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हत्यारे भतीजे को आजीवन कारावास
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फर्रुखाबाद। जिला जज शिव शंकर प्रसाद ने पारिवारिक चाचा की हत्या में दोषसिद्ध भतीजे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 15 हजार रुपये जुर्माना भी किया है। इस मुकदमे में दो भतीजों को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है।
मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव नदौरा निवासी ज्ञान सिंह की भूमि विवाद की रंजिश में एक मार्च 2018 को परिवार के तीन भतीजों ने लाठी-डंडों से पीट कर हत्या कर दी थी। पुत्र भूपाल सिंह ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचक ने सगे भाई अजय, कैलाश व रवेंद्र के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के बाद तीनों भाइयों को हत्या, मारपीट व धमकी में दोषी करार दिया गया था।
सात फरवरी को अजय और कैलाश कोर्ट में उपस्थित हुए। जिला जज ने आजीवन कारावास की सजा और जुर्माने से दंडित कर जेल भेजा था। तीसरा भाई रवेंद्र कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ था। इससे उसकी पत्रावली अलग कर गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। 9 फरवरी को रवेंद्र ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। सोमवार को रवेंद्र जिला कारागार से कोर्ट में पेश किया गया।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व अपर जिला शासकीय अधिवक्ता पंकज कटियार ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई के बाद जिला जज ने रवेंद्र को आजीवन कारवास की सजा और जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना राशि वसूल होने पर 50 प्रतिशत ज्ञानसिंह के आश्रितों को बराबर-बराबर देने का आदेश दिया है।
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मेरापुर थाना क्षेत्र के गांव नदौरा निवासी ज्ञान सिंह की भूमि विवाद की रंजिश में एक मार्च 2018 को परिवार के तीन भतीजों ने लाठी-डंडों से पीट कर हत्या कर दी थी। पुत्र भूपाल सिंह ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचक ने सगे भाई अजय, कैलाश व रवेंद्र के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के बाद तीनों भाइयों को हत्या, मारपीट व धमकी में दोषी करार दिया गया था।
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सात फरवरी को अजय और कैलाश कोर्ट में उपस्थित हुए। जिला जज ने आजीवन कारावास की सजा और जुर्माने से दंडित कर जेल भेजा था। तीसरा भाई रवेंद्र कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ था। इससे उसकी पत्रावली अलग कर गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। 9 फरवरी को रवेंद्र ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। सोमवार को रवेंद्र जिला कारागार से कोर्ट में पेश किया गया।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व अपर जिला शासकीय अधिवक्ता पंकज कटियार ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई के बाद जिला जज ने रवेंद्र को आजीवन कारवास की सजा और जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना राशि वसूल होने पर 50 प्रतिशत ज्ञानसिंह के आश्रितों को बराबर-बराबर देने का आदेश दिया है।