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बैंक में निकासी सीमा बढ़ने से आढ़की खुश
ब्यूरो/अमर उजाला फर्रुखाबाद,
Updated Mon, 20 Feb 2017 11:13 PM IST
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सातनपुर मंडी में बिक्री के लिए लाया गया आलू।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रिजर्व बैंक आफ इंडिया की ओर से बैंक के चालू खातों से रुपये निकासी की सीमा बढ़ाए जाने से आलू आढ़तियों के साथ ही किसानों के चेहरों पर भी खुशी है। आरबीआई के फरमान के बाद आलू की कीमतों में उछाल आना शुरू हो गया है।
सातनपुर आलू मंडी में नोट बंदी के बाद आलू आढ़तियों के अलावा किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। आढ़तियों का कहना है कि आरबीआई के निर्देश पर निकासी की सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति सप्ताह करने से राहत मिली है।
निकासी सीमा बढ़ने से राहत
आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश वर्मा का कहना है कि आरबीआई की ओर से बढ़ाई गई निकासी सीमा से कुछ राहत जरूर मिली है। किसान को आलू बेंचने के बाद नकद भुगतान नहंी मिल रहा था।निकासी की सीमा पर पूरी तरह से छूट मिलने से ही राहत मिलेगी।
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आलू आढ़ती अजय फौजी का कहना है कि मंडी में किसानों को आलू के बदले नगद भुगतान करना होता है। मंडी में पेटीएम और अन्य डिजिटल तरीके से भुगतान करने का कोई प्रावधान नहंीं है। किसान को नगद रुपये मिलने से ही उसका काम चलता है। उन्होंने कहा कि किसानों को चेक पर बैंकों के द्वारा 150 रुपये की कटौती बंद होनी चाहिए।
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सातनपुर आलू मंडी में नोट बंदी के बाद आलू आढ़तियों के अलावा किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। आढ़तियों का कहना है कि आरबीआई के निर्देश पर निकासी की सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति सप्ताह करने से राहत मिली है।
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निकासी सीमा बढ़ने से राहत
आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश वर्मा का कहना है कि आरबीआई की ओर से बढ़ाई गई निकासी सीमा से कुछ राहत जरूर मिली है। किसान को आलू बेंचने के बाद नकद भुगतान नहंी मिल रहा था।निकासी की सीमा पर पूरी तरह से छूट मिलने से ही राहत मिलेगी।
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आलू आढ़ती अजय फौजी का कहना है कि मंडी में किसानों को आलू के बदले नगद भुगतान करना होता है। मंडी में पेटीएम और अन्य डिजिटल तरीके से भुगतान करने का कोई प्रावधान नहंीं है। किसान को नगद रुपये मिलने से ही उसका काम चलता है। उन्होंने कहा कि किसानों को चेक पर बैंकों के द्वारा 150 रुपये की कटौती बंद होनी चाहिए।