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ठंडे बस्ते में गई सीएमओ के फर्जी आदेश की जांच
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फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य विभाग में मलाईदार पटल हथियाने के लिए अफसरों में होड़ मची है। हालत यह है कि सीएमओ के फर्जी आदेश तक जारी कर दिए गए। पिछले दिनों फर्जी आदेश से जुड़ा मामला सामने आया तो हड़कंप मच गया। प्रभारी सीएमओ ने एक जून को कमेटी गठित कर जांच शुरू करा दी। यह जांच अब ठंडे बस्ते में चली गई है। विभाग में मची उठापटक से झोलाछापों की मौज है।
पिछले माह सीएमओ के सेवानिवृत्त होने से पहले कार्यालय में मलाईदार पटल कब्जाने के लिए अधिकारियों में घमासान मचा रहा। भुगतान से लेकर पटलों के चार्ज को लेकर आदेश भी खूब हुए। 31 मई को सेवानिवृत्त से पहले तत्कालीन सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा ने 18 मई को आदेश जारी कर पटलों का विभाजन कर दिया था।
इसमें डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुराग वर्मा को निजी स्वास्थ्य इकाइयों के पंजीकरण, एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव को झोलाछाप उन्मूलन व एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम को अल्ट्रासाउंड सेंटरों का नोडल अधिकारी नामित किया था। जबकि यह तीनों पटल डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुराग वर्मा देख रहे थे।
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26 मई को सीएमओ के फर्जी हस्ताक्षर से संशोधित आदेश जारी हुआ। इसमें झोलाछाप पटल डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुराग वर्मा के नाम था। इसी के बाद खींचतान शुरू हो गई। एक जून को प्रभारी सीएमओ डॉ. दलवीर सिंह ने एसीएमओ डॉ. उमेश चंद्र वर्मा, डॉ. रंजन गौतम व डिप्टी सीएमओ डॉ. दीपक कटारिया की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। तीन दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
21 दिन बाद भी न तो जांच की गई और न ही झोलाछापों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। जांच अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि सेवानिवृत्त तत्कालीन सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा को पत्र भेजकर आदेश पर हस्ताक्षर असली या फर्जी होने के संबंध में पूछा जाएगा। जवाब के आधार पर जांच कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
डीएम के आदेश पर भी झोलाछापों की जांच नहीं
कंपिल क्षेत्र में आठ झोलाछापों द्वारा क्लीनिक व नर्सिंगहोम चलाकर मरीजों की जान से खिलवाड़ किए जाने की शिकायत की गई थी। जिलाधिकारी ने इसकी जांच एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव को सौंपी थी। 30 मई को डीएम के आदेश के 21 दिन बाद भी जांच नहीं की गई। इससे साफ है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से जिले में अवैध स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं।
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पिछले माह सीएमओ के सेवानिवृत्त होने से पहले कार्यालय में मलाईदार पटल कब्जाने के लिए अधिकारियों में घमासान मचा रहा। भुगतान से लेकर पटलों के चार्ज को लेकर आदेश भी खूब हुए। 31 मई को सेवानिवृत्त से पहले तत्कालीन सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा ने 18 मई को आदेश जारी कर पटलों का विभाजन कर दिया था।
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इसमें डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुराग वर्मा को निजी स्वास्थ्य इकाइयों के पंजीकरण, एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव को झोलाछाप उन्मूलन व एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम को अल्ट्रासाउंड सेंटरों का नोडल अधिकारी नामित किया था। जबकि यह तीनों पटल डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुराग वर्मा देख रहे थे।
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26 मई को सीएमओ के फर्जी हस्ताक्षर से संशोधित आदेश जारी हुआ। इसमें झोलाछाप पटल डिप्टी सीएमओ डॉ. अनुराग वर्मा के नाम था। इसी के बाद खींचतान शुरू हो गई। एक जून को प्रभारी सीएमओ डॉ. दलवीर सिंह ने एसीएमओ डॉ. उमेश चंद्र वर्मा, डॉ. रंजन गौतम व डिप्टी सीएमओ डॉ. दीपक कटारिया की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। तीन दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
21 दिन बाद भी न तो जांच की गई और न ही झोलाछापों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। जांच अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि सेवानिवृत्त तत्कालीन सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा को पत्र भेजकर आदेश पर हस्ताक्षर असली या फर्जी होने के संबंध में पूछा जाएगा। जवाब के आधार पर जांच कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
डीएम के आदेश पर भी झोलाछापों की जांच नहीं
कंपिल क्षेत्र में आठ झोलाछापों द्वारा क्लीनिक व नर्सिंगहोम चलाकर मरीजों की जान से खिलवाड़ किए जाने की शिकायत की गई थी। जिलाधिकारी ने इसकी जांच एसीएमओ डॉ. सर्वेश यादव को सौंपी थी। 30 मई को डीएम के आदेश के 21 दिन बाद भी जांच नहीं की गई। इससे साफ है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से जिले में अवैध स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं।