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एमएसपी को कानून के दायरे में लाने तक आंदोलन जारी रहेगा
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फर्रुखाबाद। केंद्र सरकार द्वारा तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा का किसान नेताओं ने स्वागत किया है। उन्होंने इसे आंदोलन की जीत बताते हुए कहा कि सरकार को अभी विद्युत अध्यादेश व एमएसपी को कानून के दायरे में लाने की जरूरत है। तभी आंदोलन समाप्त होगा।
भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने इसे आंदोलन की जीत बताया। कहा कि आंदोलन में तीन मांगें रखी गईं थीं। अभी एक ही मानी गई है। विद्युत अध्यादेश समाप्त करने और एमएसपी को कानूनी दायरे में लाने के बाद ही आंदोलन समाप्त होगा।
भाकियू टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष अरविंद शाक्य ने कहा कि तीनों कानून वापस लेना सरकार का स्वागत योग्य कदम है। किसानों को बिजली मुफ्त मिले, न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों पर फसल खरीदने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इन मांगों को भी सरकार को मानना होगा।
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भाकियू हरपाल गुट के जिलाध्यक्ष रामबहादुर राजपूत का कहना है कि जब तक एमएसपी को कानूनी दायरे में नहीं लाया जाता, तब तक किसानों को इसका लाभ मिलने वाला नहीं है। बाजार में इन दिनों 13 से 14 रुपये प्रति किलो धान खरीदा जा रहा है, जबकि 1940 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रभारी राम मोहन दीक्षित ने कहा कि यह आंदोलन की पहली जीत है। अभी विद्युत अध्यादेश को समाप्त करने व एमएसपी को कानूनी दायरे में लेने तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। सरकार यदि किसानों का भला चाहती है तो तीनों मांगें मान ले।
जिला महासचिव संजय गंगवार ने भी कृषि कानूनों का वापस लिया जाना आंदोलन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि अभी किसानों की तीनों मांगें पूरी नहीं हुई है। जिस दिन सरकार तीनों मांगें मान लेगी उसी दिन आंदोलन समाप्त हो जाएगा।
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भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने इसे आंदोलन की जीत बताया। कहा कि आंदोलन में तीन मांगें रखी गईं थीं। अभी एक ही मानी गई है। विद्युत अध्यादेश समाप्त करने और एमएसपी को कानूनी दायरे में लाने के बाद ही आंदोलन समाप्त होगा।
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भाकियू टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष अरविंद शाक्य ने कहा कि तीनों कानून वापस लेना सरकार का स्वागत योग्य कदम है। किसानों को बिजली मुफ्त मिले, न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों पर फसल खरीदने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इन मांगों को भी सरकार को मानना होगा।
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भाकियू हरपाल गुट के जिलाध्यक्ष रामबहादुर राजपूत का कहना है कि जब तक एमएसपी को कानूनी दायरे में नहीं लाया जाता, तब तक किसानों को इसका लाभ मिलने वाला नहीं है। बाजार में इन दिनों 13 से 14 रुपये प्रति किलो धान खरीदा जा रहा है, जबकि 1940 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित है।
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रभारी राम मोहन दीक्षित ने कहा कि यह आंदोलन की पहली जीत है। अभी विद्युत अध्यादेश को समाप्त करने व एमएसपी को कानूनी दायरे में लेने तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। सरकार यदि किसानों का भला चाहती है तो तीनों मांगें मान ले।
जिला महासचिव संजय गंगवार ने भी कृषि कानूनों का वापस लिया जाना आंदोलन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि अभी किसानों की तीनों मांगें पूरी नहीं हुई है। जिस दिन सरकार तीनों मांगें मान लेगी उसी दिन आंदोलन समाप्त हो जाएगा।