिस में कहा कि सात मोहर्रम को ही यजीदी फौज ने दरिया के पानी पर पहरा लगा दिया था और नन्हे अली असगर कर्बला के मैदान में प्यासे ही शहीद हो गए। इतना सुनते ही वहां मौजूद अजादर नन्हे अली असगर को याद कर रोने लगे। कटरा बक्शी इमामबाड़े में लखनऊ के मौलाना तनवीर अब्बास ने मजलिस पढ़ी। कहा कि ना हम शिया हैं और न सुन्नी बल्कि हम सब इस्लाम के मानने वाले हैं और यही पैगाम हजरत इमाम हुसैन ने भी दिया है।
शिया धर्मगुरु मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली मजलिस में कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में शहीद होकर दीन की शमा को हमेशा के लिए रोशन कर दिया।