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फर्रुखाबादः एक्सईएन आवास के बंद कमरे में हुई गबन की जांच
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फर्रुखाबाद। नलकूप विभाग में अधिशासी अभियंता के सरकारी आवास के बंद कमरे में गुरुवार को कमेटी ने जांच की। फर्जी कर्मचारियों के नाम 16.24 लाख रुपये वेतन निकालकर गबन करने के मामले में कैशियर व सिंचाई विभाग के निजी कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
राजकीय नलकूप विभाग में नवंबर 2021 से मई 2022 तक छह फर्जी कर्मचारियों के नाम वेतन निकालकर 16.24 लाख रुपये का गबन किया गया है। इसकी शासन से हुई शिकायत के बाद अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए नलकूप विभाग के कैशियर मनोज कुमार व सिंचाई विभाग के निजी कंप्यूटर ऑपरेटर फैजान अली के खिलाफ फतेहगढ़ कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया था।
जबकि वेतन बिल पर नलकूप विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता अनिल कुमार सिंह व सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दुर्ण कुुमार के हस्ताक्षर के बाद कोषागार से भुगतान किया गया। पूरे मामले की जांच के लिए नलकूप विभाग के एमडी ने कानपुर के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता निर्माण खंड कानपुर व हमीरपुर के अधिशासी अभियंता की कमेटी गठित की थी।
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गुरुवार को अधिकारी जांच करने नलकूप विभाग पहुंचे। वह खंड कार्यालय के बजाय अधिशासी अभियंता के सरकारी आवास में बैठे और बंद कमरे में जांच की गई। वहां अकाउंटेंट अंबरीश यादव, सहायक अभियंता इमरान अंसारी, एक्सईएन शशांक कुमार व अधिशासी अभियंता सिंचाई दुर्ण कुमार से भी पूछताछ की गई। गबन की जांच में गोपनीयता को लेकर विभाग में चर्चा रही।
बताया जा रहा है कि शिकायत में सिंचाई विभाग के प्रधान सहायक व दोनों अधिकारियों को बचाने का प्रयास चल रहा है। वेतन के गबन के पहले मार्च में तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने लेखाकार के बिना हस्ताक्षर करोड़ों के भुगतान भी किए थे।
जांच में उसे भी शामिल किया गया है। बंद कमरे में जांच को लेकर विभागीय कर्मचारी ही जांच कमेटी के अधिकारियों पर सवाल उठा रहे हैं। पूछने पर एक जांच अधिकारी ने अपना बिना नाम बताए कहा कि गोपनीयता भंग नहीं की जाएगी। वह अपनी जांच रिपोर्ट शासन को देंगे।
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राजकीय नलकूप विभाग में नवंबर 2021 से मई 2022 तक छह फर्जी कर्मचारियों के नाम वेतन निकालकर 16.24 लाख रुपये का गबन किया गया है। इसकी शासन से हुई शिकायत के बाद अधिकारियों ने खुद को बचाने के लिए नलकूप विभाग के कैशियर मनोज कुमार व सिंचाई विभाग के निजी कंप्यूटर ऑपरेटर फैजान अली के खिलाफ फतेहगढ़ कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया था।
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जबकि वेतन बिल पर नलकूप विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता अनिल कुमार सिंह व सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दुर्ण कुुमार के हस्ताक्षर के बाद कोषागार से भुगतान किया गया। पूरे मामले की जांच के लिए नलकूप विभाग के एमडी ने कानपुर के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता निर्माण खंड कानपुर व हमीरपुर के अधिशासी अभियंता की कमेटी गठित की थी।
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गुरुवार को अधिकारी जांच करने नलकूप विभाग पहुंचे। वह खंड कार्यालय के बजाय अधिशासी अभियंता के सरकारी आवास में बैठे और बंद कमरे में जांच की गई। वहां अकाउंटेंट अंबरीश यादव, सहायक अभियंता इमरान अंसारी, एक्सईएन शशांक कुमार व अधिशासी अभियंता सिंचाई दुर्ण कुमार से भी पूछताछ की गई। गबन की जांच में गोपनीयता को लेकर विभाग में चर्चा रही।
बताया जा रहा है कि शिकायत में सिंचाई विभाग के प्रधान सहायक व दोनों अधिकारियों को बचाने का प्रयास चल रहा है। वेतन के गबन के पहले मार्च में तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने लेखाकार के बिना हस्ताक्षर करोड़ों के भुगतान भी किए थे।
जांच में उसे भी शामिल किया गया है। बंद कमरे में जांच को लेकर विभागीय कर्मचारी ही जांच कमेटी के अधिकारियों पर सवाल उठा रहे हैं। पूछने पर एक जांच अधिकारी ने अपना बिना नाम बताए कहा कि गोपनीयता भंग नहीं की जाएगी। वह अपनी जांच रिपोर्ट शासन को देंगे।