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Farrukhabad News: दो भाइयों सहित तीन दोषियों को उम्रकैद
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संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। संबंधों के शक में ग्रामीण की हत्या में विशेष न्यायाधीश ईसीएक्ट राकेश कुमार ने दो भाइयों सहित तीन को दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों दोषियों पर 3.40 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड में तीन लाख रुपये मृतक के परिजनों को देने के आदेश दिए।
मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव रशीदपुर निवासी किशनलाल वर्मा ने गांव के पिंटू, भाई रिंकू, आशिक व अनिल के खिलाफ 15 अक्तूबर 2017 को मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप लगाया कि भाई संतोष के पिंटू के चाचा जगवीर से गहरे संबंध थे। संतोष जगवीर व उसकी पत्नी ममता से मिलने उसके घर आता जाता था। संतोष जगवीर व उसकी पत्नी की रुपये पैसे से मदद करता था। जगवीर के भतीजे चाची से संबंध के शक में संतोष के घर आने का विरोध करते थे। जानकारी होने पर संतोष ने उनके घर आना-जाना बंद कर दिया था।
15 अक्तूबर को भाई संतोष बहन कृष्णा के साथ हथियापुर से बाजार करके वापस आ रहा था। रास्ते में पिंटू, रिंकू, आशिक व अनिल ने भाई संतोष को रोक लिया। सभी गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर इन लोगों ने हसिया से काटकर भाई संतोष की हत्या कर दी। बहन कृष्णा वहां से भागकर घर आई। उसने पूरे मामले की जानकारी दी। विवेचक ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। आशिक की फाइल मुकदमे से अलग कर दी गई। मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने शुक्रवार को गवाह व साक्ष्य के आधार पर भाई पिंटू, रिंकू व अनिल को दोषी करार किया था।
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शनिवार को न्यायाधीश ने पिंटू रिंकू व अनिल को उम्रकैद की सजा सुनाई। तीनों दोषियों को 3.40 लाख रुपये अर्थदंड जमा करने के आदेश दिए। अर्थदंड नहीं जमा करने पर तीनों को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। कोर्ट ने जुर्माने की रकम से तीन लाख रुपये मृतक के परिजनों को देने के आदेश दिए। अभियजन पक्ष की ओर से हरिनाथ सिंह, अखिलेश राजपूत, भानू प्रकाश मिश्रा ने दलीले दी।
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फर्रुखाबाद। संबंधों के शक में ग्रामीण की हत्या में विशेष न्यायाधीश ईसीएक्ट राकेश कुमार ने दो भाइयों सहित तीन को दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों दोषियों पर 3.40 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अर्थदंड में तीन लाख रुपये मृतक के परिजनों को देने के आदेश दिए।
मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव रशीदपुर निवासी किशनलाल वर्मा ने गांव के पिंटू, भाई रिंकू, आशिक व अनिल के खिलाफ 15 अक्तूबर 2017 को मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोप लगाया कि भाई संतोष के पिंटू के चाचा जगवीर से गहरे संबंध थे। संतोष जगवीर व उसकी पत्नी ममता से मिलने उसके घर आता जाता था। संतोष जगवीर व उसकी पत्नी की रुपये पैसे से मदद करता था। जगवीर के भतीजे चाची से संबंध के शक में संतोष के घर आने का विरोध करते थे। जानकारी होने पर संतोष ने उनके घर आना-जाना बंद कर दिया था।
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15 अक्तूबर को भाई संतोष बहन कृष्णा के साथ हथियापुर से बाजार करके वापस आ रहा था। रास्ते में पिंटू, रिंकू, आशिक व अनिल ने भाई संतोष को रोक लिया। सभी गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर इन लोगों ने हसिया से काटकर भाई संतोष की हत्या कर दी। बहन कृष्णा वहां से भागकर घर आई। उसने पूरे मामले की जानकारी दी। विवेचक ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। आशिक की फाइल मुकदमे से अलग कर दी गई। मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने शुक्रवार को गवाह व साक्ष्य के आधार पर भाई पिंटू, रिंकू व अनिल को दोषी करार किया था।
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शनिवार को न्यायाधीश ने पिंटू रिंकू व अनिल को उम्रकैद की सजा सुनाई। तीनों दोषियों को 3.40 लाख रुपये अर्थदंड जमा करने के आदेश दिए। अर्थदंड नहीं जमा करने पर तीनों को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। कोर्ट ने जुर्माने की रकम से तीन लाख रुपये मृतक के परिजनों को देने के आदेश दिए। अभियजन पक्ष की ओर से हरिनाथ सिंह, अखिलेश राजपूत, भानू प्रकाश मिश्रा ने दलीले दी।