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निर्माण में धीमी गति, गड़बड़ी से डीआरएम खफा
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फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पर निरीक्षण करते डीआरएम दिनेश कुमार। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। दिसंबर में प्रस्तावित जीएम निरीक्षण को लेकर चल रहे सुंदरीकरण के कार्य की गुणवत्ता और धीमी गति को देख मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) दिनेश कुमार सिंह बेहद नाराज दिखे। कहा कि यदि आप लोग यहां कैंप नहीं करेंगे, तो स्थिति खराब होगी। आवासों की छतें टपकने की शिकायत मिली, शौचालय भी बदहाल दिखे। निर्माण में मनमानी बरतने पर खफा हो गए। कहा कि इन ईंटों का प्रयोग न करें। क्योंकि आप लगाओगे पीली ईंट ही। वह छह महीने में खत्म हो जाएंगी।
डीआरएम दिनेश कुमार सिंह स्टेशन पर स्पेशल ट्रेन से गुरुवार सुबह 8.10 बजे पहुंचे। पौने नौ बजे वह ट्रेन से उतरे। गंदी पुरानी बेंचें देख नाराजगी जताई। कहा, इन्हें हटाकर नई लगाएं। इसके बाद वह ओवरब्रिज पर पहुंचे। उन्होंने झूलते तारों को अंदर करने को कहा। पुल से ही उन्होंने मालगोदाम का निर्माणाधीन प्लेटफार्म देखा। रोडों की जानकारी ली। सहायक मंडल इंजीनियर अश्वनी कुमार तिवारी ने जब नक्शा दिखाया। बोले, यह सब बेकार है। मनमाना काम हो रहा है। इन हालातों से जीएम को निरीक्षण कराना मुश्किल होगा। उन्होंने निर्माण के अफसरों को कैंप करने के निर्देश दिए।
डीआरएम ने निरीक्षण के वक्त टिनशेड को ऊपर से पानी से धुलवाने के निर्देश दिए। वह पांच नंबर प्लेटफार्म पहुंचे, तो टिनशेड के खंभों के पास तीन-तीन फीट ऊंचे प्लेटफार्म दिखे। उन्होंने इन्हें तुरंत तोड़ने के निर्देश दिए। कहा कि जब ग्रेनाइट से प्लेटफार्म बन रहा, तो इसका कोई मतलब नहीं। यात्रियों के आवागमन में जगह कम होगी। वेटिंग रूम में गंदगी का साम्राज्य देख नाराजगी जताई। शौचालयों में सीटें, किवाड़ टूटे और टाइल्स बेकार दिखे। उन्होंने बदलने के निर्देश दिए। काम जो भी कराएं, वह गुणवत्ता वाला हो। उन्होंने आवासों का निरीक्षण किया, तो छतें टपकने की शिकायत मिली। इस पर नाराजगी जताई। डीआरएम ने नालों को ढकनेे को कहा। इस मौके पर एडीआरएम एके वार्ष्णेय, मुख्य वाणिज्य प्रबंधक नीतू सिंह, डीओएम आशीष त्रिपाठी, अवध बिहारी, धर्म सिंह मीना समेत स्टेशन अधीक्षक योगेंद्र शाक्य आदि तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
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कनेक्टिविटी की डीआरएम ने भी नहीं ली सुध
पांच दिन गुजर गए। अभी तक कनेक्टिविटी नहीं आई है। रिजर्वेशन काउंटर, एटीवीएम और निजी टिकट वितरण काउंटर बंद पड़े हैं। थिंक लाइन की कैपेसिटी 72 घंटे की होती है। वह समय सीमा भी खत्म हो गई। किसी भी वक्त थिंक लाइन भी बंद हो सकती है। ऐसे में साधारण टिकट वितरण बंद हो जाएगा। इसके बाद गत्ते की टिकट बांटना मजबूरी हो जाएगी। तमाम स्टेशनों की टिकट भी नहीं मिल सकेगी। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा। इतनी बड़ी समस्या होने के बावजूद अफसरों ने बुकिंग दफ्तर में झांकने तक की जरूरत नहीं समझी। उनका पूरा समय निर्माण कार्य को देखने में ही गुजर गया। यदि एक बार बुकिंग में पहुंच जाते, तो समस्या समझकर कुछ हल हो जाता।
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डीआरएम दिनेश कुमार सिंह स्टेशन पर स्पेशल ट्रेन से गुरुवार सुबह 8.10 बजे पहुंचे। पौने नौ बजे वह ट्रेन से उतरे। गंदी पुरानी बेंचें देख नाराजगी जताई। कहा, इन्हें हटाकर नई लगाएं। इसके बाद वह ओवरब्रिज पर पहुंचे। उन्होंने झूलते तारों को अंदर करने को कहा। पुल से ही उन्होंने मालगोदाम का निर्माणाधीन प्लेटफार्म देखा। रोडों की जानकारी ली। सहायक मंडल इंजीनियर अश्वनी कुमार तिवारी ने जब नक्शा दिखाया। बोले, यह सब बेकार है। मनमाना काम हो रहा है। इन हालातों से जीएम को निरीक्षण कराना मुश्किल होगा। उन्होंने निर्माण के अफसरों को कैंप करने के निर्देश दिए।
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डीआरएम ने निरीक्षण के वक्त टिनशेड को ऊपर से पानी से धुलवाने के निर्देश दिए। वह पांच नंबर प्लेटफार्म पहुंचे, तो टिनशेड के खंभों के पास तीन-तीन फीट ऊंचे प्लेटफार्म दिखे। उन्होंने इन्हें तुरंत तोड़ने के निर्देश दिए। कहा कि जब ग्रेनाइट से प्लेटफार्म बन रहा, तो इसका कोई मतलब नहीं। यात्रियों के आवागमन में जगह कम होगी। वेटिंग रूम में गंदगी का साम्राज्य देख नाराजगी जताई। शौचालयों में सीटें, किवाड़ टूटे और टाइल्स बेकार दिखे। उन्होंने बदलने के निर्देश दिए। काम जो भी कराएं, वह गुणवत्ता वाला हो। उन्होंने आवासों का निरीक्षण किया, तो छतें टपकने की शिकायत मिली। इस पर नाराजगी जताई। डीआरएम ने नालों को ढकनेे को कहा। इस मौके पर एडीआरएम एके वार्ष्णेय, मुख्य वाणिज्य प्रबंधक नीतू सिंह, डीओएम आशीष त्रिपाठी, अवध बिहारी, धर्म सिंह मीना समेत स्टेशन अधीक्षक योगेंद्र शाक्य आदि तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
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कनेक्टिविटी की डीआरएम ने भी नहीं ली सुध
पांच दिन गुजर गए। अभी तक कनेक्टिविटी नहीं आई है। रिजर्वेशन काउंटर, एटीवीएम और निजी टिकट वितरण काउंटर बंद पड़े हैं। थिंक लाइन की कैपेसिटी 72 घंटे की होती है। वह समय सीमा भी खत्म हो गई। किसी भी वक्त थिंक लाइन भी बंद हो सकती है। ऐसे में साधारण टिकट वितरण बंद हो जाएगा। इसके बाद गत्ते की टिकट बांटना मजबूरी हो जाएगी। तमाम स्टेशनों की टिकट भी नहीं मिल सकेगी। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा। इतनी बड़ी समस्या होने के बावजूद अफसरों ने बुकिंग दफ्तर में झांकने तक की जरूरत नहीं समझी। उनका पूरा समय निर्माण कार्य को देखने में ही गुजर गया। यदि एक बार बुकिंग में पहुंच जाते, तो समस्या समझकर कुछ हल हो जाता।