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Farrukhabad News: ग्रामीण की हत्या में दोषी को आजीवन कारावास
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फर्रुखाबाद। 25 वर्ष पहले रिश्तेदार से छेड़छाड़ के विरोध में ग्रामीण की हत्या में दोषी ग्रामीण को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी पर 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
कोतवाली कायमगंज के गांव पचरौली निवासी सुखराम ने गांव के मजरा हज्जू नगला निवासी आत्माराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें बताया कि भाई रामसोह ने आत्माराम की रिश्तेदार के साथ छेड़छाड़ की थी। इसको लेकर आत्माराम रंजिश मानने लगा। 12 जनवरी 1999 को सुखराम भाई रामसोह के साथ हज्जू नगला में आया था।
इसकी जानकारी आत्माराम को मिल गई। आत्माराम ने तमंचे से गोली मारकर भाई रामसोह की हत्या कर दी। गोली की आवाज सुनकर सुखराम व अन्य ग्रामीणों ने आत्माराम को पकड़ने का प्रयास किया तो वह तमंचा फेंक कर जान माल की धमकी देकर भाग गया। विवेचक ने आत्माराम के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश अंकित कुमार मित्तल ने मंगलवार को गवाह व साक्ष्य के आधार पर आत्माराम को हत्या में दोषी करार किया है। दोषी को हिरासत में लेकर जेल भेजने के आदेश दिए थे। बुधवार को न्यायाधीश ने हत्या में दोषी आत्माराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी को 10 हजार रुपये बतौर अर्थदंड के रूप में जमा करने के आदेश दिए। अर्थदंड नहीं देने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगने के आदेश दिए।
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कोतवाली कायमगंज के गांव पचरौली निवासी सुखराम ने गांव के मजरा हज्जू नगला निवासी आत्माराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें बताया कि भाई रामसोह ने आत्माराम की रिश्तेदार के साथ छेड़छाड़ की थी। इसको लेकर आत्माराम रंजिश मानने लगा। 12 जनवरी 1999 को सुखराम भाई रामसोह के साथ हज्जू नगला में आया था।
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इसकी जानकारी आत्माराम को मिल गई। आत्माराम ने तमंचे से गोली मारकर भाई रामसोह की हत्या कर दी। गोली की आवाज सुनकर सुखराम व अन्य ग्रामीणों ने आत्माराम को पकड़ने का प्रयास किया तो वह तमंचा फेंक कर जान माल की धमकी देकर भाग गया। विवेचक ने आत्माराम के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश अंकित कुमार मित्तल ने मंगलवार को गवाह व साक्ष्य के आधार पर आत्माराम को हत्या में दोषी करार किया है। दोषी को हिरासत में लेकर जेल भेजने के आदेश दिए थे। बुधवार को न्यायाधीश ने हत्या में दोषी आत्माराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी को 10 हजार रुपये बतौर अर्थदंड के रूप में जमा करने के आदेश दिए। अर्थदंड नहीं देने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगने के आदेश दिए।