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हिंदी हिंदुस्तान बनेगी, उर्दू उसकी जान बनेगी
ब्यूरो/ अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Updated Mon, 13 Apr 2015 12:05 AM IST
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मीर अजीजुल्लाह मक्की शाह बाबा की दरगाह में चल रहे
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उर्स में कव्वालों ने नातिया कलाम सुनाकर शमा बांध दिया। अकीदतमंदों ने
चादर चढ़ाकर मनौती मांगी। इस दौरान लगे मेले का लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया।
कसबा स्थित मक्की शाह बाबा की दरगाह में चल रहे उर्स का आगाज मौलाना साजिद अली ने कुरआन की तिलावत कर किया। इस दौरान कव्वाली का आयोजन किया गया। कव्वाल मंसूर मतलूब ने कलाम सुनाया हिंदी हिंदुस्तान बनेगी और उर्दू उसकी जान बनेगी, दोनों शब्दों को मिलाकर भारत की पहचान बनेगी।
इसके साथ ही दिल्ली से आए कव्वाल गुलाम साबिर और राजस्थान से आए कव्वाल यूसुफ परवेज ने भी एक से बढ़कर एक कलाम सुनाए। अकीदतमंदों ने मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी। दरगाह के पास लगे मेला का लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया।
बच्चों ने जहां झूले का लुत्फ लिया। वहीें बड़ों ने सर्कस देखा। महिलाओं ने सौंदर्य प्रशाधन की दुकानों पर जमकर खरीददारी की। मौलाना साजिद अली ने बताया कि 13 अप्रैल को उर्स का समापन होगा। इस अवसर पर शाकिर अली, वकार खां, महफूज खां, बबलू खां और मोहम्मद आरिफ अंसारी आदि मौजूद रहे।
कसबा स्थित मक्की शाह बाबा की दरगाह में चल रहे उर्स का आगाज मौलाना साजिद अली ने कुरआन की तिलावत कर किया। इस दौरान कव्वाली का आयोजन किया गया। कव्वाल मंसूर मतलूब ने कलाम सुनाया हिंदी हिंदुस्तान बनेगी और उर्दू उसकी जान बनेगी, दोनों शब्दों को मिलाकर भारत की पहचान बनेगी।
इसके साथ ही दिल्ली से आए कव्वाल गुलाम साबिर और राजस्थान से आए कव्वाल यूसुफ परवेज ने भी एक से बढ़कर एक कलाम सुनाए। अकीदतमंदों ने मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगी। दरगाह के पास लगे मेला का लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया।
बच्चों ने जहां झूले का लुत्फ लिया। वहीें बड़ों ने सर्कस देखा। महिलाओं ने सौंदर्य प्रशाधन की दुकानों पर जमकर खरीददारी की। मौलाना साजिद अली ने बताया कि 13 अप्रैल को उर्स का समापन होगा। इस अवसर पर शाकिर अली, वकार खां, महफूज खां, बबलू खां और मोहम्मद आरिफ अंसारी आदि मौजूद रहे।