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जिस जमीन पर मकान बना, वहां धान की फसल दिखा दी
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फर्रुखाबाद। बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देने में लेेखपाल ने खेल कर दिया। जिस भूमि पर मकान बना, उस जमीन पर धान की फसल दिखाकर मुआवजे का बंदरबांट कर लिया गया। मुआवजे से वंचित एक किसान ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी हासिल की तो भ्रष्टाचार की पोल खुल गई। उसने मुख्यमंत्री पोर्टल व एसडीएम से शिकायत की है। एसडीएम ने तहसीलदार को मामले की जांच दी है।
पिछले वर्ष अमृतपुर तहसील क्षेत्र में गंगा व रामगंगा की बाढ़ से धान, तिल आदि की फसलें तबाह हो गई थीं। बाढ़ के सर्वे के बाद आपदा राहत कोष से बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा भी दिया गया। सर्वे में खेल होने से अपात्रों को लाभ मिल गया और पात्र वंचित रह गए। ग्राम पंचायत अमैयापुर में अपात्रों का चयन करने का मामला सामने आया है।
अमैयापुर के कुलदीप तिवारी की करीब 40 बीघा धान की फसल बाढ़ में बर्बाद होने के बावजूद मुआवजे से वंचित कर दिया गया। इस पर उनके बेटे आशीष तिवारी ने सूचना के अधिकार के तहत तहसील से गांव के बाढ़ पीड़ित लाभार्थियों की सूची निकलवाई। इसमें सर्वे में हुआ खेल सामने आ गया।
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गांव के 15 लोगों को 74079 रुपये मुआवजा दिया गया। इसमें सिर्फ तीन ग्रामीणों के पास ही धान की फसल थी। लेखपाल ने ऐसे भूखंड पर मुआवजा स्वीकृत कर दिया, जिस पर मकान बना खड़ा है। कई भूखंडों पर गन्ने की फसल खड़ी होने के साथ उसका चीनी मिल से सर्वे भी हो चुका था। एक परिवार के ही आठ लोगों को मुआवजा दिया गया, जिन्होंने धान की फसल लगाई ही नहीं थी।
कुलदीप तिवारी ने आरटीआई के तहत मांगी सूची के साथ प्रकरण की शिकायत एसडीएम और मुख्यमंत्री पोर्टल पर की है। उनका आरोप है कि लेखपाल ने गांव में बिना आए गुपचुप तरीके से सर्वे कर अपात्रों को मुआवजे का लाभ दे दिया। पात्रों को लाभ से वंचित कर दिया है। कुलदीप तिवारी ने आठ ग्रामीणों के हस्ताक्षर से शिकायत की है और सरकारी धन के बंदरबांट का आरोप लगाया है। इस संदर्भ में संबंधित लेखपाल विमल कुमार ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।
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पिछले वर्ष अमृतपुर तहसील क्षेत्र में गंगा व रामगंगा की बाढ़ से धान, तिल आदि की फसलें तबाह हो गई थीं। बाढ़ के सर्वे के बाद आपदा राहत कोष से बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा भी दिया गया। सर्वे में खेल होने से अपात्रों को लाभ मिल गया और पात्र वंचित रह गए। ग्राम पंचायत अमैयापुर में अपात्रों का चयन करने का मामला सामने आया है।
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अमैयापुर के कुलदीप तिवारी की करीब 40 बीघा धान की फसल बाढ़ में बर्बाद होने के बावजूद मुआवजे से वंचित कर दिया गया। इस पर उनके बेटे आशीष तिवारी ने सूचना के अधिकार के तहत तहसील से गांव के बाढ़ पीड़ित लाभार्थियों की सूची निकलवाई। इसमें सर्वे में हुआ खेल सामने आ गया।
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गांव के 15 लोगों को 74079 रुपये मुआवजा दिया गया। इसमें सिर्फ तीन ग्रामीणों के पास ही धान की फसल थी। लेखपाल ने ऐसे भूखंड पर मुआवजा स्वीकृत कर दिया, जिस पर मकान बना खड़ा है। कई भूखंडों पर गन्ने की फसल खड़ी होने के साथ उसका चीनी मिल से सर्वे भी हो चुका था। एक परिवार के ही आठ लोगों को मुआवजा दिया गया, जिन्होंने धान की फसल लगाई ही नहीं थी।
कुलदीप तिवारी ने आरटीआई के तहत मांगी सूची के साथ प्रकरण की शिकायत एसडीएम और मुख्यमंत्री पोर्टल पर की है। उनका आरोप है कि लेखपाल ने गांव में बिना आए गुपचुप तरीके से सर्वे कर अपात्रों को मुआवजे का लाभ दे दिया। पात्रों को लाभ से वंचित कर दिया है। कुलदीप तिवारी ने आठ ग्रामीणों के हस्ताक्षर से शिकायत की है और सरकारी धन के बंदरबांट का आरोप लगाया है। इस संदर्भ में संबंधित लेखपाल विमल कुमार ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।