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Farrukhabad News: पैंट पर सुसाइड नोट लिखने की घटना का मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
Fri, 25 Jul 2025 11:19 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Fri, 25 Jul 2025 11:19 PM IST
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फर्रुखाबाद। पैंट पर लिखे सुसाइड नोट पर पुलिसिया उत्पीड़न की कहानी लिख फंदे से लटके युवक की मौत का मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्टों को आधार मानकर आयोग ने इस प्रकरण को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में रखकर डीजीपी से दो सप्ताह के अंदर प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। नोटिस के बाद से जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है। हालांकि इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों सहित फर्जी सांसद प्रतिनिधि को पुलिस जेल भेज चुकी है।
पति-पत्नी के विवाद के दौरान चौकी पुलिस के उत्पीड़न और अपमान से आहत होकर युवक के आत्महत्या मामले का संज्ञान मानवाधिकार आयोग ने लिया है। 15 जुलाई को घटित हुई इस घटना में मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव छेदा नगला निवासी दिलीप कुमार राजपूत (25) ने घर में साड़ी से पंखे के कुंडे में फंदा लगा लिया था। सफेद पैंट पर लिखे सुसाइड नोट में युवक ने पुलिस की कार्यशैली और बर्बरता का जिक्र किया था।
सुसाइड नोट में युवक ने पत्नी व ससुरालियों समेत हथियापुर पुलिस चौकी के दो पुलिस कर्मियों पर चौकी में प्रताड़ित करने व 40 हजार लेकर चौकी से छोड़ने का आरोप लगाया था। मृतक के पिता की तहरीर पर कमालगंज के गांव रसीदपुर ससुर बनवारी लाल, साले राजू, जहानगंज के गांव आलूपुर के फर्जी सांसद प्रतिनिधि रजनेश राजपूत, सिपाही यशवंत यादव व महेश उपाध्याय समेत पांच पर आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में रिपोर्ट लिख ली गई थी।
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स्थानीय पुलिस की अब तक की कार्रवाई
युवक की मौत के मामले में पुलिस ने पिता की तहरीर पर मामला दर्ज किया। प्रकरण में फर्जी सांसद प्रतिनिधि बनकर थानों में रौब गांठने वाले नामजद आरोपी रजनेश राजपूत व दो सिपाहियों समेत पांच आरोपियों को जेल भेजा। आरोपी दोनों सिपाहियों को निलंबित किया गया। पूरे प्रकरण की विभागीय जांच सीओ अमृतपुर को सौंपी गई है।
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10 दिन बाद भी सुसाइड नोट का हस्तलेख मिलान न कर सकी पुलिस-
फर्रुखाबाद। ससुरालियों के सामने चौकी में पिटाई और 40 हजार रुपये लेकर छोड़ने से दुखी मऊदरवाजा थाने के गांव छेदा नगला निवासी पूर्व बीडीसी रामरहीश राजपूत के पुत्र दिलीप (25) की आत्महत्या की जांच पैंट पर लिखे सुसाइड नोट का हस्तलेख मिलान पर अटकी है। जांच अधिकारी थानाध्यक्ष बलराज भाटी ने बताया कि दिलीप का परिजनों ने पैनकार्ड दिया है। समझौता पत्र पर हस्ताक्षर भी मिले हैं। जेल गए नामजद सिपाही यशवंत यादव, महेश उपाध्याय, सांसद के फर्जी प्रतिनिधि रजनेश राजपूत, ससुर बनवारी लाल और साला जेल में हैं। उनकी शुक्रवार को ही जमानत अर्जी खारिज हुई है। हस्तलेख के मिलान पर ही पूरी जांच टिकी है। (संवाद)
वर्जन-्र
सभी बिंदुओं पर हो रही जांच
इस प्रकरण में गंभीरता के साथ सभी पांचों नामजद आरोपियों को जेल भेजा गया है। नामजद दोनों सिपाहियों को निलंबित कर विभागीय जांच प्रचलित है। प्रकरण की विवेचना जारी है। पुलिस सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जांच कर कार्रवाई कर रही है।
डॉ संजय कुमार, एएसपी
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पति-पत्नी के विवाद के दौरान चौकी पुलिस के उत्पीड़न और अपमान से आहत होकर युवक के आत्महत्या मामले का संज्ञान मानवाधिकार आयोग ने लिया है। 15 जुलाई को घटित हुई इस घटना में मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव छेदा नगला निवासी दिलीप कुमार राजपूत (25) ने घर में साड़ी से पंखे के कुंडे में फंदा लगा लिया था। सफेद पैंट पर लिखे सुसाइड नोट में युवक ने पुलिस की कार्यशैली और बर्बरता का जिक्र किया था।
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सुसाइड नोट में युवक ने पत्नी व ससुरालियों समेत हथियापुर पुलिस चौकी के दो पुलिस कर्मियों पर चौकी में प्रताड़ित करने व 40 हजार लेकर चौकी से छोड़ने का आरोप लगाया था। मृतक के पिता की तहरीर पर कमालगंज के गांव रसीदपुर ससुर बनवारी लाल, साले राजू, जहानगंज के गांव आलूपुर के फर्जी सांसद प्रतिनिधि रजनेश राजपूत, सिपाही यशवंत यादव व महेश उपाध्याय समेत पांच पर आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में रिपोर्ट लिख ली गई थी।
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स्थानीय पुलिस की अब तक की कार्रवाई
युवक की मौत के मामले में पुलिस ने पिता की तहरीर पर मामला दर्ज किया। प्रकरण में फर्जी सांसद प्रतिनिधि बनकर थानों में रौब गांठने वाले नामजद आरोपी रजनेश राजपूत व दो सिपाहियों समेत पांच आरोपियों को जेल भेजा। आरोपी दोनों सिपाहियों को निलंबित किया गया। पूरे प्रकरण की विभागीय जांच सीओ अमृतपुर को सौंपी गई है।
10 दिन बाद भी सुसाइड नोट का हस्तलेख मिलान न कर सकी पुलिस-
फर्रुखाबाद। ससुरालियों के सामने चौकी में पिटाई और 40 हजार रुपये लेकर छोड़ने से दुखी मऊदरवाजा थाने के गांव छेदा नगला निवासी पूर्व बीडीसी रामरहीश राजपूत के पुत्र दिलीप (25) की आत्महत्या की जांच पैंट पर लिखे सुसाइड नोट का हस्तलेख मिलान पर अटकी है। जांच अधिकारी थानाध्यक्ष बलराज भाटी ने बताया कि दिलीप का परिजनों ने पैनकार्ड दिया है। समझौता पत्र पर हस्ताक्षर भी मिले हैं। जेल गए नामजद सिपाही यशवंत यादव, महेश उपाध्याय, सांसद के फर्जी प्रतिनिधि रजनेश राजपूत, ससुर बनवारी लाल और साला जेल में हैं। उनकी शुक्रवार को ही जमानत अर्जी खारिज हुई है। हस्तलेख के मिलान पर ही पूरी जांच टिकी है। (संवाद)
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सभी बिंदुओं पर हो रही जांच
इस प्रकरण में गंभीरता के साथ सभी पांचों नामजद आरोपियों को जेल भेजा गया है। नामजद दोनों सिपाहियों को निलंबित कर विभागीय जांच प्रचलित है। प्रकरण की विवेचना जारी है। पुलिस सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जांच कर कार्रवाई कर रही है।
डॉ संजय कुमार, एएसपी