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210 बेड के अस्पताल में सिर्फ 10 डॉक्टर

Tue, 14 Jun 2022 11:09 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jun 2022 11:09 PM IST
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लोहिया अस्पताल की ओपीडी में पर्चा काउंटर पर लगी लाइन। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। 210 बेड वाला डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। 30 साल पुराने मानकों पर चल रहे अस्पताल में सिर्फ 10 डॉक्टर ही तैनात हैं। सर्जन, चेस्ट फिजीशियन, स्किन और ईएनटी सर्जन नहीं हैं।
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फिजीशियन, बालरोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट के सृजित दो-दो पदों की बजाय एक-एक ही तैनात हैं। ओपीडी में औसतन रोजाना 600 मरीज आ रहे हैं। ऐसे में इनका इलाज कितना अच्छा हो रहा होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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लोहिया पुरुष अस्पताल में पदों का सृजन 30 साल पहले किया गया था। उस वक्त के मानक के अनुसार, अस्पताल में कुल 29 डॉक्टरों की तैनानी होनी चाहिए, जबकि मात्र 10 डॉक्टर ही तैनात है। अस्पताल में 19 डॉक्टरों की कमी चल रही है।
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अस्पताल में शुुरुआती दौर में 110 बेड थे, जो अब बढ़कर 210 हो गए हैं। यही नहीं डॉक्टरों की कमी के चलते ओपीडी में मरीजों की संख्या भी तेजी से घटी है। अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि जब अधिकांश डॉक्टरों की तैनाती थी, तब ओपीडी में रोजाना एक हजार मरीज आते थे, मगर अब इनकी संख्या घटकर औसतन 600 ही रह गई है।
सात जिलों के आते हैं मरीज
अस्पताल में स्थानीय के अलावा सीमावर्ती कन्नौज, मैनपुरी, एटा, कासगंज, बदायूं, शाहजहांपुर व हरदोई के मरीज भी आते हैं। दुर्घटना के बाद इन जिलों से घायलों को भी यहीं लाया जाता है, मगर डॉक्टरों की कमी के चलते सही इलाज नहीं मिल पा रहा है।
ज्वाइनिंग के बाद नहीं आए बालरोग विशेषज्ञ
शासन ने करीब पांच माह पहले बालरोग विशेषज्ञ डॉ. हरेंद्र सिंह चौहान को तैनात किया था। वह अस्पताल में आए और ज्वाइन करने के बाद चले गए। करीब 20 दिन पहले अस्पताल में दिखाई दिए, मगर मरीजों को नहीं देखा। इसके बाद दोबारा नहीं लौटे। इससे ओपीडी में बच्चों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।
एक आर्थो सर्जन के पास कई जिम्मेदारी
अस्पताल में तैनात रहे आर्थो सर्जन डॉ. योगेंद्र मिश्रा को सेवानिवृत्त सीएमओ सतीश चंद्र ने अंतिम दिन मूल तैनाती स्थल कमालगंज सीएचसी भेज दिया, जबकि अस्पताल में आर्थो के एक मात्र संविदा डॉक्टर रिषिकांत वर्मा ही रह गए।

उनके ऊपर ओपीडी, ऑपरेशन, इमरजेंसी, वीआईपी ड्यूटी और दिव्यांग कैंप की जिम्मेदारी रहती है। इससे आए दिन ओपीडी में मरीज भटकने के लिए मजबूर हैं। इसके अलावा अस्पताल में चार ईएमओ के पद सृजित हैं, मगर तैनाती एक की भी नहीं है। ऐसे में इमरजेंसी की व्यवस्थाएं भी ओपीडी के डॉक्टरों की मदद से चलती हैं।
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