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फर्रुखाबादः प्रीमियम से दोगुना मिला क्लेम, फिर भी कम हो गए बीमित किसान
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फर्रुखाबाद। फसल बीमा कराने में किसान रुचि नहीं ले रहे हैं। बीते वर्ष दैवीय आपदा में फसल बर्बाद होने पर बीमा कंपनी ने किसानों को प्रीमियम से दो गुना क्लेम बांटा। इसके बावजूद इस वर्ष खरीफ की फसल में बीमित किसानों की संख्या घटकर आधी भी नहीं बची है। जिले में सूखा जैसे आसार लग रहे हैं। इससे किसानों की फसलें बर्बाद होने पर मुआवजा कहां से मिलेगा, यह सोचने की बात है।
दैवीय आपदा में फसलें चौपट होने पर भी किसान बर्बाद न हो, इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई गई। शुरुआती दौर में सभी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) धारकों के खाते से प्रीमियम की धनराशि काटकर फसल बीमा कर दिया जाता था। अब इसे स्वैच्छिक कर दिया गया है। जनपद में एक लाख 23 हजार किसानों के केसीसी बने हैं। इनमें करीब 70 हजार केसीसी सक्रिय हैं।
फसल बीमा का पिछले वर्ष का रिकार्ड देखें तो खरीफ के सीजन में 10029 किसानों ने यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी में फसल बीमा कराया था। इनमें 4265 किसानों ने मक्का का, जबकि 5764 किसानों ने धान का बीमा कराया। इनका कुल 65 लाख रुपये प्रीमियम जमा हुई। बाढ़, बारिश आदि दैवीय आपदा में फसलें भी बर्बाद हुईं तो कंपनी ने सर्वे कराया और जिले के 2456 किसानों को एक करोड़ 44 लाख रुपये मुआवजा दिया।
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इसके बाद भी इस वर्ष किसानों ने फसल बीमा कराने में रुचि नहीं दिखाई। इस वर्ष अब तक 3954 किसानों ने ही फसल बीमा कराया है। इनमें 1320 किसानों ने मक्का और 2634 किसानों ने धान का बीमा कराया। जबकि बारिश न होने से जिले में सूखा जैसे आसार बन रहे हैं। ऐसे में किसानों की फसलें भी सिंचाई के अभाव में खराब होने लगी हैं। यदि यह फसलें सूखा में बर्बाद होती हैं तो इसकी भरपाई न होना किसानों के लिए चिंता का विषय है।
बैंकें नहीं कर रहीं सहयोग
बीमा कंपनी के जिला प्रभारी आशीष सिंह ने बताया कि बैंकों द्वारा केसीसी से किस्त न काटे जाने से इच्छुक किसानों का भी फसल बीमा नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या घट रही है। दूसरी ओर एलडीएम डीएन पाल ने बताया कि फसल बीमा योजना स्वैच्छिक हो जाने से किसानों की संख्या घटी है। इसके अलावा केसीसी खाते में धनराशि न होने से भी किस्त की कटौती करने में दिक्कत आ रही है।
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दैवीय आपदा में फसलें चौपट होने पर भी किसान बर्बाद न हो, इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई गई। शुरुआती दौर में सभी किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) धारकों के खाते से प्रीमियम की धनराशि काटकर फसल बीमा कर दिया जाता था। अब इसे स्वैच्छिक कर दिया गया है। जनपद में एक लाख 23 हजार किसानों के केसीसी बने हैं। इनमें करीब 70 हजार केसीसी सक्रिय हैं।
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फसल बीमा का पिछले वर्ष का रिकार्ड देखें तो खरीफ के सीजन में 10029 किसानों ने यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी में फसल बीमा कराया था। इनमें 4265 किसानों ने मक्का का, जबकि 5764 किसानों ने धान का बीमा कराया। इनका कुल 65 लाख रुपये प्रीमियम जमा हुई। बाढ़, बारिश आदि दैवीय आपदा में फसलें भी बर्बाद हुईं तो कंपनी ने सर्वे कराया और जिले के 2456 किसानों को एक करोड़ 44 लाख रुपये मुआवजा दिया।
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इसके बाद भी इस वर्ष किसानों ने फसल बीमा कराने में रुचि नहीं दिखाई। इस वर्ष अब तक 3954 किसानों ने ही फसल बीमा कराया है। इनमें 1320 किसानों ने मक्का और 2634 किसानों ने धान का बीमा कराया। जबकि बारिश न होने से जिले में सूखा जैसे आसार बन रहे हैं। ऐसे में किसानों की फसलें भी सिंचाई के अभाव में खराब होने लगी हैं। यदि यह फसलें सूखा में बर्बाद होती हैं तो इसकी भरपाई न होना किसानों के लिए चिंता का विषय है।
बैंकें नहीं कर रहीं सहयोग
बीमा कंपनी के जिला प्रभारी आशीष सिंह ने बताया कि बैंकों द्वारा केसीसी से किस्त न काटे जाने से इच्छुक किसानों का भी फसल बीमा नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या घट रही है। दूसरी ओर एलडीएम डीएन पाल ने बताया कि फसल बीमा योजना स्वैच्छिक हो जाने से किसानों की संख्या घटी है। इसके अलावा केसीसी खाते में धनराशि न होने से भी किस्त की कटौती करने में दिक्कत आ रही है।